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बीवी की चूत में सरदार का लोड़ा

biwi हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम दानिश है। में बिहार का रहने वाला हूँ और लुधियाना में काम करता हूँ। मेरी 1 साल पहले रूबी से शादी हुई थी, हमारे कई औलाद नहीं है, मेरी ड्यूटी अक्सर नाईट में ही रहती है। फिर एक दिन अचानक से मिल का ब्रेक डाउन हो गया, सबको छुट्टी मिल गई थी, तो में भी अपने घर आ गया। एक रूम का घर था, खिड़की रोड़ साईड ही थी। अब में खिड़की से रूबी को आवाज देने ही वाला था कि मुझे किसी मर्द की आवाज सुनाई पड़ी, तो में चौंक गया और पीछे की दीवार से अंदर गया और चाबी के छेद से अंदर देखा तो अंदर का नज़ारा देखकर मेरा गुस्सा सांतवे आसमान पर चढ़ गया था। अब में दरवाज़ा तोड़कर अंदर जाकर उन दोनों को जान से मार देना चाहता था, लेकिन सोचा कि जरा देख तो लूँ कि वो दोनों क्या-क्या करते है? अब अंदर लाईट जल रही थी और रूबी बगल का पड़ोसी सरदार जीत सिंह की गोद में बैठी थी। अब वो दोनों बिल्कुल नंगे थे, सरदार की पीठ मेरी तरफ थी।

अब रूबी सामने से उसकी गोद में बैठी थी और सरदार उसकी चूचीयों की दोनों घुंडीयों को अपनी उँगलियों से मसल रहा था। अब रूबी ज़ोर ज़ोर से सिसकारी मार रही थी और फिर अचानक से रूबी जीत से ज़ोर से लिपट गई और बोली कि आह सरदार जी, अब बर्दाश्त नहीं होता, कब तक लंड पर बैठाकर रखोगे? अब डालो ना। फिर तभी जीत मेरी पत्नी को अपने से और चिपकाकर बोला कि इतनी भी क्या जल्दी है? तुझे तो सारी रात मज़ा दूँगा, आराम से चुदाई का मज़ा लो। फिर तभी रूबी अपने चूतड़ को नचाकर बोली कि सरदार जी एक बार अपने तगड़े लंड का मज़ा दे दो, फिर जो चाहे करना। तभी जीत रूबी की गांड को सहलाकर बोला कि क्यों तेरे पति का लंड तगड़ा नहीं है क्या? तो तब रूबी अपने बदन को लहराकर बोली कि नहीं राज़ा, उनका तो आपसे आधा भी नहीं है।

फिर सरदार रूबी को अलग करते हुए बोला कि ओह कोई बात नहीं, अब तुमको तगड़े लंड के लिए तरसना नहीं होगा, लो तुम खुद ही अपने अंदाज़ में मेरे लंड का मज़ा ले लो और फिर सरदार खड़ा हो गया। में आज पहली बार ऐसा लंड देख रहा था, उसका लंड 7 इंच लंबा और लगभग 3 इंच मोटा था, उसका सुपाड़ा तो गजब का था, ऐसा लग रहा था कि जैसे लंड पर ज़ीरो वॉट का बल्ब लगा हो और उसका पूरा लंड चमक रहा था। अब में समझ गया था कि सरदार ने मेरी पत्नी को अपने लंड पर बहुत देर तक बैठाकर रखा था जिस कारण रूबी की चूत ने मस्ती में अपना पूरा पानी निकालकर सरदार के लंड को तर कर दिया था। फिर मेरी नजर रूबी की चूत पर गई, उसकी चूत भी पानी से तर थी। फिर सरदार बेड का गद्दा जमीन पर डालकर बोला कि आओ जमीन पर चुदाई करने और करवाने में ज़्यादा मज़ा आता है, सरदारनी लोग इसी तरह चुदवाना पसंद करती है, क्योंकि चूत पर धक्का जरा जोर से पड़ता है।
फिर उसने पीठ के बल लेटकर एक तकिया अपनी गांड के नीचे लगा लिया। अब इस आसन से उसका पूरा चूतड़ ऊपर उठ गया था, जिस कारण लंड एकदम खम्बे की तरह खड़ा होकर आसमान की तरफ देख रहा था। फिर सरदार रूबी का हाथ पकड़कर अपनी तरफ खींचते हुए बोला कि आओ रानी तुम खुद मेरे लंड को अपनी चूत में आराम से जितना चाहो लो। फिर तब मैंने महसूस किया कि मेरी पत्नी की टाँगे कांप रही थी। फिर वो अपनी दोनों टांगो को सरदार के दोनों तरफ करके खड़ी हुई, तो सरदार उसकी कमर को पकड़कर नीचे बैठने लगा। अब रूबी की चूत पर सरदार का लंड सट गया था। तो तभी रूबी झुककर सरदार के दोनों कंधो को पकड़कर कांपकर बोली कि हाए अल्ला, बहुत मोटा है। फिर तभी सरदार मेरी पत्नी के चूतड़ पर अपने लंड को रगड़ते हुए बोला कि रानी मोटा है तभी तो तेरी पूरी जमकर घिसाई करेगा, आओं जरा ज़ोर लगाओं। फिर तभी रूबी ने अपनी गांड को उसके लंड पर दबाया, तो तभी सरदार ने रूबी के चूतड़ को एक झटका दिया तो मैंने देखा कि उसका लंड सुपाड़ा समेत 2 इंच तक मेरी पत्नी की चूत में समा गया था।
फिर तभी रूबी अपना सिर उठाकर दर्द और मस्ती में कहराई हाए अलल्ल्ल्ला फट गई, अयाया में नहीं ले पाऊँगी। अब में साफ देख रहा था, रूबी की चूत गोल हो गई थी। फिर सरदार रूबी के चूतड़ पर से अपना हाथ हटाकर उसके चेहरे को अपने दोनों हाथों में लेकर बोला कि ओह रब्बा, तेरी चूत तो गजब की कसी है, हाए रानी पूरा अंदर लो ना। फिर तभी रूबी अपनी चूत को उसके लंड पर ताकत से दबाते हुए बोली कि आह नहीं जाएगा, लेकिन लंड घुसा। तो रूबी उसी तरह कसमसाकर अपनी चूत को उसके लंड पर दबाती रही और हर बार उसी तरह कहती रही हाए अल्ला नहीं जाएगा और 1-1 इंच कर सरदार का पूरा 7 इंच का लंड पूरा अपनी चूत में ले लिया।
अब रूबी सरदार का पूरा लंड अपनी चूत में लेकर सरदार के ऊपर लेट गई थी और अपनी गांड को ऊपर उठाने लगी थी। फिर उसका लंड धीरे-धीरे बाहर निकलता गया और उसका सुपाड़ा अंदर रखकर फिर से अपनी चूत को उसके लंड पर दबाया। अब उसका लंड रूबी की चूत के पानी से पूरा चिकना हो चुका था, तो घप से उसका पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत में जाकर छुप गया। अब सरदार के लंड पर अपनी पत्नी को अपनी चूत को पटकता हुआ देखकर मुझे भी मज़ा आने लगा था। अब रूबी का चूतड़ स्पीड पकड़ चुका था। अब रूबी मस्ती में अपनी चूत को सरदार के मोटे लंड पर ज़ोर-ज़ोर से पटक रही थी और अपने सिर को पूरा उठाकर मादक आवाजे निकाल रही थी आअह, आअह, ऊऊ, ऊह, हाई राज़ा, में ऐसा ही लंड खोज रही थी, राज़ा अया, राज़ा अब तक तुम कहाँ थे? हाए अल्ला, अब तो रोज तुमसे ही चुदवाऊँगी, बोलो राज़ा चोदोगे ना मुझे? अब उधर सरदार भी टाईट चूत पाकर पूरा मस्ती में आ गया था। अब रूबी जब भी अपनी चूत को उसके लंड पर पटकती, तो जीत भी अपना लंड ऊपर उठा देता था और ज़ोर से पच-पच की मधुर आवाज से पूरा कमरा गूँज उठता था।
अब सरदार भी मस्त होकर घोड़े की तरह हिलने लगा था और बोला कि हाँ रानी, अब तो तेरी मस्त चूत ही मारूंगा, आह बुलबुल, मार-मार ज़ोर से मार, ऊह मैंने केवल सुना था रानी कि मुसलमान की चूत बहुत मस्त होती है, लेकिन आज पता चल गया कि रानी लोग सच कहते है, ऐसी मस्त चुदवाने वाली पहली बार मिली है, ले रानी, ले पूरा ले। फिर तभी रूबी जमकर धक्के मारते हुए हांफते हुए बोली कि पूरा तो ले रही हूँ राज़ा, हाए अल्ला मेरा पानी अब रूबी पूरा शब्द भी बोल नहीं पाई थी कि तभी अचानक से जीत पर धड़ाम से गिर गई और अपना हाथ जीत की गर्दन में लपेटकर छिपकली की तरह चिपककर ऊ ऊ करते हुए झटके खाने लगी थी। अब में समझ गया था कि रूबी झड़ रही थी। तभी सरदार मेरी पत्नी के चूतडों को अपने लंड पर खचाखच धक्के मारकर चीख उठा और बोला कि ले रानी मेरा भी ले ले। फिर तब मैंने देखा कि सरदार अपने चूतड़ पूरे ऊपर उठाकर झटके खाने लगा था और फिर सरदार करीब 2 मिनट तक लगातार झटके ख़ाता रहा, जबकि में तो 2-4 सेकेंड में ही ठंडा हो जाता था।
फिर जब तक सरदार झटके ख़ाता रहा, मेरी पत्नी बड़बड़ाती रही उूउऊफ, बाप रे बाप, बस राज़ा बस, पूरा भर गया, हाए अल्ला बाहर गिराओ, लेकिन सरदार ने अपने लंड का पूरा पानी मेरी पत्नी की चूत में ही गिराकर दम लिया। अब वो दोनों ज़ोर-ज़ोर से हाँफ रहे थे। फिर कुछ देर के बाद जब वो दोनों शांत हुए, तो तब रूबी उसके लंड पर से ऊपर उठी। ये क्या? मैंने साफ देखा जैसे ही लंड चूत से बाहर निकला, तो उसकी चूत से बहुत सारा गाढ़ा-गाढ़ा सरदार के लंड का माल बाहर गिरने लगा था, में यकीन के साथ कह सकता हूँ कि कम से कम आधा कप तो जरूर होगा। फिर तभी रूबी उसे देखकर अपनी आँखे फाड़-फाड़कर सिहरते हुए बोली कि बाप रे बाप इतना सारा? तो तब सरदार मेरी पत्नी की चूत पर अपना एक हाथ फैरकर बोला कि रानी ये कोई मुसलमान की पिचकारी नहीं है, ये तो जाट सरदार का पंप है जो पूरी फसल को पानी देकर लहरा देता है।
अब मुझे उसकी बात सुनकर मुझे गुस्सा तो आया था, लेकिन उसकी बातों में सच्चाई थी जो रूबी के चेहरे से साफ़ पता चल रही थी, उसके चेहरे पर सन्तुष्टि का असर साफ झलक रहा था। दोस्तो ये बिल्कुल सच्ची घटना है, मुझे भी उन दोनों की चुदाई देखने में बहुत मज़ा आने लगा था, इसलिए में अक्सर मैनेजर से बहाना मारकर घर आ जाता था और छुपकर अपनी पत्नी को सरदार से चुदवाते हुए देखता था ।।
धन्यवाद

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