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जवानी की गलतियां

Antarvasna, hindi sex stories: मैं घर पर ही था तभी मेरे मामा की लड़की काजल आई और वह कहने लगी कि दिव्यांशु तुम क्या कर रहे थे तो मैंने काजल से कहा कुछ भी तो नहीं आज तो मैं घर पर ही था। वह मुझे कहने लगी क्या तुम मेरे साथ आज चल सकते हो मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हारे साथ कहां चलना है वह मुझे कहने लगी कि आज मेरी फ्रेंड की पार्टी है तो तुम भी मेरे साथ चलो ना। मैंने उसे कहा लेकिन मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकता वह मुझे कहने लगी प्लीज तुम मेरे साथ चलो ना तो मैंने उसे कहा चलो तुम्हारी बात मान ही लेता हूं। वह कहने लगी कि चलो कम से कम तुमने मेरी बात तो मान ली मैंने उसे कहा तुम मेरी बहन हो तो तुम्हारी बात तो माननी ही पड़ेगी। वह मुझे कहने लगी कि तुम एक काम करो आज हम लोग कार से चलते हैं मैंने उसे कहा ठीक है हम लोग कार से ही चल रहे हैं।

हम दोनों कार से उसकी फ्रेंड के बर्थडे में चले गए मेरे मामा जी हमारे घर के बिल्कुल पास ही रहते हैं और काजल हमारे घर पर अक्सर आया जाया करती है। उसे जब भी मेरी जरूरत पड़ती है तो वह मुझे ही कहती है कि तुम मेरे साथ चलो इसीलिए मैं काजल के साथ गया और जब मैं काजल के साथ एक पार्टी हॉल में पहुंचा तो वहां पर उसके काफी सारे फ्रेंड आए हुए थे मैं किसी को भी नहीं जानता था। मैंने काजल से पहले ही कह दिया था कि तुम्हे मेरे साथ ही रहना पड़ेगा उसने कहा था ठीक है मैं तुम्हारे साथ ही रहूंगी हम दोनों की रजामंदी एक ही शर्त पर बनी थी कि वह मेरे साथ ही रहेगी इसी शर्त पर मैं उसके साथ जाने के लिए राजी हुआ था। हम दोनों साथ में बैठे हुए थे तभी काजल की एक सहेली हमारे पास आकर बैठी और काजल ने मेरा उससे परिचय करवाया काजल ने कहा कि यह मेरे भैया है। काजल ने मेरा परिचय रितिका से करवाया रितिका से मिलकर मुझे अच्छा लगा वह हमारे साथ कुछ देर ही बैठी सब लोग पार्टी का एंजॉय कर रहे थे और मुझे भी अब अच्छा लगने लगा था क्योंकि काजल मेरे साथ ही थी।

जब पार्टी खत्म हुई तो हम लोग वहां से घर के लिए निकले हम लोग जब घर के लिए निकले तो काजल ने मुझे कहा कि तुम मुझे भी घर छोड़ देना। मैंने काजल से कहा अरे तुम्हें तो मैं घर छोडूंगा ही तुम मेरे साथ ही तो हो काजल कहने लगी हां ठीक है बाबा। काजल और मेरे बीच में बहुत नोक जोक होती रहती थी लेकिन जब भी काजल को जरूरत पड़ती तो वह मुझे ही याद किया करती थी और काजल भी कई बार मेरी मदद कर दिया करती थी। मैंने काजल को घर छोड़ा और मैं भी अपने घर आ गया काफी समय बाद मुझे रितिका मिली जब मुझे रितिका मिली तो मेरी उससे बातचीत हुई। कुछ देर तक तो मैं उसे पहचान नहीं पाया लेकिन जब उसने मुझे याद दिलाया कि वह मुझे पार्टी में मिली थी उसके बाद मुझे ध्यान आया। मैंने रितिका से कहा कि आज तो मैं थोड़ा जल्दी में हूं तुमसे फिर कभी मुलाकात करूंगा। उस दिन मेरे पास वाकई में समय नहीं था इसलिए मैं रितिका के साथ ज्यादा समय नहीं बिता पाया और वहां से मैं अपने काम पर निकल गया। कुछ समय बाद रितिका का फोन मेरे नंबर पर आया मुझे कुछ समझ नहीं आया कि उसने मुझे फोन क्यों किया और मेरा नंबर उसने कहां से लिया मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था तभी मुझे काजल मिली मैंने काजल से पूछा तुम्हारी सहेली रितिका ने मुझे फोन किया था। काजल कहने लगी कि हां उसने मुझसे तुम्हारा नंबर लिया था मैंने काजल से कहा लेकिन उसे मेरा नंबर लेने की क्या आवश्यकता पड़ गई तो काजल ने मुझे बताया कि लगता है वह तुम्हारे ऊपर फिदा हो चुकी है। मैंने उसे कहा तुम्हें तो मालूम है ना कि मैं लड़कियों से दूर ही रहता हूं और मुझे यह सब चीजें बिल्कुल भी पसंद नहीं आती। जब मैंने काजल से यह बात कही तो काजल कहने लगी हां दिव्यांशु मुझे मालूम है कि तुम लड़कियों से दूर रहते हो लेकिन इसमें भी तो कोई दोहराय नहीं है कि  रितिका तुम्हारे पीछे पागल है और वह तुम से बात करने के लिए बेताब रहती है। मेरी भी कुछ समझ में नहीं आया और मैं फिलहाल तो रितिका से बात करने लगा था रितिका से बात कर के मुझे अच्छा लगता है और उससे मेरी बात घंटों तक हुआ करती थी।

मुझे भी अब रितिका का साथ अच्छा लगने लगा था और शायद हम दोनों एक दूसरे को समझने लगे थे मुझे इस रिश्ते का कोई भी नाम समझ नहीं आ रहा था। मेरे दिल में ना तो रितिका के लिए ऐसा कुछ था और ना ही मैंने उसके बारे में ऐसा कुछ सोचा था लेकिन रितिका तो मेरे पीछे पूरी तरीके से पागल थी। वह चाहती थी कि हम लोग मिले परंतु मैं रितिका से नहीं मिला करता था सिर्फ हम लोगों की बातें फोन तक ही सीमित रहती थी। जब मैंने रितिका  से मिलने के लिए हामी भरी तो वह बहुत खुश थी रितिका ने मुझे कहा कि आज मेरी तरफ से ही सारी पार्टी का अरेंजमेन्ट होगा। रितिका ने मेरे लिए सारा बंदोबस्त करवा रखा था उसने कैंडल लाइट डिनर का बंदोबस्त किया हुआ था। जब हम दोनों आपस में मिले तो मुझे भी लगा कि रितिका शायद मेरे लिए बहुत ज्यादा सीरियस है और मैं उसका दिल भी नहीं दुखा सकता था क्योंकि रितिका का दिल दुखाना शायद ठीक नहीं था इसलिए मैंने रितिका से कहा कि देखो रितिका मुझे इस रिश्ते का कोई नाम समझ नहीं आ रहा है। रितिका मुझे कहने लगी हमें एक दूसरे को थोड़ा समय देना चाहिए और उसी के बाद तो हमें पता चलेगा कि आखिर यह रिश्ता क्या है। जब रितिका ने मुझसे यह बात कही तो मुझे भी एहसास हुआ कि रितिका बिल्कुल ठीक कह रही है हम लोगों को एक दूसरे को समय देना चाहिए।

मैंने और रितिका ने एक दूसरे को समय देने का फैसला कर लिया था और मुझे इस बात की खुशी भी थी कि हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझ पा रहे थे। रितिका दिल की बहुत अच्छी है मैने जब उसके साथ समय  बिताया तो मुझे एहसास हुआ कि वह बहुत ही ज्यादा अच्छी है और इसीलिए हम दोनों अब नजदीक आ चुके थे। हम दोनों को एक साथ रिलेशन में करीब 3 महीने हो चुके थे इन 3 महीनों में बहुत कुछ बदल चुका था। रितिका अब मेरी हो चुकी थी और मैं उसे अपना मानने लगा था जब मैंने उसे अपनी बाहों में लिया तो उसने भी मुझे किस कर लिया। यह बात अब आम होने लगी थी हम दोनों के बीच अक्सर एक दूसरे के साथ किस हो जाया करता था। मुझे बहुत ही खुशी थी कि रितिका के साथ में अच्छे से अब समय बिता पा रहा हूं एक दिन रितिका ने मुझे कहा कि क्या हम लोग आज कहीं घूमने के लिए चले। उस दिन हम दोनों साथ में ही थे और दो जवां दिलों का मेल होने लगा था। हम दोनों के दिल धडकने लगे मैंने रितिका को अपनी बाहों में लेते हुए कहा कि मैं तुम्हारे नरम होठों को अपने होठों की शान बनाना चाहता हूं। रितिका ने भी मना नहीं किया और जब रितिका ने मुझे कहा कि क्या तुम मेरे होठों की शान बढ़ाना चाहते हो तो मैंने भी रितिका के होठों को चूम लिया और उसके होठों को चूमकर मैंने अपना बना लिया। उसके नरम और गुलाबी होंठों को चूमना बड़ा ही सुखद एहसास था जब मैंने रितिका की जांघ को सहलाना शुरू किया तो वह भी पूरी तरीके से मचलने लगी थी और मुझे भी बहुत खुशी हो रही थी। रितिका भी मेरी होने वाली थी मैंने रितिका के स्तनों को दबाया और जब मैंने उसके स्तनों को दबाकर अपना बनाया तो रितिका मुझे कहने लगी दिव्यांशु मुझे अजीब सा महसूस हो रहा है।

यह दो बदन के मिलने का अच्छा समय था और हम दोनों ने एक दूसरे के बदन को बड़े ही अच्छे से महसूस किया मैंने रितिका के स्तनों को बहुत देर तक दबाया और उसके होठों को चूमा। वह भी उत्तेजित हो गई थी और मेरे अंदर भी गर्मी पूरी तरीके से उछाल मारने लगी थी मेरी गर्मी बढ़ने लगी। मैंने रितिका से कहा कि क्या हम दोनो आज सेक्स संबंध बना ले। रितिका ने कोई जवाब नहीं दिया मैंने जब उसकी योनि के अंदर अपनी उंगली को घुसाने की कोशिश की तो मेरी उंगली घुस नहीं रही थी लेकिन मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसकी योनि से पानी भी निकल रहा था। मैंने जब रितिका के कपड़े उतार दिए तो उसकी योनि पर मैंने अपने लंड को लगाया और जैसे ही मैंने अपने लंड को उसकी योनि पर लगाया तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा और मैंने भी अपने लंड को रितिका की योनि के अंदर घुसा दिया। जैसे ही मेरा मोटा और लंबा लंड रितिका की योनि में प्रवेश हुआ तो वह चिल्ला उठी और वह मुझे कहने लगी कि मुझे बहुत दर्द हो रहा है। रितिका की योनि से लगातार खून का बहाव बड़ी तेजी से हो रहा था वह अपने मुंह से मादक आवाज मैं सिसकिया ले रही थी उसकी सिसकियो से मै पूरी तरीके से मचलने लगा।

मुझे भी अच्छा लगने लगा था काफी समय तक मैंने रितिका को चोदा मुझे बड़े ही अच्छे तरीके से रितिका ने मजे दिए। उसकी चूत से पानी टपकने लगा तो वह मुझे कहने लगी मुझसे अब बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा जब रितिका ने मुझे यह बात कही तो मैंने रितिका से कहा लगता है मेरा भी काम होने वाला है। यह कहते ही मैंने भी अपने वीर्य को रितिका की योनि में गिरा दिया लेकिन कुछ ही समय बाद वह प्रेगनेंट हो गई और मुझे इस बात की चिंता सताने लगी। रितिका मुझे हर रोज फोन किया करती है और कहती कि मुझे डर लग रहा है। मैंने रितिका से कहा कि तुम डरो मत सब कुछ ठीक हो जाएगा लेकिन यह सब ठीक कहां होने वाला था। एक दिन उसके पापा हमारे घर पर आए और कहने लगे कि तुमने रितिका के साथ बहुत गलत किया मेरे पापा ने रितिका के पापा को समझाते हुए कहा कि अब बच्चों से गलती हो चुकी है तो अब जाने भी दीजिए हम लोग रितिका को अपने घर की बहू स्वीकार करने को तैयार हैं। इस बात पर रितिका के पिता जी की सहमति बन गई और रितिका हमारे घर की बहू बन गई।

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