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लंड घुसते ही उसकी चीख निकल पड़ी

Antarvasna, hindi sex story: मैं अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में दिल्ली गया हुआ था। कुछ दिन मुझे दिल्ली में ही रुकना था इसलिए मैंने सोचा अपने पुराने दोस्तों से मुलाकात कर लेता हूं। मैंने दिल्ली में अपने पुराने दोस्तों को फोन किया लेकिन मेरी बात सिर्फ सोहन से ही हो पाई। सोहन ने मुझे कहा तुम दिल्ली में आए हो तो तुम मेरे घर पर आ जाओ। सोहन ने अब नया घर खरीद लिया था इसलिए उसने मुझे अपने घर का पता भेजा। मैं जब सोहन के घर पर गया तो सोहन ने मुझे अपने परिवार से मिलवाया। सोहन मेरे साथ कॉलेज में पढ़ा करता था आज हम लोगों की पढ़ाई को काफी वर्ष हो चुके हैं और मैं अब मुंबई में ही सेटल हो चुका हूं। उस दिन सोहन से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा। सोहन भी एक अच्छी कंपनी में जॉब पर है और मुझे उससे मिलकर काफी खुशी हुई। सोहन के घर पर मैंने डिनर किया और फिर मैं वापस होटल में लौट आया था। जब मैं वापस होटल लौटा तो उस वक्त रात के 10:00 बज रहे थे क्योंकि मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैंने सोचा क्यों ना अपनी पत्नी कविता से फोन पर बात कर लेता हूं। मैंने कविता को फोन किया कविता से मेरी बात थोड़ी देर ही हुई फिर मैं सो गया।

अगले दिन मुझे अपनी मीटिंग के सिलसिले में जाना था और मैं अपनी मीटिंग के लिए चला गया। मैं वहां पर करीब 4 दिन और रुका इस बीच मेरी सोहन से भी मुलाकात हुई। मैं वापस मुंबई लौट आया था मैं मुंबई वापस लौटा तो मैंने कुछ दिनों के लिए अपने ऑफिस से छुट्टी ले ली थी। मैं चाहता था कविता के साथ कुछ समय बिताऊं इसलिए मैंने कविता के साथ अच्छा समय बिताया। कविता भी काफी खुश थी काफी लंबे समय के बाद हम दोनों एक दूसरे के साथ इतना टाइम बिता पा रहे थे क्योंकि कविता भी घर के कामों में बिजी रहती है इसलिए मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता है। हम दोनों की शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं इन 5 वर्षों में हम दोनों की जिंदगी में काफी कुछ बदलाव आया है। मैं काफी खुश हूं जिस तरीके से मेरे और कविता की शादीशुदा जिंदगी चल रही है। उस दिन मैंने और कविता ने साथ में काफी अच्छा समय बिताया। अब मैं अपने ऑफिस जाने लगा था इसलिए मैं कविता को कम ही समय दे पाता था क्योंकि मैं अपने ऑफिस के काम के चलते काफी ज्यादा बिजी रहता हूं। कविता कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली गई थी उसी बीच मां की तबीयत भी खराब हो गई।

मां की तबीयत काफी खराब थी इसलिए कविता अपने मायके से वापस लौट आई और जब कविता वापस लौटी तो वह मां की देखभाल करने लगी। थोड़े समय बाद मां की तबीयत में सुधार होने लगा था। एक दिन मैं अपने ऑफिस के लिए घर से निकला था उस दिन रास्ते में मेरी कार खराब हो गई इसलिए मुझे ऑफिस पहुंचने में देर हो गई थी। जब मैं ऑफिस पहुंचा तो उस दिन मुझे सोहन का फोन आया और सोहन ने मुझे बताया वह मुंबई आया हुआ है। मैंने सोहन को कहा लेकिन तुमने मुझे इस बारे में पहले क्यों नहीं बताया। सोहन ने मुझे कहा मुझे बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाया था इसलिए मैं तुम्हें इस बारे में बता ना सका। जब सोहन ने मुझे फोन किया तो मैंने उसे कहा मैं तुम्हें अपने घर का एड्रेस भेज रहा हूं तुम शाम के वक्त घर पर आ जाना। सोहन मुझे कहने लगा ठीक है मैं शाम को घर पर आ जाऊंगा और मैंने सोहन को घर का एड्रेस भेज दिया था। मैं भी शाम के करीब 7:30 बजे घर लौटा।

जब मैं घर पहुंचा तो उस वक्त कविता खाना बना रही थी। कविता को मैंने फोन पर यह बता दिया था कि सोहन घर पर आ रहा है। कविता सोहन से कभी मिली नहीं थी लेकिन उस दिन जब सोहन घर पर आया तो कविता पहली बार सोहन से मिली। सोहन उस दिन हमारे घर पर ही रहा सोहन कुछ दिनों के लिए मुंबई में था। जब मैं सोहन के साथ था तो वह काफी खुश था हम दोनों अपने कॉलेज के पुराने दिनों की यादें ताजा कर रहे थे उस वक्त मेरा परिवार दिल्ली में ही रहा करता था लेकिन जब पापा का ट्रांसफर मुंबई हुआ तो हम लोगों ने मुंबई में ही शिफ्ट होने का फैसला कर लिया था। पापा ने मुंबई में ही घर खरीद लिया था आज मुंबई में मुझे काफी वर्ष हो चुके हैं लेकिन अभी भी मैं अपने दोस्तों को काफी मिस करता हूं। उस दिन सोहन के साथ समय बिता कर अच्छा लगा। अब सोहन भी वापस दिल्ली चला गया था। सोहन से मेरी फोन पर बातें होती रहती है और मुझे काफी अच्छा लगता है जब सोहन से मेरी फोन पर बातें होती हैं। उस दिन भी सोहन और मेरी फोन पर बातें हो रही थी और हम दोनों की बातें काफी देर तक हुई।

मैं कविता के साथ खुश हूं और जिस तरीके से हम दोनों की जिंदगी चल रही है उससे मुझे काफी अच्छा लगता है और मैं काफी खुश हूं कि कविता घर की जिम्मेदारियों को बखूबी निभा पा रही है। कविता पापा और मम्मी की देखभाल अच्छे से करती है। मैं जब भी अपने काम के सिलसिले में बाहर होता हूं तो वही घर की सारी जिम्मेदारी को बखूबी निभाती है। कविता और मेरी मुलाकात मुंबई में ही हुई थी जब हम दोनों पहली बार एक दूसरे को एक पार्टी में मिले थे तो वहां पर हम दोनों एक दूसरे को अपना दिल दे बैठे थे। कविता से अपने दिल की बात कहना इतना आसान नहीं था परंतु जब मैंने कविता को प्रपोज किया तो मुझे काफी अच्छा लगा और मैं काफी खुश था जिस तरीके से मेरे और कविता के रिश्ता चलने लगा था। अब हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था क्योंकि हमारे परिवार को हम दोनों के रिलेशन से कोई भी ऐतराज नहीं था इसलिए हम दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया था।

जब हम दोनों की शादी हुई तो उसके बाद हम दोनों की शादीशुदा जिंदगी अच्छे से चल रही है। मैं कविता को बहुत ही अच्छे से समझता हूं और कहीं ना कहीं कविता को भी इस बात की खुशी है कि हम दोनों एक दूसरे के साथ बहुत खुश हैं। जिस तरीके से मैं और कविता एक दूसरे के साथ होते हैं और हम दोनों एक दूसरे के साथ समय बिताते हैं उससे मुझे काफी अच्छा लगता है। मैं कोशिश करता हूं मैं अपने परिवार को हमेशा ही समय दूं और जितना मुझसे हो सकता है उतना समय मैं अक्सर अपनी फैमिली के साथ बिताया करता हूं। रविवार के दिन हम लोग हमेशा ही कहीं ना कहीं घूमने के लिए जाते हैं और मुझे बहुत अच्छा लगता है जब मैं और कविता साथ में कहीं साथ में घूमने के लिए जाते हैं। हम दोनों एक दिन घूमने के लिए गए हुए थे जब हम लोग घर लौटे तो काफी रात हो चुकी थी। डिनर करने के बाद हम दोनों थोड़ी देर साथ में बैठे हुए थे पापा मम्मी सो चुके थे और हम दोनों बातें कर रहे थे। कविता मुझसे बोली चलो बेडरूम मे चलते है और हम दोनो बेडरूम मे चले गए। जब हम लोग बेडरूम मे गए तो वह बोली मै कपडे बदल लेती हूं और वह कपडे बदलने लगी। मैंने उसके बदन को नंगा देखा तो मैं रह नहीं पा रहा था।

मैं कविता के पास गया और उसके बदन को महसूस करना शुरू किया। जब मैंने उसके बदन को महसूस करना शुरु किया तो वह तडप उठी। अब वह मेरी बांहो मे आ चुकी थी। मैंने कविता से कहा मैं चाहता हूं मै तुम्हारी चूत मे लंड को डालूं। यह सुनते ही कविता ने मेरे पजामे को खोलते हुए मेरे लंड को मुंह के अंदर तक समा लिया था। वह मेरे लंड को मुंह के अंदर बाहर कर रही थी। उसने मेरे लंड से पानी निकाल दिया था। उसने 2 मीनट तक मेरे लोड को चूसा। जब उसने मेरे लंड को चूसा तो मुझे मजा आने लगा। अब हम दोनो गरम हो चुके थे। जब उसकी चूत के अंदर मेरा लंड घुसा तो उसको मजा आ रहा था। वह बहुत ज्यादा खुश थी मेरा लंड उसकी चूत के अंदर बाहर हो रहा था। मैंने उसके पैरो को उठाकर उसकी चूत के अंदर अपने लंड को तेजी से करना शुरु किया। वह मेरा साथ अच्छे से दे रही थी और मैं उसकी चूत के मजे अच्छे से ले रहा था। मुझे कविता को चोदते हुए 10 मिनट हो चुके थे जैसे ही मेरा माल उसकी चूत के अंदर गिरा तो उसको मजा आ गया था। हम दोनो की इच्छा अभी पूरी नहीं हुई थी। मैंने कविता की चूतडो को अपनी ओर किया और उसकी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दिया था। उसकी चूत पर मैंने लंड को लगाया और अंदर की तरफ को डालना शुरु किया।

जब मेरा लंड कविता की चूत मे गया तो वह बहुत जोर से चिल्लाई और मुझे मजा आ रहा था जब मै उसे चोद रहा था। हम दोनो की गर्मी बढ चुकी थी। मैंने उसकी चूत पर तेजी से प्रहार करना शुरु किया। हम दोनो को मजा आ रहा था वह अपनी चूतडो को मुझसे मिला रही थी। मेरा लंड छिल चुका था और जैसे ही मैंने अपने माल को उसकी चूतडो पर गिराया तो उसे बहुत अच्छा लगा और मैं भी बहुत खुश था। हम दोनो अब एक दूसरे से बाते कर रहे थे। मैंने कविता को अपनी बांहो मे भर लिया था और उसकी चूत की गर्मी को शांत कर दिया था।

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