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मेरा परमानेंट जुगाड़

Antarvasna, hindi sex stories: हर रोज की तरह सुबह मैं मॉर्निंग वॉक पर घर से निकला उस वक्त सुबह के 5:00 बज रहे थे सब कुछ वैसा ही था जैसा हमेशा की तरह रहता था। आधे घंटे की मॉर्निंग वॉक के बाद मैं जब घर पहुंचा तो उस वक्त पिताजी उठ चुके थे और वह मुझे कहने लगे की अमन बेटा तुम आ गए मैंने पिताजी से कहा हां पापा। मैं उसके बाद अखबार पढ़ने लगा मेरी पत्नी भी उठ चुकी थी और वह मुझे कहने लगी कि अमन क्या मैं आपके लिए चाय बना दूं तो मैंने उसे कहा नहीं लाता अभी तुम चाय रहने दो मेरा मन अभी चाय पीने का नहीं है थोड़ी देर बाद तुम मेरे लिए चाय बना देना। जब मैं अखबार पढ़ने के बाद नहाने के लिए चला गया तो उसके बाद मैंने अपनी पत्नी लता से कहा कि तुम मेरे लिए चाय बना दो उसने मेरे लिए चाय बना दी और मैं चाय पीने लगा। मैं और पापा साथ में बैठे हुए थे पापा अखबार पढ़ रहे थे और वह मुझसे बात कर रहे थे पापा ने मुझे कहा कि अमन बेटा तुम्हारी बहन कुछ दिनों के लिए यहां आ रही है। मैंने पापा से कहा लेकिन दीदी कब आ रही है दीदी को आए हुए तो काफी समय हो चुका है पापा ने कहा वह दो-चार दिनों में यहां आ जाएगी क्योंकि उससे मेरी फोन पर बात हुई थी।

पापा के साथ मैं कुछ देर बैठा रहा फिर मैं अपने ऑफिस जाने के लिए तैयार होने लगा मैं एक फाइनेंस कंपनी में नौकरी करता हूं मैं अब तैयार हो चुका था और अपने ऑफिस के लिए मैं निकल चुका था। मैं जब अपने ऑफिस पहुंचा तो हर रोज की तरह काम में इतना बिजी हो गया कि पता ही नहीं चला कब शाम हो गई शाम होते वक्त मैं घर लौटा और जब मैं घर लौटा तो मेरी पत्नी लता ने मुझे कहा कि अमन कल छोटू का जन्मदिन है। मैंने लता से कहा मैं तो भूल ही चुका था छोटू मेरे बेटे का नाम है हम लोग प्यार से उसे घर में छोटू ही बुलाते हैं उसकी उम्र 5 वर्ष की है। मैंने लता को कहा कल हम लोग उसके जन्मदिन को सेलिब्रेट करेंगे मैं आज ही जाकर होटल बुक कराता हूं। मैं अपने घर के पास एक होटल में चला गया वहां पर मैंने उनके हॉल को बुक करवा दिया और खाने का सारा अरेंजमेंट करवा दिया था मेरे भी कोई पांच दस दोस्त और उनके परिवार वालों को मैं बोलने वाला था और हमारे आस पड़ोस के कुछ लोग आने वाले थे। करीब 70 लोगों के लिए मैंने होटल में खाने के लिए बोल दिया था अगले दिन सारी तैयारी हो चुकी थी और जब उस दिन मैं घर पहुंचा तो मेरी दीदी भी घर आ चुकी थी वह मुझे कहने लगी कि देखा अमन मैं बिल्कुल सही समय पर आई हूं।

मैंने दीदी से कहा दीदी आपने बहुत ही अच्छा किया जो आज आप आ गई फिर शाम के वक्त हम लोग होटल में चले गए और वहां पर हम लोगों ने छोटू का जन्मदिन बड़े ही अच्छे से मनाया और सब लोग बहुत ही खुश थे उसके बाद हम लोग घर लौट आए। अगले दिन सुबह मैं जल्दी उठ गया और हर रोज की तरह मैं मॉर्निंग वॉक पर चला गया मैं मॉर्निंग वॉक पर से लौटने के बाद अपने घर के गमलों में पानी डाल रहा था पापा मुझे कहने लगे कि बेटा क्या मैं तुम्हारी कुछ मदद कर दूं। मैंने पापा से कहा नहीं पापा आप रहने दीजिए पापा अखबार पढ़ने लगे थे और मैं सारे गमलों में पानी डाल चुका था और फिर उसके बाद मैं अपने ऑफिस के लिए तैयार हो गया मैंने नाश्ता किया और अपने ऑफिस के लिए मैं घर से निकल गया। मैं जब अपने ऑफिस के लिए निकल रहा था तो मुझे रास्ते में मेरा दोस्त दिखाई दिया क्योंकि मैं ऑफिस के लिए जल्दी में था इसलिए उससे मैं ज्यादा बात नहीं कर पाया। मैंने सुधीर को कहा कि मैं तुम से वापस आते वक्त मुलाकात करता हूं वह मुझे कहने लगा कि जब तुम ऑफिस से फ्री हो जाओ तो मुझे जरूर मिलना मैंने सुधीर को कहा हां मैं तुमसे अपने ऑफिस खत्म होने के बाद जरूर मुलाकात करूंगा। उसके बाद मैं अपने ऑफिस चला गया और हर रोज की तरह अपने ऑफिस का काम खत्म करने के बाद शाम के 6:00 बज चुके थे और मैं अब घर लौटने की तैयारी में था कि मुझे घर जाना है तभी मुझे ध्यान आया की सुधीर को मिलना है इसलिए मैंने ऑफिस से ही सुधीर को फोन कर दिया। जब मैंने उसको फोन किया तो वह मुझे कहने लगा कि मैं तुम्हें तुम्हारे घर के पास मिलता हूं मैंने सुधीर को कहा ठीक है और फिर मैं अपने ऑफिस से अपने घर की तरफ को निकल चुका था।

मैं करीब आधे घंटे में अपने घर पहुंचा और सुधीर मेरे घर के पास के ही एक रेस्टोरेंट में बैठा हुआ था मैं उससे उसी रेस्टोरेंट में मिला और हम लोग वहां पर बैठकर बात करने लगे। मैंने सुधीर से उसके हालचाल पूछे तो सुधीर ने मुझे बताया कि वह कुछ दिनों से काफी परेशान है मैंने उसकी परेशानी का कारण पूछा तो वह मुझे कहने लगा कि कुछ दिनों से मैंने नौकरी छोड़ दी थी जिस वजह से मैं काफी परेशान हूं। मैंने सुधीर को नौकरी छोड़ने का कारण पूछा तो उसने मुझे बताया कि घर में उसकी पत्नी के साथ उसके काफी झगड़े हो रहे थे जिस वजह से वह कुछ दिनों से काफी तनाव में था और अब उसकी पत्नी ने उससे तलाक ले लिया है। मैंने सुधीर को कहा क्या तुम्हारी पत्नी ने तुमसे डिवोर्स ले लिया है? सुधीर मुझे कहने लगा कि हां। मैंने सुधीर को कहा लेकिन मुझे तो इस बारे में कुछ भी पता नहीं था तो सुधीर मुझसे कहने लगा कि हम लोगों की मुलाकात होती ही नहीं है इस वजह से तुम्हें इस बारे में पता नहीं है लेकिन मैं अपनी पत्नी से काफी तंग आ चुका था जिस वजह से मैंने उससे डिवोर्स लेना ही उचित समझा और मैंने उससे डिवोर्स ले लिया। मैं और सुधीर काफी देर तक साथ में बैठे रहे और फिर वह मुझे कहने लगा कि अभी मैं चलता हूं मैंने सुधीर को कहा सुधीर मैं तुमसे अपनी छुट्टी के दिन मिलता हूं तो वह कहने लगा ठीक है और अब वह चला गया और मैं भी घर वापस लौट आया।

मैं जब घर वापस लौटा तो मैं सुधीर के बारे में ही सोचता रहा नहीं मैं सोच रहा था कि उसकी पत्नी ने उसे डिवोर्स क्यों दिया है होगा उन लोगों के बीच तो सब कुछ अच्छे से चल रहा था और उन लोगों ने लव मैरिज की थी। मैंने यह बात अपनी पत्नी को बताई तो वह मुझे कहने लगी कि सुधीर भैया तो बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं उनकी पत्नी ने उन्हें डिवोर्स दे कर बहुत ही गलत किया। कुछ ही दिनों बाद मैं सुधीर को मिलने के लिए उसके घर पर गया। मैं उस दिन सुधीर को मिला उसके बाद मै जब घर वापस लौट रहा था तो सुधीर के ही पड़ोस मे एक भाभी रहती हैं। उन्होंने मुझे कहा क्या आप सुधीर से मिलने आए थे? मैंने उन्हें कहा हां मैं सुधीर से मिलने के लिए आया था वह मुझसे बात करने लगी लेकिन वह अपने पल्लू को सरका रही थी। मैंने उनके स्तनों पर हाथ लगा दिया तो वह मुझसे कहने लगी क्या तुम मुझसे मिलने आ सकते हो कल मेरे पति अपने काम से बाहर जा रहे हैं और मैं घर पर अकेली रहूंगी। उनकी बड़ी गांड देख मेरा मन उनकी गांड मारने का होने लगा मैंने कहा ठीक है मैं कल आपसे मिलने के लिए आ जाऊंगा। मैंने भाभी का नाम पूछा तो उन्होंने बताया मेरा नाम कविता है। मैं अब कविता भाभी से मिलने के लिए अगले दिन चला गया जब मैं उनसे मिलने के लिए गया तो वह मेरा बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी उन्होंने कहा मैं आपका कब से इंतजार कर रही थी। वह मुझे अपने बेडरूम मे ले गई वहां पर वह अपने कपड़े उतारने लगी। जब उन्होंने अपने कपड़े उतारे तो मैंने उनकी पैंटी और ब्रा को उतारा। मैंने उनकी पैंटी को उतारते हुए उनसे कहा क्या आपने अपनी चूत के बाल को आज ही साफ किया है? वह कहने लगी मैं आपके इंतजार मे कब से तड़प रही थी तो सोचा अपनी चूत के बाल को साफ कर लेती हूं। वह बिस्तर पर लेट चुकी थी उनका नंगा बदन मेरे सामने था। मै उनके बड़े स्तनों को अपने मुंह मे लेकर उनका बडे अच्छे से रसपान कर रहा था। मुझे उनके स्तनों को चूसने मे बहुत मजा आ रहा था मैंने उनके स्तनों से खून भी निकाल कर रख दिया था और उनके स्तनों की गर्मी मैंने बढ़ा दी थी।

मैंने उनकी चूत के अंदर उंगली डाली तो उन्होंने मेरे कपड़े उतारने शुरु किया। उन्होंने जब मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो वह बड़े अच्छे से लंड को चूसने लगी। उनकी गर्मी बढ़ने लगी थी उन्होंने मुझे कहा मेरी गर्मी बढ़ चुकी है। उन्होंने अपनी चूत को मेरे लंड पर लगाया मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर तक धक्का देते हुए घुसा दिया मेरा मोटा लंड उनकी चूत के अंदर प्रवेश हो चुका था। वह बड़ी तेज चिल्लाने लगी और मुझे कहने लगी आपका लंड बहुत ही ज्यादा मोटा है। मैंने उन्हें कहा आपकी चूत भी कम कमाल की नहीं है। वह मुझे बड़े अच्छे से गर्म कर रही थी उनकी चूतडे मुझसे टकरा रही थी। मैंने कहा मुझे आपकी गांड मारनी है। वह मुझे कहने लगी पहले आप मेरी गर्मी को शांत कर दो उसके बाद आप मेरी गांड मार लेना।  मैंने उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देने शुरू कर दिए।

मैंने उनको घोड़ी बनाकर भी चोदा उनकी गर्मी इस कदर बढ़ चुकी थी कि मैंने अपने वीर्य को उनकी चूत के अंदर गिरा दिया था। मैंने अपने वीर्य को साफ किया मैंने उन्हें कहा अब मुझे बहुत अच्छा लग रहा है उनकी चूत से भी मैंने अपने वीर्य को साफ कर दिया था। उन्होंने मेरे लंड को अपने मुंह मे लेकर चूसा और मेरा लंड तन कर खड़ा हो चुका था। उन्होंने मेरे लंड को तेल से पूरा चिकना बना दिया था और मैंने उनकी गांड पर अपने लंड को लगाया तो मेरा लंड उनकी गांड के छेद के अंदर घुसने लगा। जैसे ही मेरा लंड उनकी गांड के छेद मे घुसा तो वह बड़ी तेजी से चिल्लाने लगी। मैंने कहा मुझे बहुत ही मजा आ गया उसके बाद मे उन्हें बड़ी तेज गति से धक्के मारने लगा मैं जिस गति से उनक धक्के मार रहा था उससे मुझे और भी ज्यादा मजा आ रहा था। मैं उन्हें बहुत देर तक ऐसे ही चोदता रहा उसके बाद मुझे एहसास हुआ उनकी गांड की आग को मैं नहीं झेल पाऊंगा मेरा वीर्य उनकी गांड के अंदर ही गिर चुका था। कविता भाभी को चोद कर मुझे बहुत ही अच्छा लगा और उसके बाद वह मेरा परमानेंट जुगाड़ बन चुकी थी।

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