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मेरा अपना अनुभव-1

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हैल्लो दोस्तों मेरा अपना अनुभव कहता है कि किसी भी लड़की को गरम करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है, लेकिन बस उस लड़की को गरम करने का तरीका एकदम ठीक होना चाहिए। दोस्तों मैंने अपने घर की नौकरानी को ऐसे ही गरम करके बहुत मज़े से चोदा जिसकी सच्ची कहानी आज में आप सभी को आपके लिए बहुत मेहनत से लिखकर सुनाने के लिए आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह घटना आप लोगो को जरुर पसंद आएगी, क्योंकि जब मुझे चुदाई करने में इतना मज़ा आया तो आपको पढ़ने में क्यों नहीं आएगा? दोस्तों मेरा नाम साहिल है और में लखनऊ उत्तरप्रदेश का रहने हूँ, उस समय तक मेरे घर में बहुत सारी नौकरानियां काम करने आई और वो सभी भी चली गई, लेकिन बहुत अरसे के बाद मेरी अच्छी किस्मत से एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी नौकरानी मेरे घर पर काम पर आने लगी। दोस्तों उसकी उम्र करीब 22-23 साल होगी, उसका रंग सांवला था ठीक ठाक लम्बाई और सुडौल बदन और उसके बूब्स का आकार करीब 33-29-36 होगा, वो शादीशुदा थी। फिर में हमेशा मन ही मन उसको देखकर सोचा करता था कि उसका पति कितना किस्मत वाला है, जिसको इतनी मस्त पत्नी मिली है और वो साला उसको बहुत जमकर चोदता होगा। दोस्तों उसके बूब्स यानी गोलाईयां ऐसी थी कि उनको देखकर मेरा मन करता कि बस में उनको दबाता ही रहूँ और उसके बूब्स का आकार इतना बड़ा था कि वो उसके ब्लाउज में समाते ही नहीं थे।

फिर वो अपनी उभरी हुई छाती को कितनी ही बार अपनी साड़ी के पल्लू से ढकती, लेकिन फिर भी उसके गोल गोल बूब्स इधर उधर से उसके ब्लाउज से उभरते हुए दिख ही जाते थे। फिर वो जब भी झाड़ू लगाते हुए झुकती तब उसके बड़े गले के उस ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स के बीच की दरार उस सकड़ी सी गली को वो कैसे भी ना छुपा सकती थी। फिर वो मनमोहक द्रश्य मुझे कैसे भी नजर आ ही जाता था, जिसको देखकर मेरा लंड मस्ती में आकर झूमने लगता था। एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को अपनी तिरछी नजर से, लेकिन थोड़ा सा गौर करके देखा तब मुझे पता लगा कि उसने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। दोस्तों वो कहाँ से पहनती? क्योंकि ब्रा के ऊपर बेकार में पैसे क्यों खर्च किए जाए? जब वो ठुमकती हुई चलती तो उसके दोनों मदमस्त कूल्हे हिलते हुए बहुत आकर्षक नजर आते और वो जैसे मुझसे कह रहे हो कि तुम जल्दी से मुझे पकड़ लो और ज़ोर ज़ोर से दबाओ। फिर वो अपनी पतली सी सूती साड़ी को जब संभालती हुई सामने से अपनी चूत के ऊपर अपना एक हाथ रखती तब मेरा मन वो सब देखकर करता कि काश में उसकी चूत को छू सकता।

दोस्तों उसकी वो एकदम करारी गरम फूली हुई और गीली कामुक चूत में कितना मस्त मज़ा भरा हुआ था? काश में उसको चूम भी सकता। उसके बूब्स को दबा भी सकता और उसकी निप्पल को अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूस भी सकता और उसकी चूत को चूसते हुए में जन्नत का मज़ा ले सकता और फिर में अपना तना हुए लंड उसकी चूत में डालकर उसकी चुदाई भी कर सकता। दोस्तों अब मेरा चूत का प्यासा लंड मानता ही नहीं था, वो उसकी चूत में जाने के लिए बहुत बेकरार था और उसकी चुदाई करने के लिए तरस रहा था, लेकिन वो सब कैसे होगा? क्योंकि वो तो मुझे कभी देखती ही नहीं थी, बस वो तो अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती। दोस्तों वैसे मैंने भी उसको कभी भी इस बात का एहसास नहीं होने दिया कि मेरी नज़र उसको चोदने के लिए बेताब है और में हमेशा उसकी चुदाई के सपने देखा करता हूँ, लेकिन अब कैसे भी करके उसको एक बार चोदना तो था ही इसलिए मैंने अब मन ही मन सोच लिया था, कि मुझे अब इसको अपनी तरफ आकर्षित करना ही होगा और धीरे धीरे अपनी बातों में उसको फंसना भी पड़ेगा वरना, वो कहीं मचल जाए या नाराज़ हो जाये तो मेरा भांडा फूट जाएगा, इसलिए अब मैंने उसके साथ थोड़ी थोड़ी बातें करना शुरू कर दिया था, उसका नाम आरती था।

एक दिन सुबह मैंने उसको चाय बनाने के लिए कहा उसने तुरंत रसोईघर में जाकर कुछ देर बाद मेरा काम कर दिया, वो मेरे लिए चाय लेकर आ गई और अब उसके नरम नरम हाथों से जब मैंने चाय को लिया तो मेरा लंड उसको छूकर उछल पड़ा। अब में उसको अपनी प्यासी नजरों से देखने लगा और फिर मैंने चाय पीते हुए उसको कहा कि आरती वाह मज़ा आ गया, चाय तो तुम बहुत अच्छी बना लेती हो। फिर उसने जवाब दिया कि मेरी चाय की तारीफ करने के लिए बाबूजी आपको बहुत धन्यवाद। अब में करीब करीब हर दिन उसी से मेरे लिए चाय बनवाता और उसकी चाय की तारीफ करता और वो मुझसे अपनी बढाई सुनकर बहुत खुश होकर धन्यवाद कहकर चली जाती और इस तरह में धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा था। फिर मैंने एक दिन अपने कॉलेज जाने से पहले अपनी एक शर्ट को आरती से प्रेस करवाई। मैंने उसको कहा कि आरती तुम प्रेस भी बहुत अच्छी कर लेती हो, प्लीज इसके ऊपर भी प्रेस कर दो। फिर उसने कहा कि हाँ ठीक है बाबूजी आप मुझे दे दीजिए उसने मुझसे अपनी बहुत प्यारी सी आवाज़ में कहा और जब आसपास कोई भी नहीं होता, तब में सही मौका देखकर उसके साथ इधर उधर की बातें करता, जैसे आरती तुम्हारा पति क्या करता है? फिर वो कहती साहब वो एक मिल में नौकरी करता है।

अब मैंने उसको पूछा उसकी वहां पर कितने घंटे की नौकरी होती है? वो बोली साहब 10-12 घंटे तो लग ही जाते है और कभी कभी तो उनकी रात को भी ड्यूटी लग जाती है। फिर मैंने उसको पूछ लिया कि तुम्हारे कितने बच्चे है? तभी शरमाते हुए उसने जवाब दिया कि अभी तो दो साल की एक लड़की है। फिर मैंने पूछा क्या तुम उसको तुम्हारे घर में अकेला छोड़कर आती हो? वो बोली कि नहीं मेरी बूढ़ी सास भी मेरे घर में है ना, वो उसको संभाल लेती है। अब मैंने उसको पूछा कि तुम कितने घरों में काम करती हो? वो कहने लगी कि साहब बस आपके और एक नीचे वाले घर में। अब मैंने फिर से पूछा तो क्या तुम दोनों का इस कमाई से काम तो चल ही जाता होगा? वो कहने लगी कि हाँ साहब काम चलता तो है, लेकिन बड़ी मुश्किल से क्योंकि मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बर्बाद कर देता है। दोस्तों अब मैंने उसकी मजबूरी को जानकर उसको एक बात कहना उचित समझा मैंने संभालते हुए उसको कहा कि ठीक है कोई बात नहीं में तुम्हारी मदद करूँगा। अब उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर मुझे एक बहुत अजीब सी नज़र से देखा जैसे वो मुझसे बिना कुछ कहे अपनी नजर से पूछ रही हो क्या मतलब है आपका? तभी मैंने तुरंत उसको कहा कि मेरा मतलब है कि तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ में उसे समझाऊँगा।

अब उसने हाँ ठीक है साहब कहते हुए ठंडी सांस भरी। इस तरह दोस्तों मैंने उसके साथ वो बातों का सिलसिला बहुत दिनों तक जारी रखा और मैंने हम दोनों के बीच की झिझक को मिटा दिया। एक दिन मैंने शरारत से कहा कि तुम्हारा आदमी पागल ही होगा अरे यार उसको भी समझना चाहिए कि इतनी सुंदर पत्नी के होते हुए भी उसको शराब की क्या ज़रूरत है? दोस्तों वैसे औरत बहुत तेज़ होती है उसने मेरी बातों को कुछ कुछ समझ तो लिया था, लेकिन अभी तक उस बात का उसने मुझे अपनी तरफ से ज़रा सा भी नाराज़गी का अहसास नहीं होने दिया और अब मुझे भी ज़रा सा अनुमान मिल गया कि यह बड़े आराम से तस्वीर में उतार जाएगी, सही मौका मिले और में इसको दबोच लूँ, यह मुझसे अपनी चुदाई जरुर करवा लेगी और आख़िर एक दिन मेरे हाथ एक ऐसा मौका लग ही गया। वो कहते है ना कि ऊपर वाले के यहाँ देर है, लेकिन अंधेर नहीं। दोस्तों वो रविवार का दिन था हमारा पूरा परिवार एक शादी में गया हुआ था, में अपनी पढ़ाई की खोटी होने की वजह बताकर उनके साथ नहीं गया। मेरी मम्मी मुझे कहकर गई थी कि आरती आएगी तुम उसको कहना घर का काम ठीक से कर दे। अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है और अब मेरे दिल में खुशी के लड्डू फूटने लगे और मेरा लंड चुदाई की बात सोचकर खड़ा होने लगा।

फिर वो अपने ठीक समय पर आ गई और उसने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और फिर अपने काम पर लग गयी। दोस्तों इतने दिन की बातचीत से अब हम दोनों बहुत ज्यादा खुल चुके थे और उसको मेरे ऊपर एक विश्वास सा हो गया था, इसलिए उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। अब मैंने उसको हमेशा की तरह चाय बनवाने के लिए कहा और चाय को पीते हुए में उसकी चाय की बढाई करने लगा और तब मन ही मन मैंने निश्चय किया कि आज तो मुझे इसके साथ पहल करनी ही पड़ेगी वरना मेरी गाड़ी आज मेरे हाथ से छूट जाएगी और फिर में सोचने लगा कि कैसे पहल करूं? तब आख़िर में मुझे विचार आया कि भाई सबसे बड़ा रुपैया। अब मैंने उसको अपने पास बुलाया और कहा कि आरती तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो तुम मुझे ज़रूर बता देना तुम बिल्कुल भी झिझकना मत। फिर वो बोली कि इतनी महरबानी करने के लिए धन्यवाद साहब, लेकिन आप मेरी पगार से काट लोगे और मेरा आदमी मुझे इसके लिए बहुत डांटेगा। अब मैंने उसको कहा कि अरे पगली में तुझसे पगार की बात नहीं कर रहा हूँ, तुझे बस कुछ और पैसे अलग से चाहिए तो में वो मदद के लिए दे दूँगा और किसी को नहीं बताऊँगा, लेकिन बशर्ते तुम भी किसी को ना बताओ तो और में अब उसके जवाब का इंतज़ार करने लगा।

अब वो बोली कि भला में क्यों किसी को बताने लगी, लेकिन क्या आप सच में मुझे कुछ पैसे देंगे? दोस्तों बस फिर क्या था? लड़की पट गयी बस अब मुझे आगे बढ़ना था और मलाई खानी थी, मैंने उसको कहा कि हाँ आरती में तुझे पैसे ज़रूर दूँगा। मैंने उसको पूछा क्यों इससे तुम्हे खुशी मिलेगी ना? अब वो बोली कि हाँ साहब बहुत आराम हो जाएगा उसने इठलाते हुए कहा। अब मैंने भी धीमी आवाज से कहा और मुझे भी खुशी मिलेगी अगर तुम भी कुछ ना कहो तो और अब जैसा में तुमसे कहूँ तुम ठीक वैसा ही करो तो? बोलो क्या तुम्हे मंज़ूर है? यह बात कहते हुए मैंने उसके हाथ में 500 रुपये थमा दिए, लेकिन उसने वो रुपये टेबल पर रख दिए और फिर वो मुस्कुराते हुए मुझसे पूछने लगी कि मुझे क्या करना होगा साहब? अब मैंने उसको कहा कि तुम पहले अपनी आँखें बंद करो। में यह बात कहते हुए उसकी तरफ थोड़ा सा आगे बढ़ा और मैंने उसको कहा कि तुम बस अब थोड़ी देर के लिए अपनी आँखें बंद करो और चुपचाप खड़ी रहो। फिर उसने उसी समय अपनी दोनों आखों को बंद कर लिया, मैंने एक बार फिर से कहा कि आरती में जब तक तुमसे ना कहूँ तुम अपनी आँखें बंद ही रखना वरना तुम अपनी शर्त हार जाओगी। अब वो बोली कि हाँ ठीक है साहब और वो शरमाते हुए अपनी दोनों आँखें बंद करके चुपचाप मेरे सामने खड़ी थी।

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