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मेरा लंड चूत मे जाकर वीर्य छोड चुका था

Sex stories in hindi, antarvasna: बहुत दिनो के बाद में अपनी बहन से मिलने के लिए जाता हूं। मै जब अपनी बहन को मिलने के लिए जाता हूं उस दिन वह मुझसे मिलकर बहुत ही ज्यादा खुश थी। वह कहने लगी गगन तुम कितने दिनों बाद मुझसे मिलने के लिए आए हो। मैंने अपनी बहन को कहा दीदी आपको तो मालूम ही है जब से मेरी जॉब लगी है तब से मुझे बिल्कुल भी टाइम नहीं मिल पाता और इसी वजह से मैं आपको मिलने के लिए नहीं आ पाया था। वह मुझे कहने लगी लेकिन तुमने यह बहुत ही अच्छा किया जो तुम आज मुझसे मिलने के लिए आ गए। मेरी बहन की शादी को 5 वर्ष हो चुके हैं उसका शादीशुदा जीवन बहुत ही अच्छे से चल रहा है मेरे जीजाजी एक बड़े अधिकारी हैं वह भी उस दिन घर पर ही थे। मै उनके साथ भी बात की। मै उस दिन घर वापस लौटना चाहता था लेकिन उन्होंने मुझे कहा आज तुम यही रुक जाओ और मैं उस दिन उन्हीं के घर पर रूक गया। अगले दिन मैं घर आया तो मां ने मुझसे दीदी के बारे में पूछा। मैंने उन्हें कहा दीदी ठीक हैं।

मेरी छुट्टी थी इसलिए मैंने सोचा क्यों ना आज अपने दोस्तों से मिल आता हूं। मैंने अपने दोस्तों को फोन किया जो कि मेरे साथ कॉलेज में पढ़ा करते थे और उस दिन हम सब लोग मिले। हम लोग हमारी कॉलोनी के पार्क में ही मिले क्योंकि मेरे अधिकांश दोस्त हमारी ही कॉलोनी में रहते हैं इसलिए मैं जब उनसे मिला तो सब लोग काफी खुश थे। हम लोगों ने सोचा क्यों ना हम सब लोग अपने कॉलेज के और दोस्तो से मिलने का प्लान बनाएं। हम लोगों ने एक गेट टुगेदर पार्टी रखने की सोची उस गेट टुगेदर पार्टी के लिए हम तैयार थे। हमारे कॉलेज के सारे दोस्त गेटटुगेदर पार्टी में आए थे। सब लोग उस पार्टी में आए थे तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा। हम लोगों की मुलाकात काफी समय बाद हुई थी सब लोग बहुत समय बाद मिले थे।

सब लोग एक दूसरे से मिलकर बहुत ही खुश थे मैं उस दिन जब शोभिता को मिला तो शोभिता हमारे क्लास में ही पढ़ा करती थी लेकिन शोभिता के चेहरे पर मुझे खुशी नजर नहीं आ रही थी। वह काफी ज्यादा परेशान नजर आ रही थी मैंने शोभिता से पूछा तुम इतनी परेशान क्यों हो। उसने मुझे सारी बात बताई और कहा उसके पापा के बिजनेस मे बहुत ही बड़ा नुकसान हुआ है जिसकी वजह से उन लोगों को घर भी गिरवी रखना पड़ा। मैंने जब शोभिता को कहा लेकिन इस बारे में तो तुमने मुझे कभी बताया ही नहीं था। शोभिता और मेरी फोन पर बातें होती थी लेकिन शोभिता ने मुझे इस बारे में कुछ बताया नहीं था। मैंने शोभिता को कहा मैं तुम्हारी किस प्रकार से मदद कर सकता हूं। शोभिता ने कहा गगन मैं तो चाहती हूं मुझे कहीं जॉब मिल जाए।

मैंने शोभिता को कहा मैं तुम्हारी अपने ऑफिस में जॉब के लिए कल ही बात करता हूं। वह मुझे कहने लगी ठीक है अगले दिन मैंने अपने ऑफिस में शोभिता की जॉब की बात की तो उसकी जॉब हमारे ऑफिस में लग चुकी थी क्योंकि मैं जिस ऑफिस में काम कर रहा था वहां पर मुझे काफी समय हो चुका था और मेरी मेरे बॉस के साथ भी काफी अच्छी बनने लगी थी इसलिए शोभिता को उन्होंने जॉब पर रख लिया। शोभिता जॉब करने लगी थी और वह चाहती थी वह अपने परिवार की मदद कर सके इसी वजह से वह जॉब कर रही थी। शोभिता एक दिन मुझे कहने लगी गगन यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है। मैंने उससे कहा ऐसा कुछ भी नहीं है तुम मेरी अच्छी दोस्त हो और मेरा इतना तो फर्ज बनता ही है। शोभिता को जब भी ऑफिस में देर हो जाया करती तो मैं ही उसे घर तक छोड़ने जाया करता। एक दिन शोभिता के पिता ने मुझे शोभिता के साथ देख लिया उस दिन वह मुझ पर बहुत ज्यादा गुस्सा हो गए।

मैंने उन्हें समझाया लेकिन उन्होंने शोभिता को ऑफिस जाने के लिए मना कर दिया था उनको शायद कुछ गलत लगा था। मेरी जब शोभिता से फोन पर बात हुई तो मैंने शोभिता से पूछा आखिर तुम्हारे पापा ने तुम्हें ऑफिस आने से मना क्यों किया है और वह मुझ पर बहुत ज्यादा गुस्सा भी हो गए थे। शोभिता ने मुझे कहा जब से पापा का बिजनेस में नुकसान हुआ है उसके बाद से उन्हें ऐसा लगता है कहीं मेरे साथ कुछ गलत ना हो जाए और वह मानसिक रूप से भी काफी ज्यादा टूट चुके है। मैंने शोभिता को कहा क्या तुम कल से ऑफिस आ रही हो या नहीं? शोभिता कहने लगी हां मैं कल से ऑफिस आऊंगी। शोभित अगले दिन से ऑफिस आने लगी थी हालांकि शोभिता के पापा को मैं बिल्कुल भी पसंद नहीं था। इस वजह से वह जब भी मुझे शोभिता के साथ देखते तो हमेशा ही वह मुझे कुछ ना कुछ कह दिया करते लेकिन मैं भी उनकी बात को अनसुना कर देता। शोभिता ने घर की सारी जिम्मेदारी को उठा लिया था और शोभिता की वजह से ही तो उसके घर में सब कुछ ठीक चल रहा था अगर शोभिता अपने पापा कि आर्थिक रूप से मदद नहीं करती तो शायद वह ठीक भी नहीं हो पाते। अब वह दोबारा से अपने बिजनेस को शुरू कर चुके थे उनका बिजनेस भी ठीक चलने लगा था सब कुछ उनकी लाइफ में ठीक होने लगा था।

एक दिन जब शोभिता ने मुझे पापा से मिलवाया शोभिता के पापा मुझसे मिले तो वह मुझसे कहने लगे गगन बेटा मैं तो तुम्हें गलत समझता था। अब मेरा शोभिता के घर पर अक्सर आना-जाना लगा रहता था उन्हें भी मुझसे कोई आपत्ति नहीं थी।एक दिन मे शोभिता को छोड़ने के लिए उसके घर जाता हूं। जब मैं उसके घर छोड़ने के लिए जाता हूं उस दिन शोभिता मुझे कहती है आओ कभी घर पर आ जाओ। मैंने पहले उसे मना किया लेकिन शोभिता ने दोबारा से मुझे कहा और मै शोभिता के घर पर चला गया। शोभिता और मैं साथ में बैठे हुए थे। हम दोनो एक दूसरे से बात कर रहे थे मैंने जब शोभिता से कहा आज घर पर कोई नजर नहीं आ रहा है? वह कहने लगी मम्मी शायद पड़ोस की आंटी के घर पर गई होंगी वह थोड़ी देर बाद आती ही होगी। हम दोनो एक दूसरे से बातें कर रहे थे लेकिन मेरे मन में ना जाना शोभिता को लेकर एक अलग फीलिंग जागने लगी जिससे कि मेरे अंदर की आग जलने लगी थी। मैं समझ चुका था कि शायद शोभिता के अंदर की आग भी जल रही है। जब मैंने शोभिता की जांघों को सहलाकर उसे अपनी ओर खींचने की कोशिश की तो वह मेरी बाहों में आ गई। जब वह मेरी बाहों में आई तो मुझे बहुत ही ज्यादा मजा आने लगा। वह कहती मुझे बड़ा मजा आ रहा था। अब हम दोनों पूरी तरीके से गर्म हो चुके थे हम दोनों की गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि अब हम एक दूसरे की गर्मी को झेल नही पा रहे थे। मुझसे बिल्कुल भी झेला नहीं जा रहा था इसलिए मैंने शोभिता को अपनी गोद में बैठा लिया। जब मैंने उसे अपनी गोद में बैठाया तो मेरा लंड तन कर खड़ा होने लगा था मुझे बहुत मजा आने लगा था और उसको भी मजा आ रहा था।

यही वजह थी कि हम एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुके थे। शोभिता ने मेरे लंड को बाहर निकाल कर उसे हिलाना शुरू किया। जब उसने मेरे लंड को बाहर निकालकर हिलाना शुरू किया तो मेरे अंदर की गर्मी पूरी तरीके से बढ़ चुकी थी और मैं बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। ना तो मैं रह पा रहा था और ना ही शोभिता अपने आप को रोक पा रही थी। मैंने शोभिता से कहा तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो। उसने मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर उसे चूसना शुरू कर दिया था। शोभिता को अच्छा लग रहा था जिस तरह वह मेरे मोटे लंड को अपने मुंह में ले कर चूस रही थी। उसने मेरी गर्मी को पूरी तरीके से बढ़ा दिया था और मेरे अंदर की गर्मी बढ चुकी थी।

मैंने शोभिता से कहा क्यों ना तुम्हारी चूत मार लूं। शोभिता तैयार थी। हम दोनों ही एक दूसरे के साथ सेक्स करने के लिए तैयार हो चुके थे। हमारी गर्मी बढ चुकी थी उसे रोक पाना बहुत ही मुश्किल था। ना तो मैं अपने आपको रोक पाया और ना ही शोभिता। मैंने उसके बदन से कपड़े उतार दिए हम दोनों बेडरूम में एक साथ बैठे हुए थे। शोभिता भी मेरे साथ सेक्स करने के लिए तैयार थी वह सब कुछ भूलकर मेरे साथ सेक्स करना चाहती थी। यह मेरे लिए बड़ा ही अच्छा मौका था। मैंने जब उसके कपड़े खोल कर उसके बदन को महसूस करना शुरू किया तो मुझे मजा आने लगा और उसको भी बड़ा मजा आ रहा था। हम दोनों के अंदर की गर्मी बढ चुकी थी। मैंने अपने लंड को शोभिता की चूत पर लगाकर अंदर डालना शुरू किया तो उसकी चूत से खून बाहर की तरफ निकल आया था। शोभिता की चूत बहुत ही टाइट थी इसलिए मुझे अब उसको चोदने मे मजा आ रहा था। मैं जिस प्रकार से उसे धक्के मार रहा था उससे मेरे अंदर की गर्मी बढ़ती जा रही थी वह बहुत खुश हो चुकी थी और मैं भी बहुत ज्यादा खुश था।

मैं शोभिता के साथ सेक्स का मजा ले रहा था। यह बहुत ही अच्छा था हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा ले पा रहे थे। मैंने उसे 5 मिनट तक चोदा। जब मैं उसे धक्के मारता तो वह पूरी तरीके से हिल जाती और मुझे शोभिता को चोदकर मुझे बहुत ही मजा आया। मैंने उसकी योनि से खून भी निकाल दिया था। हम दोनों ने एक दूसरे के साथ जमकर सेक्स का मजा लिया। जब हम दोनों की गर्मी पूरी तरीके से शांत हो गई तो मैं अपने घर चला गया। उसके बाद भी शोभित और मेरे बीच कई बार संबंध बने और अभी भी हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाते हैं। शोभिता और मै जब शिमला टूर पर गए थे तो मुझे उसे चोदने मे बहुत मजा आ रहा था।

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