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लंड चूत की जंग जमकर हुई

Antarvasna, sex stories in hindi: मैं कॉलेज के आखिरी वर्ष में था और अब हमारे एग्जाम नजदीक आने वाले थे तो मैं भी अपने एग्जाम की तैयारी में लगा हुआ था। जैसे ही हम लोगों के एग्जाम खत्म हो गए तो उसके बाद हमारे कॉलेज में केंपस प्लेसमेंट आया जिसमें की मेरा भी सिलेक्शन एक अच्छी कंपनी में हो गया और मैं जॉब करने के लिए बेंगलुरु चला गया। मैं अपने परिवार से दूर बेंगलुरु में रह रहा था शुरुआत में मेरे लिए अकेले रहना काफी मुश्किल भरा था क्योंकि मुझे अकेले रहने की कभी आदत नहीं थी लेकिन धीरे धीरे मुझे आदत पड़ने लगी और मैं अब बेंगलुरु में अपने आपको एडजस्ट कर चुका था। मेरी जॉब भी अच्छे से चल रही थी और मैं अपनी जॉब से बहुत ज्यादा खुश था। बेंगलुरु में मुझे अब 5 वर्ष हो चुके हैं इन 5 वर्षों में मेरा प्रमोशन भी हुआ और मेरी फैमिली भी अब मेरे साथ ही रहने लगी।

पापा के रिटायरमेंट के बाद वह लोग मेरे पास ही रहने के लिए बेंगलुरु आ गए, पापा बैंक में जॉब करते थे और अब वह रिटायर हो चुके हैं। मुझे इस बात की खुशी है कि मेरी फैमिली मेरे साथ ही रह रही है मेरी बहन की शादी भी कुछ समय पहले ही हुई थी मेरी बहन की शादी भी बेंगलुरु में ही हुई। हम लोग जिस किराए के फ्लैट में रहते थे वहां पर मुझे काफी समय हो चुका था अब हम लोग चाहते थे कि हम लोग अपना कोई घर खरीद ले। मैंने जब इस बारे में पापा से बात की तो पापा ने कहा कि हां मोहित बेटा अगर तुम्हें लगता है कि हमें घर खरीदना चाहिए तो हम लोग कोई घर देखकर यहां घर खरीद लेते हैं। मैंने भी एक प्रॉपर्टी ब्रोकर से बात की और उसके बाद उसने मुझे एक फ्लैट दिखाया लेकिन वह मुझे पसंद नहीं आया और मैंने उसे कहा कि मुझे कोई और फ्लैट दिखाओ। वह अब मुझे जिस नई कॉलोनी में ले गया वहां पर मुझे काफी अच्छा लगा मैंने उससे कहा कि हम लोग यहीं फ्लैट लेंगे और हम लोगों ने वहां पर एक फ्लैट ले लिया।

अब हम लोग वहां रहने लगे थे आस पास के लोगों से भी हमारा परिचय धीरे-धीरे होने लगा था। हम लोगों को वहां पर रहते हुए 6 महीने से ऊपर हो चुका था और मैं काफी ज्यादा खुश था कि अब हम लोग नई कॉलोनी में रहने के लिए आ गए हैं। हमारे घर से मेरे ऑफिस की दूरी भी ज्यादा नहीं थी इसलिए मैं जल्दी ही अपने ऑफिस पहुंच जाया करता। एक दिन सुबह मैं अपनी कार से ऑफिस के लिए निकला ही था कि कॉलोनी के बाहर गेट पर एक महिला ने मुझसे लिफ्ट मांगी उनकी उम्र यही कोई 60 वर्ष के आसपास रही होगी मैंने भी उन्हें लिफ्ट दे दी। जब वह मेरी कार में बैठे तो उन्होंने मुझसे पूछा कि बेटा तुम कहां रहते हो? मैंने उन्हें बताया कि मैं अंदर कॉलोनी में ही रहता हूं। उन्होंने भी मुझे कहा कि हम लोग भी यहीं रहते हैं। उनको मैंने थोड़ी ही दूरी पर ड्रॉप कर दिया था और उसके बाद मैं अपने ऑफिस चला गया। जब मैं अपने ऑफिस पहुंचा तो उस दिन मेरे ऑफिस में मेरे एक दोस्त का जन्मदिन था उसने मुझे कहा कि आज तुम्हें मेरे जन्मदिन में आना है तो मैंने उसे कहा हां क्यों नहीं।

उसने शाम के वक्त अपने घर पर एक छोटी सी पार्टी रखी थी और उसमे उसने मुझे भी इनवाइट किया था तो मैं भी उसके जन्मदिन पर जाना चाहता था। ऑफिस से फ्री होने के बाद मैं अपने घर पर गया घर से मैं जल्दी से तैयार होकर अपने दोस्त के घर पर चला गया था। उसका जन्मदिन हम लोगों ने काफी अच्छे से सेलिब्रेट किया और सब लोगो ने खूब इंजॉय किया। कुछ दिनों बाद मुझे वही आंटी मिली जिन्हें मैंने एक दिन लिफ्ट दी थी और उनके साथ एक लड़की भी थी शायद वह उनकी बेटी थी। उन्होंने मुझे देखते ही पहचान लिया और मुझे कहा कि बेटा उस दिन मैं तुम्हे थैंक्यू कहना ही भूल गई मैंने उन्हें कहा कोई बात नहीं आंटी। उन्होंने मुझे अपनी बेटी से मिलवाया उनकी बेटी का नाम कविता है कविता से मिलकर मुझे अच्छा लगा और उसके बाद हम लोगों का परिचय काफी अच्छा हो चुका था। जब भी मुझे आंटी मिलती तो मैं उनसे जरूर बात किया करता और कविता भी मुझे अक्सर मिल ही जाया करती थी। कविता भी एक अच्छी मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती है और जब भी वह मुझे मिलती तो मुझे काफी अच्छा लगता। एक दिन मैंने कविता का नंबर उससे लिया तो उसने मुझे अपना नंबर दे दिया।

जब कविता ने मुझे अपना नंबर दिया तो मुझे उससे बात करना अच्छा लगने लगा और हम दोनों की एक दूसरे से फोन पर बातें होने लगी। एक दिन जब मुझे पता चला कि कविता का बॉयफ्रेंड है तो मैं उस वक्त बहुत ज्यादा उदास हुआ। मैंने उसके बाद कविता से बात नहीं की लेकिन कविता मुझे बार-बार फोन कर रही थी मैंने उसका फोन नहीं उठाया। कविता को मैंने कभी अपने प्यार का इजहार नही किया था। कविता की तरफ से प्यार को लेकर कोई पहले नही हुई थी लेकिन फिर भी मुझे यह बात सुनकर काफी बुरा लगा और मैं काफी ज्यादा गुस्से में था। एक दिन मुझे कविता मिली जब मुझे कविता मिली तो कविता ने मुझे कहा कि तुम मेरा फोन क्यों नहीं उठा रहे थे। मैंने कविता को कहा कि कविता तुमने मुझसे यह बात छुपाई कि तुम सिंगल हो लेकिन तुम्हारा रिलेशन तुम्हारे ऑफिस में काम करने वाले एक लड़के के साथ चल रहा है और मैंने तुम्हें उसके साथ देखा था।

यह बात सुनकर कविता मुझे कहने लगी कि मोहित मुझे मालूम है तुम ने मुझे उस लड़के के साथ देखा था लेकिन मेरा रिलेशन अब उसके साथ नही है और अब मैं सिंगल हूं हम दोनों के बीच अब कुछ भी नहीं चल रहा है इसलिए हम दोनों ने एक दूसरे से ब्रेकअप कर लिया। मैं यह बात सुनकर काफी खुश था और मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगा कि कविता सिंगल है उसके बाद मैं दोबारा से कविता से बातें करने लगा था और हम लोगों की बातें पहले की तरह ही होने लगी थी। कविता और मैं एक दूसरे से काफी बातें किया करते और हम दोनों को फोन पर बातें करना अच्छा लगता। हम दोनों एक दूसरे के साथ जब भी होते तो हम दोनों साथ में काफी अच्छा समय बिताया करते लेकिन हम दोनों की तरफ से अभी प्यार को लेकर कोई पहल नहीं हुई थी परंतु एक रात मैंने कविता से फोन पर गर्म बातें करना शुरू किया तो कविता को भी से कोई एतराज नहीं था। वह मुझसे बातें कर के बहुत ज्यादा खुश थी और मुझे भी काफी ज्यादा अच्छा लग रहा था। जब मैं कविता से बात कर रहा था मेरे अंदर की गर्मी को कविता ने इतना बढ़ा दिया था कि मेरी गर्मी मेरे वीर्य के रास्ते बाहर आ गई और मेरी गर्मी शांत हो गई। मै कविता के बदन को महसूस करना चाहता था और उसे अपना बनाना चाहता था।

मैं उसे अपनी बाहों में समाने के लिए बहुत बेताब था और मैंने ऐसा ही किया। जब मुझे मौका मिला तो मैंने कविता को अपने घर पर बुला लिया। वह मुझे मिलने घर पर आई। कविता मेरे साथ सेक्स करने के लिए उतावली थी। मैंने कविता को कहा हम लोगों को सेक्स करना चाहिए तो कविता भी इस बात के लिए तुरंत तैयार हो गई। जब वह मेरी गोद में आकर बैठी तो मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू किया। मैं कविता के स्तनों को दबा रहा था तो मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लग रहा था। मैंने कविता के होठों को चूमना शुरु किया। मैंने कविता के होठों को तब तक चूमा जब तक मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ नहीं गई और मेरे अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि अब मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने अपने लंड को बाहर निकाला तो कविता ने उसे अपने मुंह में लेते हुए अच्छे से चूसना शुरू कर दिया। जब वह ऐसा कर रही थी तो मुझे भी काफी ज्यादा अच्छा लगने लगा था और कविता को भी बहुत मजा आ रहा था। हम दोनों के अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी और मेरे अंदर की गर्मी भी काफी ज्यादा बढ़ने लगी थी। मैं और कविता एक दूसरे के साथ सोने के लिए तैयार थे। मैंने कविता के कपड़ों को उतारे। मैंने कविता के कपडे उतारकर उसके स्तनों को अपने हाथ में लिया और उसे मजा आने लगा। वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत अच्छा लग रहा है मुझे भी बहुत ज्यादा मजा आ रहा था और कविता को भी बहुत अच्छा लग रहा था।

वह मुझे अपनी और आकर्षित कर रही थी और मेरे अंदर की गर्मी को बढ़ने लगी थी। मैंने कविता को कहा मेरे अंदर की गर्मी बहुत ही ज्यादा बढ़ने लगी है। कविता मुझे कहने लगी तुम मेरी चूत के अंदर अपने मोटे लंड को घुसा दो। मैंने कविता की काली पैंटी को नीचे उतारकर उसकी योनि को चाटना शुरू किया। जब मैंने उसकी योनि को चाटना शुरू किया तो उसकी चूत से निकलता हुआ पानी काफी ज्यादा बढ़ने लगा था। कविता की चूत से निकलता हुआ पानी इतना बढ़ने लगा कि वह अपने अंदर की गर्मी को बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। मेरा लंड कविता की चूत में जाने के लिए तैयार था। मैंने जब अपने लंड को उसकी चूत पर लगाया तो उसकी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर निकल रहा था और मेरे लंड से भी बहुत पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था। मेरा लंड धीरे-धीरे कविता की चूत के अंदर चला गया।

जब मेरा लंड कविता की योनि के अंदर घुस चुका था तो वह बहुत ज्यादा जोर से चिल्लाकर मुझे बोली मेरी चूत में दर्द होने लगा है। मैंने कविता को कहा लेकिन मुझे तो बहुत ज्यादा मजा आ रहा है। कविता भी इस बात से बहुत ज्यादा खुश थी। अब वह मेरे साथ अच्छे से दे रही थी। मैंने उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया था जिससे कि मेरा लंड कविता की चूत की दीवार से टकरा रहा था और उसकी चूत की गर्मी मुझे अपनी ओर खींच रही थी। कविता की मादक आवाज से मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आता। जब वह मुझे कहती मुझे और भी तेजी से धक्के मारते रहो तो अब मैं उसे बहुत ज्यादा तेजी से धक्के मार रहा था। मैंने उसकी चूत के अंदर अपने माल को गिरा कर अपनी इच्छा को पूरा कर दिया था। कविता भी बहुत ज्यादा खुश थी और उसकी चूत से खून निकल रहा था।

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