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बाथरूम मे सुहागरात मना ली

Antarvasna, desi kahani: मेरी सहेली मेरे घर पर आई हुई थी वह मुझसे काफी समय बाद मिल रही थी अब वह अपने परिवार के साथ कोलकाता में ही सेटल हो चुकी हैं उसके पिताजी ने कोलकाता में ही अपना बिजनेस शुरू किया और उसके बाद वह लोग कोलकाता चले गए। मेरी सहेली कुछ दिनों के लिए हमारे घर लखनऊ आई हुई थी लखनऊ से उसकी काफी यादें जुड़ी हुई हैं, मेरी सहेली का नाम रितिका है। रितिका और मैं आपस में बात कर रहे थे तो रितिका ने कुछ पुरानी यादें ताजा कर दी हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे और कहने लगी कि जब पहली बार हम लोगों की आपस में मुलाकात हुई थी तो हमें कितना अच्छा लगा था। जब पहले दिन मैं अपने स्कूल में गई तो स्कूल के पहले दिन ही मेरी रितिका से मुलाकात हो गयी थी और उससे मेरी काफी अच्छी दोस्ती हो गई उसके बाद हम दोनों ने कॉलेज साथ में किया। कुछ समय पहले ही उसका परिवार कोलकाता चला गया लेकिन वह मुझसे मिलने के लिए लखनऊ आई हुई थी हम दोनों ने साथ में काफी दिन बिताए।

रितिका ने मुझे बताया कि कोलकाता में उसके पड़ोस में ही अमन रहता है जिसे कि वह काफी पसंद करने लगी है अमन और उसके बीच अच्छी दोस्ती है। जब रितिका ने मुझे अमन की तस्वीर दिखाई तो मैंने उसे कहा कि अमन तो दिखने में काफी अच्छा है और जब रितिका ने मुझे अमन के बारे में बताया तो मैंने रितिका को कहा अमन तुम्हारे लिए सही लड़का है और तुम्हें उससे शादी कर लेनी चाहिए। रितिका मुझे कहने लगी कि हां सुजाता तुम बिल्कुल ठीक कह रही हो मैं भी सोचती हूं कि अमन के साथ मुझे शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि अमन का साथ मुझे काफी अच्छा लगता है। वह लोग एक दूसरे से फोन पर भी काफी बातें किया करते थे जिस वजह से उन दोनों के बीच काफी अच्छी अंडरस्टैंडिंग थी। रितिका कुछ दिनों तक लखनऊ में ही थी और उसके बाद वह कोलकाता चली गई, रितिका कोलकाता चली गई थी और मैं घर पर मां के साथ ही रहती मां के साथ मुझे अच्छा लगता था। एक दिन मां मुझे कहने लगी कि सुजाता बेटा मैं पड़ोस में जा रही हूं तुम घर पर ही रहना मैंने मां को कहा ठीक है मां मैं घर पर ही हूं। मां हमारे पड़ोस में आंटी से मिलने के लिए चली गई थी और मैं घर पर ही थी तभी हमारे घर की डोर बेल बजी और मैंने जब दरवाजा खोला तो सामने कोरियर वाला खड़ा था मैंने उससे कहा हां भैया कहिये तो वह कहने लगा कि क्या सुशांत मिश्रा का घर यहीं है।

मैंने उसे कहा हां यही सुशांत मिश्रा का घर है वह हमारे पिताजी हैं वह कहने लगा कि आपका कोरियर आया हुआ है मैंने उससे कहा कि भला पापा का कौन सा कुरियर आया हुआ है। मैंने उससे वह कुरियर ले लिया और उसके बाद वह वहां से चला गया मैंने भी अब सोचा कि इस कुरियर को खोल कर देख लेती हूँ। मैंने जब वह कोरियर खोला तो उसमे मैंने देखा शादी का एक कार्ड था जब मैंने शादी के कार्ड पर नाम पड़ा तो उसमें रितिका और अमन का नाम छपा हुआ था मैंने तुरंत ही रितिका को फोन किया और कहा कि रितिका तुमने तो मुझे अपनी शादी के बारे में कुछ बताया ही नहीं और सीधा घर पर कार्ड भिजवा दिया। रितिका मुझे कहने लगी कि सुजाता मैं तुम्हें सरप्राइस देना चाहती थी जब मैं लखनऊ से वापस लौटी थी तो उसी वक्त अमन और मैंने एक दूसरे से अपने दिल की बात कह दी थी और अब हम लोगों ने शादी करने का फैसला कर लिया है। मैंने रितिका से कहा यह तो बहुत अच्छी बात है कि तुमने शादी करने का फैसला कर लिया है और अब तुम्हारी शादी भी होने वाली है मुझे तो इस बात से बहुत खुशी हो रही है। रितिका ने मुझसे पूछा सुजाता तुम कब आ रही हो तो मैंने उससे कहा अभी तो तुम्हारी शादी में काफी वक्त है वह कहने लगी कि अब हमारी शादी में सिर्फ 6 महीने ही तो बचे हुए हैं और तुम्हें शादी के लिए कोलकाता जरूर आना है। मैंने उससे कहा ऐसा हो सकता है कि तुम्हारी शादी हो और मैं ना आऊं मैं तुम्हारी शादी में जरूर आऊंगी तुम उसकी बिल्कुल भी फिक्र मत करो। मैंने उस दिन रितिका के साथ काफी देर तक बात की और जब मैंने फोन रखा तो उसके थोड़ी देर बाद ही मेरी मां भी आ चुकी थी और मां ने जब वह शादी का कार्ड देखा तो वह मुझे कहने लगी कि बेटा यह किसकी शादी का कार्ड है। मैंने मां को बताया कि मां यह रितिका की शादी का कार्ड है मां बड़ी हैरानी से मेरी तरफ देखने लगी और कहने लगी कि अभी कुछ दिनों पहले ही तो रितिका हमारे घर पर आई थी तब तो उसने हमें इस बारे में कुछ भी नहीं बताया कि वह शादी कर रही है अब अचानक से वह शादी कर रही है।

मां बड़ी हैरान थी मैंने मां को अमन के बारे में बताया और कहा कि अमन उनके पड़ोस में ही रहता है अमन बहुत ही अच्छा लड़का है इसलिए उसके परिवार वालों ने रितिका की शादी उससे करवाने का फैसला कर लिया और यह सब बड़ी जल्दी में हुआ। मां अपने कमरे में चली गई और थोड़ी देर बाद वह कमरे से बाहर आई और मुझे कहने लगी कि सुजाता बेटा मैं रसोई में खाना बना रही हूं मैंने मां से कहा हां मां मैं यहीं बैठी हुई हूं। मां रसोई में खाना बना रही थी थोड़ी देर बाद मैं भी रसोई में चली गई और उनका हाथ बढाने लगी मां मुझे कहने लगी कि तुम्हारे बड़े भैया तो कब से घर ही नहीं आए हैं। मेरे भैया लंदन में नौकरी करते हैं वह काफी समय से घर नहीं आए हैं और कुछ दिनों से उनसे हमारी फोन पर भी बात नहीं हो पा रही थी जिस वजह से मां काफी चिंतित थी। थोड़ी ही देर बाद पापा भी अपने दफ्तर से वापस लौट चुके थे और मां ने उनसे आते ही पूछा कि क्या रोहन का तुम्हें फोन आया था तो पापा ने कहा कि नहीं मुझे तो रोहन का कोई भी फोन नहीं आया।

मां और पापा दोनों ही इस बात से बहुत परेशान थे कि रोहन भैया ने काफी दिनों से फोन नहीं किया है और उनका नंबर भी नहीं लग पा रहा था उनसे कोई भी संपर्क नहीं हो पा रहा था लेकिन कुछ दिनों बाद रोहन भैया ने पापा को फोन कर दिया था तब जाकर मां को भी तसल्ली हो गई थी। अब रितिका की शादी नजदीक आने वाली थी और मैं रितिका की शादी के लिए कोलकाता जाने वाली थी पापा ने ही मेरी फ्लाइट की टिकट बुक करवा दी थी। मैं जब कोलकाता गयी तो रितिका मुझे लेने के लिए आई हुई थी और मैं रितिका के साथ उसके घर पर चली गई। रितिका के साथ मे उसके घर पर गई तो उसके घर पर काफी मेहमान आ चुके थे। उसके घर पर बहुत भीड़ थी वह मुझे अपने कमरे में ले गई और कहने लगी सुजाता तुम यहीं पर रहना मैं अभी आती हूं। उसने मेरे लिए शरबत मंगवा लिया था मैं शरबत पी रही थी तभी एक लड़का मेरे पास आकर बैठ गया। मैंने उसकी तरफ देखा कुछ देर तक तो हम दोनों एक दूसरे से बात ही नहीं कर रहे थे लेकिन जब रितिका आई तो रितिका ने मेरा परिचय रोहित से करवाया। रोहित उसके रिश्ते में भाई लगता है रितिका घर पर कुछ ज्यादा ही बिजी थी इसलिए वह मुझे समय नहीं दे पा रही थी। मैं रोहित के साथ बात करने लगी रोहित के साथ बात करके मुझे अच्छा लगा उसके बारे मे भी मुझे पता चला। मै काफी अकेली थी लेकिन रोहित का साथ पाकर मुझे अच्छा लगा शादी के दौरान ही रोहित और मेरी बीच नजदीकियां बढ़ चुकी थी हम दोनों एक दूसरे के बिना रहे ही नहीं पा रहे थे। मेरी नजरें शादी के दौरान भी रोहित को ढूंढ रही थी उस दिन जब रोहित और मै बैंक्विट हॉल के पीछे की तरफ गए तो वहां पर रोहित ने अपने जेब से सिगरेट निकाली और वह सिगरेट पीने लगा। जब वह सिगरेट पी रहा था तो मैंने उसे कहा क्या तुम सिगरेट पीते हो? उसने मुझे जवाब दिया कि हां कभी-कभार मैं पी लेता हूं।

मैंने उसके मुंह से सिगरेट फेंकते हुए उसे होंठो को चूम लिया और हम दोनों एक दूसरे को किस करने लगे। जब हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे थे तो मैं भी अपने आपको ना रोक सकी और ना ही रोहित अपने आपको रोक सका। उसने अपने हाथ को मेरी चूतड़ों पर रखते हुए मेरी गांड को बहुत जोर से दबाने लगा मेरी गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी और हम लोगों बाथरूम में चले गए। वहां पर जब हम दोनों का गए तो मैने रोहित की पैंट की चैन को खोलते हुए उसके लंड को बाहर निकाला जब मैंने उसके मोटे लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसे अपने मुंह में समा लिया और उसके लंड को चूस कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैं रोहित के लंड को अपने मुंह में ले रही थी मेरे लिए यह पहला ही मौका था मैंने किसी के लंड को अपने मुंह में लिया था। अब रोहित ने भी मेरे कपड़े उतारकर मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी चूत को चाटने लगा मेरी चूत को जब वह चाट रहा था तो मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी बाहर की तरफ निकल रहा था उसने अपने लंड को मेरी चूत पर लगाया तो मैंने उसे कहा तुम धीरे से अपने लंड को मेरी चूत मे डालो।

उसने धीरे-धीरे अपने मोटे लंड को मेरी योनि मे प्रवेश करवाना शुरू किया जब उसका मोटा लंड मेरी चूत मे चला गया तो मैं जोर से चिल्लाई। उसका लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होने लगा मैं बहुत ही खुश थी और वह भी बड़े अच्छे से मुझे चोदता उसने मेरी चूत से खून निकाल कर रख दिया था। एक तरफ तो रितिका की शादी होने वाली थी और दूसरी तरफ मैं रोहित के साथ सुहागरात मना रही थी। रोहित और मैं एक दूसरे के साथ बड़े अच्छे से सेक्स कर रहे थे उसने मुझे काफी देर तक ऐसे ही धक्के दिए उसने मेरे बदन की गर्मी को इस कदर बढ़ा दिया था कि मैं अपने आपको बिल्कुल भी ना रोक सकी मैं झड चुकी थी। मैंने अपने पैरों को आपस में मिला लिया रोहित ने मेरी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिरा दिया उसने मेरी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिरा दिया था। मैं बहुत ही ज्यादा खुश थी रोहित और मेरे बीच संभोग हुआ। जब हम दोनों बाहर आए तो रितिका की शादी हो चुकी थी। रोहित से मेरी मुलाकात नही हो पाती है लेकिन हम लोग फोन पर एक दूसरे से बात किया करते हैं।

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