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चूत के जलवे कमाल के

Hindi sex stories, antarvasna: मुझे अपने ऑफिस से आने में देर हो गई थी उस वक्त रात के 11:00 बज रहे थे। मैं जब अपने फ्लैट में पहुंचा तो फ्लैट में पहुंचने के बाद मैंने खाना बाहर से ही आर्डर करवा लिया था और थोड़ी ही देर बाद खाना भी आ गया था, खाना खाने के बाद मैं लेट गया। काफी दिनों से मुझे बहुत अकेला महसूस हो रहा था क्योंकि मैं अपने परिवार से दूर पुणे में रहता हूं पुणे में मुझे जॉब करते हुए करीब 3 वर्ष हो चुके हैं। कॉलेज खत्म हो जाने के बाद मेरी जॉब पुणे की ही एक बड़ी कंपनी में लग गई मैं अपनी जॉब से बहुत ही ज्यादा खुश था। मेरी जिंदगी में सब कुछ ठीक चल रहा था परन्तु मुझे कई बार ऐसा भी लगता कि मुझे मेरे परिवार के साथ रहना चाहिए लेकिन यह सब हो नहीं सकता था क्योंकि मेरे ऊपर ही मेरे परिवार की सारी जिम्मेदारी थी। मेरे पिताजी ने किसी प्रकार से मुझे पढ़ाया और मेरी पढ़ाई खत्म हो जाने के बाद अब मैं ही घर की सारी जिम्मेदारी अपने कंधे पर उठाया हुआ था। पापा की तबीयत भी ठीक नहीं रहती थी क्योंकि उनकी उम्र भी अब हो चुकी है इसीलिए उनकी तबीयत बिल्कुल ठीक नहीं रहती और शायद मैं ही उनकी जिंदगी का एक सहारा था इसी वजह से तो पापा और मम्मी हमेशा ही मुझे कहते कि बेटा तुम जब से जॉब करने लगे हो तब से हमारी घर की स्थिति सुधरने लगी है।

पापा का बिजनेस था लेकिन जब उन्हें बिजनेस में नुकसान हुआ तो उसके बाद वह उस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाए और फिर उनके जीवन में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा था। उन्होंने मेरी पढ़ाई पूरी करवाने के बाद मुझे कहा कि बेटा तुम अपनी जिंदगी में मेहनत करते रहना, यह सुनकर मैंने हमेशा ही पापा और मम्मी की मदद की मैंने उन्हें अपने पास आने के लिए भी कहा लेकिन वह लोग मेरे पास नहीं आते वह लोग मथुरा में ही रहते हैं। अगले दिन जब सुबह मैं 7:00 बजे उठा तो सुबह उठने के बाद मैं अपने ऑफिस के लिए तैयार होने लगा और साथ ही मैं अपना नाश्ता बनाने लगा। करीब 8:30 बज चुके थे मुझे घर से 9:00 बजे निकलना था और मैं 9:00 बजे घर से अपने ऑफिस के लिए निकल गया। जब मैं ऑफिस पहुंचा तो उस दिन मैंने देखा कि हमारे ऑफिस में एक लड़की आई हुई है उसके ऑफिस का पहला ही दिन था मैं उसकी तरफ देख रहा था और वह मेरी तरफ देख रही थी। हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे तो जब लंच टाइम में मैंने उससे बात की तो उसने मुझे अपना नाम बताया और कहा की मेरा नाम सुहानी है। सुहानी को मैंने अपना नाम बताया और हम दोनों की बात शुरू होने लगी लेकिन मुझे यह बात नहीं पता थी कि सुहानी भी मथुरा की रहने वाली है।

हम दोनों एक ही शहर के रहने वाले थे और शायद इससे बढ़कर हमारे लिए कुछ भी नहीं था हम दोनों बिल्कुल एक जैसे ही थे। सुहानी ने मुझे बताया कि उसका कॉलेज प्लेसमेंट में सिलेक्शन हुआ है मैंने सुहानी की काफी मदद की और हम दोनों एक दूसरे से बहुत बातें करने लगे थे। हम दोनों की बातें कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगी और वह शायद प्यार में भी तब्दील होने लगी लेकिन सुहानी ने कुछ समय पहले ही ऑफिस छोड़ दिया, सुहानी ने करीब एक साल जॉब करने के बाद जब ऑफिस छोड़ा तो उसके बाद मैं और सुहानी एक दूसरे से नहीं मिल पाए। सुहानी चली गई थी लेकिन हम दोनों की फोन पर बातें होती रहती थी हम दोनों की फोन पर काफी बातें होती थी। एक दिन मैंने सुहानी को कहा कि क्या तुम मुझसे मिलने के लिए पुणे आ सकती हो तो सुहानी ने कहा मैं पुणे तो नहीं आ सकती लेकिन आप मुंबई आ जाइए। मैंने भी सोचा कि क्यों ना मैं सुहानी को मिलने के लिए चला जाऊं और फिर मैं सुहानी को मिलने के लिए मुंबई चला गया। कोई तो ऐसी वजह थी कि सुहानी और मेरे बीच में प्यार होने लगा और हम दोनों एक दूसरे को बहुत प्यार करने लगे थे, शायद यही वजह थी कि मैंने अपने दिल की बात सुहानी से कह दी। मैं दो दिन मुम्बई में रुका और फिर मैं पुणे लौट आया हम दोनों के बीच प्यार हो चुका था मैं चाहता था कि सुहानी और मैं शादी कर ले। इस बात से सुहानी को कोई एतराज नहीं था वह मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो गई। सुहानी और मैंने कोर्ट मैरिज की और उसके बाद सुहानी मेरे साथ रहने लगी सुहानी ने पुणे में ही अब एक कंपनी ज्वाइन कर ली थी और वह जॉब करने लगी। मेरे माता-पिता भी खुश थे और सुहानी के माता-पिता को भी इससे कोई ऐतराज नहीं था। सुहानी और मेरी शादी हो जाने के बाद हम दोनों एक दूसरे का ध्यान रखते और हमारी जिंदगी में सब कुछ अच्छे से चल रहा था। सुहानी और मेरी जिंदगी में सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था और हम दोनों की शादीशुदा जिंदगी भी अच्छे से चल रही थी लेकिन हम दोनों अब कुछ ज्यादा ही बिजी रहने लगे थे इस वजह से हम दोनों को एक दूसरे के लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता था। हम दोनों को एक दूसरे के लिए बिल्कुल समय नहीं मिल पाता था इसलिए हम दोनों ने घूमने का फैसला किया और कुछ दिनों के लिए हम लोग कहीं साथ में घूमने के लिए जाना चाहते थे।

सुहानी और मैं कुछ दिनों के लिए दुबई जाना चाहते थे और हम लोगों ने दुबई जाने का फैसला कर लिया था हम जब दुबई घूमने के लिए गए तो हम लोगों का टूर बड़ा ही अच्छा रहा और उसके बाद हम दोनों वापस लौट आये थे। लौटने के बाद हम अपने काम पर ध्यान देने लगे थे। मैं ऑफिस से थका हुआ घर आया उस वक्त सुहानी घर पर आ चुकी थी। सुहानी मुझे कहने लगी गौतम आज आप काफी थके हुए नजर आ रहे हैं। मैंने सुहानी को कहा हां सुहानी मैं आज बहुत ज्यादा थक चुका हूं। सुहानी मुझे कहने लगी मैं आपके बदन की मालिश कर देती हूं। सुहानी और मैं बेडरूम में लेटे हुए थे जब सुहानी मेरे पैरों को दबा रही थी। मैं सुहानी को कहने लगा तुम ऐसे ही मेरे पैरों को दबाते रहो थोड़ी देर बाद सुहानी को मैंने अपनी बाहों में समा लिया। सुहानी के स्तन और मेरी छाती आपस में टकराने लगे मै उत्तेजित होने लगा। हम दोनों पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुके थे अब मैंने सुहानी के होंठों को चूमना शुरू किया तो सुहानी के अंदर से भी गर्मी बाहर निकलने लगी थी और सुहानी पूरी तरीके से तड़पने लगी। मैं और सुहानी एक दूसरे के होठों को किस कर रहे थे हमें बहुत ही मजा आ रहा था।

हम दोनों पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगे अब मैंने जब सुहानी के कपड़े उतारकर सुहानी से कहा मैं तुम्हारे गोरे बदन को महसूस करना चाहता हूं तो सुहानी मुस्कुराने लगी। मैंने सुहानी की नाइटी को उतारकर सुहानी के गोरे स्तनों को चूसना शुरू किया।मै सुहानी के गोरे स्तनों को जब चूसता तो उसके स्तनो से मैंने दूध को बहार निकाल दिया। अब सुहानी पूरी तरीके से तड़पने लगी थी और वह अपने पैरों को आपस में मिलाने लगी। मैं भी समझ चुका था कि सुहानी की चूत से निकलता हुआ पानी अब कुछ ज्यादा ही बढ़ चुका है इसलिए मैंने भी सुहानी की योनि पर अपनी जीभ को लगा कर सुहानी की योनि को चाटना शुरू कर दिया। सुहानी की योनि को मैं जिस प्रकार से चाट रहा था उससे मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था सुहानी को बहुत मजा आने लगा था। सुहानी मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा मुझे अब बहुत ही मजा आ रहा था। अब हम दोनों ही एक दूसरे की गर्मी को झेल नहीं पा रहे थे इसलिए मैंने भी अपने लंड को सुहानी की योनि पर लगा दिया और अंदर की तरफ डाला मेरा लंड सुहानी की चूत को फाडता हुआ अंदर घुसा और वह चिल्लाने लगी। उसके मुंह से निकलती हुई चीख बढ़ने लगी और मैं उसे बहुत ही तेजी से धक्के मारने लगा। मेरे धक्के अब इतने ज्यादा तेज हो गए मुझे मजा आ रहा था। वह मुझे कहने लगी ऐसे ही मुझे बस तुम धक्के मारते रहो और मुझे अपना बनाते रहो मैं समझ चुका था कि सुहानी को मजा आने लगा है इसलिए उसने भी अपने पैरो को खोलना शुरू कर दिया। मेरा मोटा लंड सुहानी की चूत के अंदर बाहर होता तो मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आता। हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे। मुझे तो सुहानी को चोदने में बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था सुहानी को भी बड़ा मजा आ रहा था। वह मेरा पूरा साथ दे रही थी और मुझे कहती मेरी चूत ऐसे ही मारते रहो मै सुहानी को तेजी से चोदे जा रहा था और वह मेरा साथ बडे अच्छे से देती।मुझे यह तो समझ आ चुका था कि मै सुहानी को ज्यादा देर तक चोद नही पाऊंगा। मैने उसे बहुत तेजी से चोदा और एक समय ऐसा आया जब मैने अपने माल को सुहानी की चूत मे गिरा दिया था। अब हम दोनो साथ मै बैठ गए फिर दोबारा से हमने चुदाई शुरु कि जो बहुत लंबी चलने वाली थी क्योंकि मे चाहता था उसे मै जमकर चोदू।

मेरा लंड सुहानी की चूतडो से टकरा रहा था और सुहानी को मजा आ रहा था। वह मुझसे अपनी चूतडो को मिलाए जा रही थी और मुझे तो बहुत ही मज़ा आ रहा था जिस प्रकार से मैं उसकी योनि का मजा ले रहा था। वह मुझे बोली मुझे तेजी से धक्के मारते रहो मैंने भी सुहानी को बहुत तेजी से धक्के दिए। मेरा पूरी तरीके से छिल चुका था लेकिन मेरी गर्मी बढ चुकी थी। करीब 10 मिनट तक ऐसे ही हम दोनों ने एक दूसरे का साथ दिया और जब मैंने अपने वीर्य की पिचकारी को सुहानी की चूत मे मारा तो वह बहुत खुश हो गई और उसके बाद हम दोनों साथ में लेटे हुए थे। हम दोनों के बीच बहुत ही ज्यादा प्यार है। सुहानी मेरा बड़े अच्छे से ध्यान रखती है शायद यही वजह है कि हम दोनों के बीच बहुत ही ज्यादा अंडरस्टैंडिंग है और कभी भी हम लोगों के बीच झगड़ा नहीं होता।

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