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कविता की चुदाई का किस्सा

Antarvasna, hindi sex stories: मैं इस बात के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं था भैया शोभिता से शादी करे। शोभिता मेरे साथ पढ़ती थी और मुझे नहीं लगता था कि शोभिता से भैया शादी करे मैंने काफी कोशिश की लेकिन अब शोभित और भैया की सगाई हो चुकी थी। जब भैया की सगाई हो गई तो उसके कुछ महीने बाद भैया की शादी भी हो गई। जब उनकी शादी हुई तो कुछ समय तक तो सब कुछ ठीक चलता रहा लेकिन फिर घर में कुछ भी ठीक नहीं था। शोभिता के घर में आने से सब कुछ बदलता जा रहा था और अब घर में झगड़े भी होने लगे थे। एक दिन मेरे और भैया के बीच में काफी झगडे हुए जिससे कि मैंने घर छोड़ दिया।

मैं अब अलग रहने लगा था हालांकि पापा और मम्मी ने मुझे समझाने की कोशिश की लेकिन मुझे बिल्कुल भी ठीक नहीं लगा और मैं अलग रहने लगा था। मेरे पास कोई भी काम नहीं था मैं काफी ज्यादा परेशान था क्योंकि ना तो मेरे पास कोई नौकरी थी और ना ही मेरे पास कोई बिजनेस था लेकिन पापा ने मेरी काफी मदद की। पापा ने मुझे कुछ पैसे दिए जिस से कि मैं अपना छोटा सा कारोबार शुरू कर सका। मैंने अब अपना काम शुरू कर दिया था और मैं काफी खुश था जिस तरीके से मैंने अपना काम शुरू किया। पापा और मम्मी भी मेरे साथ रहने लगे थे। भैया अलग रहते थे और भैया का मुझसे मिलना भी नहीं होता था, ना तो भैया मुझसे मिलने आते और ना ही वह पापा मम्मी से मिलने आते। एक दिन मैं अपने डिपार्टमेंट स्टोर में बैठा हुआ था। मैंने कुछ समय पहले ही अपना डिपार्टमेंट स्टोर खोला था।

मैं उस दिन स्टोर मे ही था मैंने देखा कविता डिपार्टमेंटल स्टोर में आई हुई थी। उसने मुझे देखा तो मुझे देखते ही कहा तुम यहां क्या कर रहे हो? मैंने कविता से कहा यह मेरा ही स्टोर है। कविता ने मुझसे कहा लेकिन तुमने यह स्टोर कब खोला। मैंने कविता को कहा यह सब तो ठीक है लेकिन चलो हम लोग कहीं बैठते हैं। मैंने कविता को अपने साथ कॉफी पर चलने के लिए कहा। हम दोनों उस दिन एक साथ बैठे हुए कॉफी पी रहे थे और एक दूसरे से बातें कर रहे थे। मैं काफी समय के बाद कविता से मिल रहा था और कविता से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा था। कविता भी खुश थी मैंने जब कविता से उसके बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया वह कुछ समय पहले ही मुंबई से वापस लौटी है। मैंने कविता से कहा तुम तो मुंबई में ही नौकरी कर रही थी? कविता मुझे कहने लगी हां मैं मुंबई में ही नौकरी कर रही थी कुछ सालों तक मैंने मुंबई में नौकरी की लेकिन अब लगने लगा है कि मैं चंडीगढ़ में रहकर ही काम करूं।

मैंने कविता से उस दिन काफी देर तक बात की। कविता और मेरा परिचय कुछ सालों पहले एक पार्टी में हुआ था उसके बाद हम दोनों एक दूसरे से बातें करने लगे थे। मैं कविता से अक्सर बातें किया करता हूं। मेरी और कविता की फोन पर बातें हो जाया करती थी। उस दिन हम दोनों ने एक दूसरे से काफी देर तक बातें की और मुझे बहुत अच्छा लगा। कविता ने मुझे कहा अब मैं चलती हूं क्योंकि मुझे घर जाने के लिए देर हो रही है। मैंने कविता से कहा ठीक है और कविता वहां से चली गई थी। कविता से मैं करीब 6 महीनों के बाद मिल रहा था और मुझे उससे मिलकर बहुत ही अच्छा लगा था। जब भी हम दोनों एक दूसरे के साथ होते तो हमें बहुत अच्छा लगता। अब कविता चंडीगढ़ में ही नौकरी करने लगी थी इसलिए उस से मेरी मुलाकात हो ही जाया करती थी और मुझे भी काफी अच्छा लगता। जिस तरीके से कविता मुझे समझती है उससे मैं काफी खुश हूं और कहीं ना कहीं कविता भी बहुत ज्यादा खुश है। हम दोनों एक दूसरे को बड़े ही अच्छे तरीके से समझते हैं और एक दूसरे के साथ हम लोग अच्छा समय बिताया करते हैं। एक दिन मैं और कविता एक दूसरे के साथ बैठे हुए बातें कर रहे थे।

मैंने कविता से कहा कविता कभी तुम मेरे घर पर आओ। कविता ने कहा हां क्यों नहीं मैं जरूर तुम्हारे घर पर आऊंगी। कुछ ही दिनों बाद कविता मेरे घर पर आई तो मुझे अच्छा लगा और मैंने कविता को पापा मम्मी से मिलवाया। मुझे नहीं मालूम था कि कविता को पापा मम्मी इतना पसंद करेंगे वह लोग चाहते हैं कि मैं कविता से शादी की बात करूं। मैंने कभी भी कविता के बारे में ऐसा कुछ सोचा नहीं था लेकिन उस दिन मुझे भी लगा कविता मेरे लिए बिल्कुल ठीक है। मेरे दिल में कविता के लिए प्यार उमड़ने लगा था। अब मैं कविता को प्यार करने लगा था और मुझे लगने लगा था मैं कविता से अपने दिल की बात कह डालूं। मैंने कविता को अपने दिल की बात कहने का फैसला कर लिया था। मैंने जब कविता को अपने दिल की बात कही तो कहीं ना कहीं कविता भी इस बात के लिए तैयार थी वह मेरे साथ रिलेशन में थी। अब मेरे लिए यह बहुत ही अच्छा है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ रिलेशन में है। जिस तरीके से हम दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं यह हम दोनों के लिए बहुत ही अच्छा है। कविता और मैं एक दूसरे के साथ जब भी होते हैं तो हमें बहुत ही अच्छा लगता है। एक दिन कविता और मैं साथ में बैठे हुए बातें कर रहे थे उस दिन कविता ने मुझे कहा मुझे आज तुम्हारे घर पर चलना है।

मैंने कविता से कहा ठीक है। वह उस दिन मेरे घर पर आई तो मुझे नहीं मालूम था मम्मी कविता से मेरी शादी की बात करेगी। वह मुझसे शादी करने के लिए तैयार थी। कविता ने अपनी फैमिली से जब इस बारे में बात की तो उसके परिवार वाले चाहते थे मैं उन लोगों से मिलूं। जब मैं कविता के परिवार से मिला तो मुझे काफी अच्छा लगा और वह लोग भी बहुत ज्यादा खुश थे। हम दोनों का रिलेशन भी अच्छे से चल रहा था क्योंकि हम दोनों के रिलेशन को अब हमारे परिवार वालों की स्वीकृति मिल चुकी थी। यह काफी अच्छा था जिस तरीके से हम दोनों का रिलेशन चल रहा है। कविता और मेरा मिलना तो अक्सर होता ही रहता था लेकिन जब पहली बार हम दोनों के बीच किस हुआ तो यह हम लोगों के लिए बड़ा ही अच्छा था। मैं कविता के होठों को चूमकर उसकी गर्मी को दोगुना बढाने लगा था। अब वह भी इतनी ज्यादा तड़प उठी थी उसने अपने कपड़ों को खोलकर मेरे सामने अपनी चूत में उंगली को लगाना शुरू किया। कविता और मैं एक दूसरे की गर्मी को बहुत ज्यादा बढ़ा चुके थे।

मैंने भी अपने लंड को कविता के सामने किया तो कविता ने उसे तुरंत ही अपने मुंह में ले लिया। वह जिस तरीके से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर सकिंग कर रही थी उससे मुझे काफी अच्छा लग रहा था और कविता को भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था। हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी और कहीं ना कहीं हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार थे। मैंने जैसे ही कविता की चिकनी चूत पर अपनी जीभ को लगाकर अंदर की तरफ डाला तो उसकी चूत से पानी निकलने लगा था। कविता तड़पने लगी वह चाहती थी मैं उसकी चूत मे लंड घुसा दूं। मैंने कविता की गिली चूत पर अपने लंड को डाला तो मेरा मोटा लंड कविता की चूत में प्रवेश हो गया था वह बहुत जोर से चिल्लाकर मुझे बोली मुझे मजा आ रहा है। कविता को बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा था और मुझे भी काफी अच्छा लग रहा था जिस तरीके से वह मेरा साथ दे रही थी। अब हम दोनों की गर्मी बढ़ती ही जा रही थी। मेरा लंड कविता की चूत के अंदर घुस चुका था और उसकी चूत से बहुत ही अधिक मात्रा में पानी निकल रहा था। कविता की चूत से निकलता हुआ पानी मेरी गर्मी को और भी बढाता जा रहा था।

मेरे लिए यह बहुत ही अच्छा था जिस तरीके से कविता और मैं एक दूसरे की गर्मी का बढा रहे थे। अब हम दोनों बिल्कुल भी रह नहीं पा रहे थे। मैंने कविता की चूत के अंदर बाहर अपने लंड को करना शुरू किया तो कविता की सिसकारियां निकलती जा रही थी। मैं बहुत ज्यादा गरम हो रहा था लेकिन अब मैं बिल्कुल भी रह ना सका। मैंने अपने वीर्य की पिचकारी को कविता की चूत मे मारा और मेरी गर्मी भी शांत हो चुकी थी वह खुश हो गई थी। वह बोली मुझे आज मजा आ गया है जिस तरीके से मैंने आज तुम्हारे साथ सेक्स की मजे लिए हैं। मैंने कविता से कहा मैं भी बहुत ज्यादा खुश हूं जिस तरीके से हम लोगों ने आज सेक्स किया है। उसके बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स करने लगे थे और एक दूसरे की गर्मी को शांत कर दिया करते।

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