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लंड की नमकीन मस्ती

Antarvasna, hindi sex story: जब पिताजी ने मुझे मोटरसाइकिल दी उस वक्त मैं कॉलेज में ही था मेरे दोस्तों के पास पहले से ही मोटरसाइकिल थी और सब लोग बड़ी ही मस्तियां किया करते थे अब मेरे पास भी मोटरसाइकिल आ चुकी थी। पिताजी ने अपनी तनख्वाह से मेरे लिए मोटरसाइकिल ले ली अब मैं भी कॉलेज में काले रंग का चश्मा लगाकर जाया करता था और सब लड़कियां मुझे देखा करती थी लेकिन मुझे क्या पता था मोटरसाइकिल ही मेरे लिए घातक होने वाली है। मैं एक दिन बड़ी तेजी से अपने काले रंग का चश्मा लगाया हुए चल रहा था और आगे एक बहुत ही बड़ा गड्ढा था लेकिन वह गड्ढा मुझे दिखाई नहीं दिया और मैं उस गड्ढे में जा गिरा। मेरी बाइक तो पूरी तरीके से टूट चुकी थी और मैं भी बहुत घायल हो गया था मेरे हाथ पैरों में चोट आ चुकी थी।

मुझे इस बात का डर था कि पापा क्या कहेंगे लेकिन उन्हें तो यह बात पता चलनी हीं थी और उन्हें जब यह बात पता चली तो उन्होंने मुझे कहा बेटा तुम्हें मोटरसाइकिल मैंने इसलिए तो नहीं दी थी कि तुम अपना एक्सीडेंट करवाते फिरो तुम्हें मालूम है जब हमें यह बात पता चली तो हमें कितना दुख हुआ। मुझे भी इस बात का दुख था लेकिन यह मेरी गलती से नहीं हुआ था कुछ दिनों के लिए डॉक्टर ने मुझे घर पर ही आराम करने के लिए कह दिया था। मैं घर पर ही था लेकिन मुझे कुछ समझ नहीं आता कि मैं घर पर रहकर क्या करूं मैं घर में बोर हो जाया करता था। मैं अब धीरे-धीरे ठीक होने लगा था और करीब दो महीने तक मुझे घर पर ही रहना पड़ा दो महीने बाद मैं कॉलेज गया तो कॉलेज में सब कुछ बदल चुका था। मेरे दोस्त मुझसे पूछने लगे तुम ठीक तो हो ना मैंने उन्हें कहा हां दोस्तों मैं ठीक हूं लेकिन मुझे चोट काफी आई थी। मेरा दोस्त प्रशांत मुझसे मिलने के लिए भी आया था वह जब मुझसे मिलने के लिए आया तो उस वक्त मैं काफी ज्यादा चोटिला था और मुझे बहुत ज्यादा दर्द भी हो रहा था लेकिन उसके बावजूद भी मैं उससे बात करता रहा। अब मैं ठीक हो चुका था इसलिए मैं अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहता था दो महीने की मेरी क्लास भी छूट चुकी थी और कुछ समय बाद मेरे पेपर भी होने वाले थे। अब हम लोगों ने अपने पेपर की तैयारियां शुरू करनी कर दी थी लेकिन उसके लिए मेरे पास पढ़ने के लिए भी किताबें नहीं थी फिर मैंने अपने दोस्तों से ही मदद ली और  उन्होंने मेरी मदद कर दी।

अब हम लोगों के एग्जाम हो चुके थे अब कुछ ही समय बाद रिजल्ट आने वाला था और जब रिजल्ट आया तो मैंने देखा मेरे काफी कम नंबर आए थे लेकिन मैं पास हो चुका था। मैं अब अपने कॉलेज के तृतीय वर्ष में पहुंच चुका था यह हमारा आखरी वर्ष था मैं बीएससी की पढ़ाई कर रहा हूं इसलिए हमारे कॉलेज में एडमिशन शुरू होने लगे थे। हमारे कॉलेज में नए एडमिशन शुरू हुए तो उसी के साथ अब नए बच्चे भी आने लगे जब मैंने ममता को देखा तो ममता को देख कर मुझे बहुत ही अच्छा लगा लेकिन मेरी गर्लफ्रेंड को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं थी और वह चाहती थी कि मैं ममता की तरफ देखूं हीं नही लेकिन ना चाहते हुए भी मैं ममता की तरफ खिंचा चला जाता। ममता के अंदर ऐसी कुछ तो बात थी जिससे मैं उसकी तरफ खिंचा चला जाता था मुझे ममता अच्छी लगने लगी थी लेकिन ममता से मेरी बात हो नहीं पाती थी। एक दिन मैंने ममता से बात की ममता कॉलेज की कैंटीन में ही बैठी हुई थी मेरी पहली बार ही ममता से बात हुई जब मेरी बात ममता से हुई तो ममता मुझे अपने बारे में बताने लगी तभी हम दोनों को मेरी गर्लफ्रेंड ने साथ में पकड़ लिया वह कहने लगी अच्छा तो तुम यहां गुल खिला रहे हो। मैंने उसे कहा इसमें गुल खिलाने की क्या बात है लेकिन उसने तो पूरी कैंटीन को अपने सर पर उठा लिया था और वहां पर बैठे सब लोग मेरी तरफ देखने लगे सबकी नजरे मुझे ही घूर रही थी लेकिन मेरे पास भी अब कोई जवाब नहीं था मैंने भी अपनी गर्दन झुकाई और वहां से चला गया। मुझे ऐसा लगने लगा था कि जैसे मेरा रिलेशन मेरी गर्लफ्रेंड के साथ बिल्कुल भी ठीक नहीं है हम दोनों सिर्फ एक दूसरे के साथ जैसे मजबूरी से जुड़े हुए हैं वह कभी भी मेरी बातों में कोई रुचि दिखाती ही नहीं थी और मुझे भी उस में अब कोई इंटरेस्ट नहीं रह गया था।

वह बिल्कुल भी मेरे टाइप की नहीं थी वह कुछ ज्यादा ही मॉडर्न थी और मैं चाहता था कि मैं उसे अब अलग हो जाऊं मैं उससे कोई रिलेशन रखना ही नहीं चाहता था और मैंने ऐसा ही किया। मैंने अब उससे अपना ब्रेकअप करने की कोशिश की लेकिन वह मेरा पीछा ही नहीं छोड़ रही थी इस बात से मैं बहुत ज्यादा परेशान था लेकिन मुझे भी उससे अपना पीछा छुड़वाना था। आखिरकार मैंने उससे अपना पीछा छुड़वा ही लिया जब मैं ममता के नजदीक आने लगा तो यह बात मेरी गर्लफ्रेंड को भी पता चल गई थी और उसने न जाने क्या क्या हरकत की ताकि ममता और मैं दूर हो जाए। उसने हमे अलग करने के लिए बहुत ही प्रयास किया लेकिन ममता और मैं एक हो गए क्योंकि हम दोनों एक दूसरे के लिए ही बने थे और ममता ने मेरा बहुत ही साथ दिया। ममता ने मेरा हमेशा ही साथ दिया और अब मेरे कॉलेज की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी थी मैं अपनी उच्च शिक्षा की पढ़ाई करने के लिए दूसरे कॉलेज में जा चुका था लेकिन ममता अभी उसी कॉलेज में पढ़ रही थी और मैं ममता से अक्सर मिलता ही रहता था। मैं जब भी ममता से मिलता तो ममता हमेशा मुझे कहती कि अनिल कभी तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगे मैं हमेशा ममता से कहता की भला तुम में ऐसी क्या कमी है जो मैं तुम्हें छोड़ दूंगा तुम्हें मैं बहुत पसंद करता हूं और तुम्हें छोड़ने का तो सवाल ही नहीं बनता।

ममता मुझे कहती की लेकिन मुझे तो लगता है कि तुम मुझे छोड़ दोगे मैंने ममता से कहा तुम्हे यह बात किसने कही ममता मुस्कुरा कर मुझे देखने लगी और कहने लगी मैं तो तुम्हारे साथ बस मजाक कर रही थी। मैंने ममता से कहा आगे से ऐसा मजाक मत करना मुझे ऐसा मजाक बिल्कुल भी पसंद नहीं है ममता कहने लगी ठीक है बाबा आज के बाद कभी नहीं कहूंगी। ममता और मेरे बीच में बहुत ही ज्यादा नज़दीकियां पैदा हो चुकी थी और हम दोनों एक दूसरे के बिना रह ही नहीं पाते थे मैं जब ममता को देखता तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और उससे बात कर के मैं खुश हो जाया करता था और मेरी सारी टेंशन दूर हो जाती थी। यह बात मेरी बहन को भी मालूम थी कि मेरा ममता के साथ रिलेशन चल रहा है लेकिन उसके बावजूद भी ममता और मैं एक दूसरे से मिला करते थे। एक बार मेरी बहन ने यह बात मां को भी बता दी थी लेकिन मां ने मुझे कुछ नहीं कहा मुझे अब एहसास हो चुका था कि मैं अब बड़ा हो चुका हूं। ममता और मै अक्सर मिला करते थे हम दोनों का मिलना होता रहता था और ममता भी मुझसे हमेशा मिलती तो मेरे और ममता के बीच में प्यार भरी बातें हो जाया करती थी। हम दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए तडपते थे एक दिन मैंने ममता के होठों को पार्क में किस कर लिया जब हम दोनों पार्क में बैठे हुए थे तो मैंने ममता के होठों को चूम लिया। ममता के होंठो को चूसते ही उसके अंदर भी एक अलग ही बेचैनी सी जागने लगी वह मेरी तरफ देखने लगी लेकिन मुझे उसे देखकर अच्छा लग रहा था। मैं ममता को देखता रहा हम दोनों की नजरें एक दूसरे से मिलती रही और मुझे भी बहुत अच्छा लगा जैसे ही मैंने ममता से कहा कि अब हम चलते हैं तो ममता कहने लगी ठीक है हम लोग वहां से तो चले गए लेकिन मेरे दिल में ममता के लिए एक आग जल चुकी थी वह अब इतनी जल्दी बुझने वाली नहीं थी।

हम दोनों एक दूसरे के लिए तड़प रहे थे मेरे अंदर की आग ज्यादा बढ़ने लगी थी जब मैंने ममता से मिलने का फैसला किया तो दो जवान दिल जब अकेले मिले तो हम दोनों ही बिल्कुल भी रह ना सके। इससे पहले भी हम दोनों के बीच में किस तो हो ही चुका था हम दोनों ही रह ना सके। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था मैंने भी ममता के होठों को चूमना शुरू कर दिया ममता के अंदर की बेचैनी बढ़ने लगी। ममता के अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ चुकी थी कि वह अब अपने आपको ना रोक सकी और मेरी बाहों में आ गई हम दोनों के बदन एक दूसरे से टकराने लगे थे। मेरा हाथ ममता की चूतड़ों पर था और ममता का हाथ मेरे लंड पर था ममता का हाथ जब मेरे लंड पर था तो उसने भी मेरे लंड को दबा दिया। मैंने भी उसकी चूतड़ों को दबा दिया मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था मैंने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो ममता ने भी उसे अपने मुंह के अंदर ले लिया और मेरे लंड को बाहर निकलकर चूसने लगी। जिस प्रकार से ममता ने मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर लेकर सकिंग किया तो मुझे बड़ा मजा आ रहा था और वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो चुकी थी।

मेरे लंड से पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था मैंने अपने लंड को ममता की कोमल योनि पर लगा दिया और जैसे ही मेरा लंड ममता की कोमल योनि में गया तो वह चिल्ला उठी। मैंने भी धक्का देते हुए अंदर की तरफ अपने लंड को घुसाया और अंदर बाहर करने लगा उसे बड़ा मजा आने लगा और मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। उसके मुंह से तेज आवाज निकलती उस से मैं उत्तेजित हो उठता और जिस प्रकार से मैं उसकी चूत के अंदर बाहर अपने लंड को कर रहा था उससे मुझे बड़ा मजा आ रहा था और उसे भी मजा आ रहा था। मैं ज्यादा समय तक उसकी चूत की गर्मी को ना झेल सका और मेरा वीर्य पतन हो गया मेरा वीर्य पतन होते ही वह पूरी तरीके से खुश हो गई और कहने लगी मुझे आज अच्छा लग रहा है। मैंने ममता से कहा तुम्हारी टाइट चूत मार कर मेरा बदन खिल उठा है।

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