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मजे लेकर चल दी

Antarvasna, hindi sex kahani: मैं और सुहानी अपना जीवन बहुत ही अच्छे से बिता रहे हैं हम दोनों की शादी  को 3 वर्ष हो चुके हैं और हम दोनों दिल्ली में रहते हैं। कुछ समय पहले ही मैंने एक फ्लैट खरीदा था और उस वक्त मेरे माता-पिता भी लखनऊ से कुछ दिनों के लिए दिल्ली आए थे उसके बाद वह लोग चले गए। मैं और सुहानी दिल्ली में साथ में रहते हैं सुहानी से मेरी अरेंज मैरिज हुई थी और जब मैंने सुहानी को पहली बार देखा तो उसी वक्त सुहानी को देखते ही मैंने उसे पसंद कर लिया था उसके बाद हम दोनों की एक दूसरे से बातचीत होने लगी। जब हम दोनों की शादी हो गई तो शादी के कुछ समय बाद ही मैं दिल्ली आ गया मेरे साथ सुहानी भी आ गई थी। शुरुआत में तो मैं छोटी कंपनी में जॉब करता था लेकिन जब मेरी एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब लग गई तो उसके बाद मेरी सैलरी भी बड़ गई जिस वजह से मैंने कुछ समय पहले ही घर खरीद लिया था। सुहानी भी जॉब करने लगी थी हम दोनों सुबह के वक्त चले जाया करते और शाम को अपने काम से घर लौटते लाइफ इतनी ज्यादा बिजी होने लगी थी कि अपने लिए बिल्कुल भी समय नहीं मिल रहा था।

एक दिन मैंने सुहानी से कहा कि सुहानी हमें कुछ दिनों के लिए कहीं घूमने के लिए चले जाना चाहिए तो सुहानी कहने लगी की हां राजीव तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो काफी समय हो गया है हम कहीं घूमने भी नहीं गए हैं। मैंने जब सुहानी को यह कहा तो सुहानी भी मान चुकी थी वह कहने लगी कि लेकिन हम लोग घूमने कहां जाएंगे तो मैंने सुहानी से कहा कि हम लोग मनाली घूमने के लिए चलते हैं। हम लोग कुछ दिनों के लिए मनाली घूमने के लिए चले गए मुझे भी काफी अच्छा लग रहा था काफी समय बाद काम से मैंने ब्रेक लिया था और सुहानी के साथ मैं अच्छा समय बिता पा रहा था। हम दोनों जिस होटल में रुके हुए थे वहां पर भी सब कुछ अच्छे से व्यवस्थित था और कुछ दिनों तक हम दोनों ने मनाली में ही अच्छे से साथ में समय बिताया उसके बाद हम लोग वापस दिल्ली लौट आए।

दिल्ली लौटने के बाद हम लोग अपनी वही पुरानी जिंदगी में वापस लौट चुके थे हर रोज सुबह हम लोग ऑफिस चले जाते और शाम के वक्त ऑफिस से घर लौटते मैं और सुहानी एक दूसरे को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते थे। शाम के वक्त भी हम लोग ऑफिस से लौटते तो हम दोनों थके हारे होते थे और उसके बाद सुहानी खाना बनाने लग जाती जिससे कि हम दोनों को बात करने का भी मौका नहीं मिल पाता था। मैंने एक दिन सुहानी से कहा कि सुहानी क्यों ना हम लोग घर में किसी को काम पर रख लें जो कि साफ-सफाई और खाना बनाने का काम कर दिया करें उससे हम दोनों को समय भी मिल जाया करेगा और ऑफिस से हम लोग जब आते हैं तो हम दोनों काफी थक जाते हैं जिसके बाद तुम्हें खाना बनाने में भी दिक्कत होती है। सुहानी भी मेरी बात मान गई और हम दोनों ने अब नौकरानी की तलाश शुरू कर दी आखिरकार हमारी तलाश खत्म हो गई क्योंकि हमारे पड़ोस में रहने वाले गुप्ता जी ने हमें कांता के बारे में बताया और वह अगले दिन से हमारे घर पर आने लगी। सुबह के वक्त वह जल्दी आ जाया करती थी और साफ सफाई करने के बाद वह नाश्ता बना कर चले जाया करती और शाम के बाद भी वह करीब 6:00 बजे आ जाया करती थी जिसके बाद वह खाना बनाने की तैयारी शुरू कर देती और 8:00 बजे तक वह चली जाया करती थी। वह सुबह और शाम के वक्त ही आती थी इसलिए हम लोग उसे उसके काम के हिसाब से ही पैसे देते थे वह पड़ोस में भी गुप्ता जी के घर पर काम करती थी। कुछ दिनों के लिए मेरे मम्मी पापा भी दिल्ली आ गए थे क्योंकि पापा की तबीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए पापा चाहते थे कि वह दिल्ली से ही अपना इलाज करवाएं और उनका इलाज दिल्ली से ही चलने लगा था। दिल्ली के एक नामी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था जिससे कि उनकी तबीयत में भी काफी सुधार आने लगा था करीब तीन महीने के बाद वह पूरी तरीके से ठीक हो गए। कुछ समय तक वह हमारे पास रुके और फिर वह घर चले गए पापा और मम्मी से मैंने कहा था कि आप लोग हमारे पास ही रुक जाइए लेकिन वह लोग नहीं माने। वह कहने लगे की नहीं बेटा हम लोग लखनऊ में ही ठीक हैं और हमारा जब मन करेगा तो हम तुम लोगों से मिलने के लिए आ जाए करेंगे।

पापा और मम्मी को लखनऊ में ही अच्छा लगता था इस वजह से वह लोग दिल्ली कम ही आया करते थे और एक वजह यह भी थी कि मैं और सुहानी सुबह ऑफिस चले जाया करते थे और शाम को घर लौटते थे जिससे कि पापा मम्मी को हम समय नहीं दे पाते थे शायद इसीलिए वह लोग हमारे साथ नहीं रुकना चाहते थे। मेरी जिंदगी में सब कुछ सामान्य चल रहा था सुहानी और मैं दूसरे को भी समय देने लगे थे। सुहानी और मैं एक दूसरे के साथ बहुत ही खुश थे। एक दिन सुहानी का ऑफिस में कोई पार्टी थी तो सुहानी ने मुझे कहा मुझे आज घर आने में देर हो जाएगी मैंने सुहाने को कहा ठीक है तुम मुझे बता देना अगर तुम्हे ज्यादा देर हो जाएगी तो मैं तुम्हें लेने के लिए आ जाऊंगा और उस दिन मैं अपने ऑफिस से घर जल्दी लौटा। कांता घर का काम कर रही थी वह रसोई में खाना बना रही थी मैंने उसे कहा तुम आज सुहानी के लिए खाना मत बनाना वह बाहर से ही खाना खा कर आएगी। कांता ने कहा ठीक है साहब मैं सिर्फ आपके लिए खाना बना देती हूं कांता मेरे लिए खाना बनाने लगी थी।

जब वह रसोई में खाना बना रही थी तो मैं रसोई की तरफ गया मैंने देखा कांता खाना बनाने में इतने व्यस्त थी कि उसे पता ही नहीं चला कि कब मैं पीछे से आ गया जैसे ही मैंने कांता की कमर की तरफ से देखा तो मेरा लंड खड़ा होने लगा था। मैंने जब उसकी कमर पर अपने हाथ को लगाया तो वह मचलने लगी थी और मुझे कहने लगी साहब आप यह क्या कर रहे हैं मैंने कांता से कहा मैं तुम्हें उसके बदले पैसे दूंगा। वह मुझे कहने लगी साहब मुझे पैसों की जरूरत तो वैसे भी है आप मुझे कितने पैसे देंगे? मैंने उसे कहा चलो बेडरूम में चलते हैं और हम दोनों बेडरूम में चले आए मैंने अपने बटुए से उसे 2000 का नोट निकाल कर दिया जब मैंने अपने बटुए से उसे 2000 का नोट निकाल कर दिया तो उसने उसे तुरंत ही अपने पास रख लिया। जब उसने ऐसा किया तो मैंने उसे कहा अब तुम मेरे लंड को चूसो तो वह मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेने के लिए तैयार थी और उसने मेरे कपड़े उतारते हुए मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर ले लिया और उसे बड़े अच्छे तरीके से चूसने लगी। वह इतनी ज्यादा उत्तेजित हो गई थी कि उसने मेरे लंड को अंदर तक ले लिया था उसने पानी भी बाहर की तरफ को निकल दिया था। मैं बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगा था और वह भी पूरी तरीके से गर्म हो चुकी थी मै बहुत ही ज्यादा गरम हो चुकी हूं मैंने उसे कहा मुझे तो बहुत ही अच्छा लग रहा है और यह कहते ही मैंने उसके कपड़े उतार फेंके। वह बिस्तर पर मेरे साथ थी जब वह बिस्तर पर मेरे साथ थी तो मुझे ऐसा एहसास हो रहा था जैसे कि वह मेरी पत्नी हो। अब वह मुझे पूरी तरीके से सुख देने के लिए तैयार थी उसने अपने पैरों को चौड़ा कर लिया और कहा साहब आप मेरी चूत को चाट लो। मैंने उसकी चूत की तरफ देखा उसकी चूत पर काफी ज्यादा बाल थे मैंने उसे कहा तुम अपनी चूत के बाल को साफ नहीं करती हो?

वह कहने लगी साहब मेरे पास इतना समय ही कहां होता है लेकिन उसकी चूत से जो पानी बाहर निकल रहा था वह मुझे साफ दिखाई दे रहा था अब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया जैसे ही मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो मुझे मजा आने लगा और वह भी मेरा पूरा साथ देने लगी थी मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रखा और जब मैंने ऐसा किया तो वह पूरी तरीके से संतुष्ट हो गई थी अब मैंने उसे बड़ी तेज गति से धक्के देना शुरू कर दिया था। मैं उसे इतनी तेजी से धक्के मार रहा था कि वह पूरी तरीके से संतुष्ट होने लगी थी और मुझे कहने लगी साहब आप मेरी चूत के अंदर ही अपने वीर्य को गिरा दो। मैंने उसे कहा मैं तुम्हारी चूत के अंदर ही अपने वीर्य को गिरा रहा हूं और यह कहते ही मैंने अपने वीर्य को उसकी योनि में गिरा दिया लेकिन जब मैंने उसे दोबारा से चोदना शुरू किया तो वह पूरी तरीके से जोश में आ चुकी थी। मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि वह थकने वाली नहीं है और उसने मुझे कहा मुझे बहुत मजा आ रहा है आप ऐसे ही मुझे धक्के देते रहिए। अब मैं उसे बड़ी तीव्र गति से धक्के दे रहा था और मुझे उसे चोदने में इतना आनंद आ रहा था कि वह भी पूरी तरीके से खुश हो चुकी थी और मुझे कहने लगी मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा है।

मैंने उसे डॉगी स्टाइल मे बनाते हुए उसकी चूतडो पर हाथ से प्रहार करना शुरू किया तो उसकी चूतड़ों पर प्रहार कर के मुझे बहुत ही मजा आ रहा था और वह भी बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी। अब मैं उसे बड़े ही अच्छे तरीके से चोद रहा था मैं उसे जितनी तेज़ गति से धक्के मार रहा था उतनी ही तेज गति से वह भी अपनी चूतड़ों को मुझसे मिलाए जा रही थी ऐसा करने में उसे बड़ा आनंद आ रहा था और मुझे भी उसे धक्के मारने में उतना ही मजा आ रहा था अब वह समय नजदीक आ गया जब मेरा वीर्य मेरा अंडकोषो से बाहर की तरफ को आने के लिए तड़प रहा था और वह कांता की चूत के अंदर जाना चाहता था। मैंने भी जोरदार झटकों के साथ कांता की चूतड़ों को पूरी तरीके से हिला दिया था जब मैंने उसकी चूत के अंदर अपने वीर्य को गिराया तो वह मुझे कहने लगी साहब आज तो आपने मेरी चूत के मजे लेकर मुझे खुश कर दिया। मैंने उसे कहा ऐसे मजे तो मैं अब आगे भी लेता रहूंगा वह बड़ी खुश हो गई और उसके बाद वह चली गई।

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