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मेरी कामुक बीवी बनी प्राइवेट रण्डी-6

blowjob sex kahani रेणु उसके आज्ञाका पालन करते हुवे अपने हाथमे लंड पकड़ कर चाटना शुरू कर दिया. वह अपना जिभ मनोजके लंड पर उपरसे निचे तक फेरने लगी. बिच बिच मे लंडको मुठिमे कसके रगड़ने लगती फिर उसके लंडको मुहमे खुदसे डालकर अपनी मुह उसके लंड पर मारने लगती.

रेणु: देखो आपकि रानी कैसे चाट और चूस रही है लौडा आपका, आप खुस हो ना रज्ज्जा जीईईईईईईईईईइ.

मनोज: चुस्तीजा साली बस ऐसेहि चुस्ती जा. हां लंडके सुपाडे को चाट साली. तु तो बड़ी भारी रण्डी है रे.

रेणु: म्म्मम्म्म्मम्म हां राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ. चाट रही हूँ. मै आपकि हि हूँ राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ. म्म्मम्म्म्मम्म हां राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ अपनी रानी बना के रक्कखो या रण्डीईईइ मै आपकि हि हूँ राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ. उसका हाथ बड़ी तेजीसे मनोजके लंड पर फिसल रहा था.

मनोज: हरामजादी बोल कम लंड पर ध्यान दे, ठिकसे चाट रण्डी.

रेणु: लौंडे के सुपाडेको राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ.

मनोज: हां भोंसड़ी हां चाट.

रेणु: म्म्मम्म्म्मम्म हां राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ. चाट रही हूँ.

मनोज: और चाट आआअह्हह्हह्ह चाटती जा भोंसड़ी. आआअह्हह्हह्ह चाट कसके चूस, चूस भोंसड़ी चूस, आआआआआअह्ह्ह्हह्हह्ह्ह आआआआआअह्ह्ह्हह्हह्ह्ह औत चूस भोंसड़ी.

रेणु समझ गई वह झड़नेके कगार पे है. उसने मनोजके लौड़े को मुहमे लेकर उसपे थोडा मुह मारी फिर मनोजके लौंडे पर ढेर सारा थूक लगाया और उसके लौड़े को कसके मुठिमे भींच कर बड़ी तेजीसे मुठ मारने लगी.

रेणु: हां राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ. लो राजज्ज्ज्जा जीईईईईईईईईईइ लो.

मनोज: रगडटी रह साली हां रगडती रह, आआआआआ आआअह्हह्हह्ह आआअह्हह्हह्ह

रेणु: जीईईईईईईईईईइ जाआआआन्न्न्नूऊऊऊऊऊ

मनोज: आआअह्हह्हह्ह आआअह्हह्हह्ह आआआआआ

रेणु: जीईईईईईईईईईइ जाआआआन्न्न्नूऊऊऊऊऊ जीईईईईईईईईईइ, जीईईईईईईईईईइ राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ

मनोज: बड़ी चोदक्कड है रे तु, आज तेरे बुरको भोंस्डा बना दूंगा और लंड पेलके तेरा गांड फाड़ दूंगा रे रण्डी.
रेणु: तो बना दो ना राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ मै कब मना कर रहि हूँ.

मनोज: हाय्य्य्य भोंसड़ी तु तो संचमुचके रण्डी है रे. रगडटी रह साली हां रगडती रह, आआआआआ आआअह्हह्हह्ह आआअह्हह्हह्ह

रेणु: जीईईईईईईईईईइ राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ … लो राजज्ज्ज्जा जीईईईईईईईईईइ.

मनोज: रगडटी रह साली हां रगडती रह, आआआआआ आआअह्हह्हह्ह आआअह्हह्हह्ह अब छुटने वाला है रे आआअह्हह्हह्ह आआअह्हह्हह्ह और जल्दी जल्दी रगड़ स्स्स्साल्ल्लल्ली

रेणु: जीईईईईईईईईईइ राज्जज्जा जीईईईईईईईईईइ … मेरे राजज्ज्ज्जा जीईईईईईईईईईइ दे दो ना जी मेरे मुह मे, मै पि लुंगी. मार दो पिचकारी अपने लौडा कि मेरे मुह में. आआअह्हह्हह्ह … सीईईइईईईइ … सनम …. जाआआआन्न्न्नूऊऊऊऊऊ … आआअह्हह्हह्ह

मनोज: लो अब छुट रहा है रे आआअह्हह्हह्ह आआअह्हह्हह्ह

और मनोज के लंड से छूट गया पिचकारी. उसका लंड हिल हिल कर चोद रहा था पिचकारी. पहला तेज धार सीधे रेणुके मुहमे गया. लेकिन उसके बाद नेकलने वाला धार रेणुके गाल और पुरी चेहरे पर जंहा तहां फ़ैल गया.

मनोज के लौडासे बूंद बूंद करके अब भी तापक रहा था सफ़ेद मलाई. वह अपना लौंडा रेणुके गाल पर रगड़ रगड़ कर अपने लंड से निकले मलायिको रेणुके पुरे चेहरा पर फैला दिया.

रेणु अपने हाथमे मनोजका लंड थम कर उसके सुपाडे को अपनी होंठों पर रगड़ने लगी. वह बार बार मनोजके लंडको चुम रही थी. अंत मे उसने अपने जीभसे चाट चाटकर मनोजके लंडको साफ किया और उस पर एक सानदार चुम्बन जड दिया.

झड़ने के बाद मनोज निढाल होकर पड़ा था. उसका लंड भी ढीला होगया था. लेकिन रेणुकी प्यास अब भी बरक़रार थी. उसकी बुर अभी मचल रही थी. उसने मनोजके मुरझाये लंडको हिला डूला कर देखा और कटाक्ष करते बोली, ‘क्यूँ जानु आपतो अपने इसी लौडासे चोदते चोदते मुझे मार डालनेका दम भर रहे थे लेकिन आप जिसके ताक़त पर इतना घमण्ड कर रहे थे लगता है आपके उस लौंडा का दम हि निकल गया. आपका बहादुर लौंडा तो ऐसे दुबक कर सो रहा है जैसे यूध के मैदानसे दुश्मनसे शिकस्त खाकर भागा हुवा सिपाही.’

मनोज उसे सबक सिखलाने के गरजसे उस पर झटकर दबोचते हुवे जवाब दिया अब देख साली मै तेरा और तेरी इस बुर और गांडका क्या हाल करता हूँ. तेरी बुरको तो भोंस्डा बनाऊंगा हि साथ साथ तेरे गांडमे हूँक हूँककर इसे पोलो मैदान बना दुन्हा, आज इतना हूँकुंगा कि हप्ता भर तु सीधी तरह चल भी ना सकेगी.

रेणु: ओय्य्य्य मोर्र्र्रे चोद्द्द्दु राज्जज्जा मै जरा मुतकर आआअतीईईईइ हूँ फिर दिखा देना अपने पेल्ल्लल्लू लौंडे का दम.

रेणु बाथ रम के तरफ जाने लगी.

मनोज: क्यूँ अभिसे तेरे इस बुरकि मुत्त्त्तत्त्त्तती निकलने लगी. जा ओभी कर आ नहीतो कहीं इसका मुत्त्ती मेरे लंड परही ना निकल जाए.

कुछ देर बाद वह बाथ रुमसे फ्रेश होकर आयी. उसने अपना बुर और मुह धोकर साफ कर लिया था.
मनोज: चल आजा मैदान मे मेरररि रंन्न्नी.

रेणु बिस्तर पर मनोजके बगलमे बैठ गई. मनोज उसे खीच कर अपने बगलमे लेटा दिया. वह रेणुको अपने छातिसे लगाकर उसे चूमना सुरु किया. रेणुके गाल, होंठ, गर्दन, छाती, चुंची, पेट, नाभि, पेंडु, जांघ और बुर यानि हर अंगको, उसके पुरे शारिरको वह बड़े प्यारसे चुम रहा था. रेणु उसके चुम्बन से मचलने लगी. रेणु मनोजके चुम्बनका बहुत हि कामुक अन्दाज़ मे रेस्पोंसे दे रही थी.

जब चुमते चुमते उसके चुंची पर पहुचता तो वह अपना छाती उठा कर अपनी चुंची उसके मुहमे देनेका प्रयास करती. जब वह उसके पेट और पेंडु को चूमता तो मनोज का सर पकड कर बड़े प्यारसे अपने अंगों पर दबा देती. जब मनोजका मुह उसके बुरके तरफ़ पहुचता तो अपने टांगों को फैलाते हुवे कमर उठा कर अपनी बुर मनोजके मुह पर रगड़ देती.

मनोजका लंड अब फूलने लगा था. यह देख रेणु मचलती हुई मनोजको लिटाकर उसके उपर चढ़ गई और उसे चुमने लगी. रेणु मनोजके होंठों पर एक लाबी चुम्बन लेनेके बाद सिधे उसके छाती पे पहुंच गई और उसके मरदाना निप्पल को चाटने लगी जिसका सीधा असर मनोज पर दिख रहा था.

मै रेणुका लोहा मान गया इस सालीको खुब पता था कि क्या करनेसे मनोज चोदायीके लिए तुरन्त तैयार हो जाएगा. वह मनोजके निप्पल को चुसते हुवे उसके लंडको पकड कर हिलाने लगी. उसका लंड अब पुरा तन चुका था.

रेणु: हाय जानू आपका लौंडा तो फिरसे उछलने लगा.

वह मनोजके लंडको अपनी उन्गलिओं से बड़े प्यारे अंदाजमे चप्पत मार मार कर हिलाते हुवे उसके लौंडाका एक चुम्बन लिया और इस अंदाजमे बोलना शुरू किया कि लग रहा था वह मनोजके लंड से बातें कर रही है, ‘ओय होय मोरे रज्ज्जा जी अब आपको क्या चाहिए. बोलो मेरे रज्ज्जा क्या दूँ आपको. क्या कहा बुर, धत्त आप भी ना रज्ज्जा जी बड़े बेशर्म हो. मुझे तो ऐसी बात से शरम आती है जी. अलेलेलेलेले मेलेएएएए भोलेएएएए लाज्ज्ज्जा लुठोओओओओ नही दूंगी बुल, आवो मेलेएएएए लाज्ज्ज्जा मै देती हूँ बुल बतादो कैसे लोगे बुल रज्ज्जा जी.’

उसकी नखरीली तथा कामुक बात और बात करनेका अंदाज़ हि निराला था. ऐसी बात तो कोई बहुत ट्रेन्ड रण्डी हि कर सकती है.

मनोज ने उसे खिंच कर पलंग के किनारे लाया और खुद खड़ा होकर उसके टांगों के बिच आ गया. मनोजने रेणुकी जांघों को फैलाकर अपने कमर पर चढाते हुवे उसने अपना लंड बुर पर लगा दिया. थोडा झुक कर उसने अपना लंड रेणुके बुर पर टिकाया और दोनो हांथोसे उसकि कमरको कसकर पकड़ते हुवे अपना लंड बड़ी तेज झटके के साथ रेणुके बुर मे ठेल दिया. एकही झटके मे रेणुके बुरको चीरते हुवे करीब चार इंच धास दिया.

रेणु: हाय्यय्य्य राज्ज्ज्जा जीईईईईईईईईईइ जरा प्यारसे डालो ना.

मनोज उसकी बातोंको नज़र अंदाज़ करते हुवे दो तिन धक्का और लगा दिया और उसका पुरा लंड जड़ तक रेणुके बुर मे धस गया. अचानक हुवे हमलेसे वह थोडा तिलमिला जरुर गई थी लेकिन मनोजका इस तरह लंड पेलना उसे बहुत अच्छा लगा था. वह ऐसी चोदाई हि तो चाहती थी ना.

मनोज एक बार रेणुके बुरमे पुरा लौडा हूँक देनेके बाद नॉनस्टॉप चोदाई चालु कर दिया. वह रेणुके बुरमे अपना लंड दनादन पेलने लगा. रेनुको एक बहुत हि अनोखी अनुभूति होने लगी. और मनोजको भरपुर सहयोग देने लगी जिससे दोनोको चुदायिका बडा अनोखा आनंद मिल रहा था.

कुछ देरके मस्त चुदाई के बाद मनोजने रेणुको खीच कर पलंग के और किनारे खिंच लिया और उसके चुतड के निचे तकिया लगा दिया. रेणुके टांगों को उठाकर उसके पेटके तरफ मोड़ दिया और अपना एक पैर पलंग पर रखते हुवे अपना लंड रेणुके बुर पे टिका कर गचा गच पेलने लगा. वह बड़ी तेज़ गति से अपना लंड रेणुके बुर मे पेल रहा था. उसका लंड सटा सट रेणुके बुर मे जा रहा था.

अब उसने रेणुके टांगों को फैला दिया, अपने लंड पर ढेर सारा ठुक लगाया और लंडको रेणुके गांड पर रखकर अन्दर धकेलने लगा.

रेणु: नही जाआआआन्न्न्नूऊऊऊऊऊ इसमें मत डालो फट जाएगी, मैंने इसमें पहले कभी नही लिया है.

मनोज रेणुके गांड मे लंड़का सुपाडा ठेलते हुवे: कभी नही लिया तो अब लेकर देख.

रेणु: नही राज्ज्ज्जा नही इसे छोड़ दो प्लीज.

मनोज: चल थोडा फैला कर रख आरामसे से डालूँगा.

रेणु: नही जाआआआन्न्न्नूऊऊऊऊऊ आपका इतना मोटा है कि डर लग रहा है प्लीज छोड़ दो ना.

मनोज: प्यारसे डालने दोगी तो आरामसे करूंगा और ज्यादा नखरा दिखयी तो ऐसे कस के पेलुंगा के संच मुच फट जाएगी. चल नखरे मत दिखा फैला अपनी गांड.

मनोजने अपने हाथसे लंड पकड़ कर उसके गांड मे धीरे धीरे घुसाने लगा. उसके मोटे लंड़का बडासा सुपाडा बार बार फिसलकर गांड से अलग हो जाता था. उसने रेणुके गांड पर थूक लगाकर अपनि उंगली उसके गांड मे डालकर अन्दर मिलाने लगा.

वह अपना लंड रेणुके बुरमे वापस डाल कर पांच सात बार दनादन अन्दर बाहर किया और अचानक लंड बुरसे निकाल पुरा निशाना साध कर रेणु के गांड मे डाल दिया. ऐसा वार कि एकही बार मे करीब तिन इंच अन्दर धास दिया.

रेणु: आह्हह्हह्हह्हह मै मरररर गई अबे साला भोसड़ी के निकाल दे रे.

लेकिन मनोज पे उसकी गांड मारने का ऐसा जुनून स्वर था कि रेणु के चिल्लानेका परवाह ना करते हुवे दनादन ठाप पे ठाप मारते हुवे अपना पुरा लंड गांड मे उतार कर हि दम लिया. वह लंड गांड मे डाले हुवे थोड़ी देरके लिए रुका तो रेणुको कुछ राहत महसूस हुवा.

मनोज: देख तु खामखा डर रही थी, ना तेरी गांड फटी ना तु मरी और पुरा लंड तेरे गांड मे दाखिल हो गया. बोल अब कैसा लग रहा है चालु करूँ अब नयी मशीन.

रेणु: अरे साले जब कोई तेरे गांड मे इतना मोटा खूंटा ठोकेगा तब तुझे पता चलेगा. मेरे गांड मे बहुत जलन हो रही है अब तो निकल दे साला.

मनोज: लो निकल देता हु. कहते हुवे बड़ी धीमी गतिसे वह उसके गांड मे से अपना लंड बाहर खिंचने लगा लेकिन दो तिहाई लंड बाहर आते हि अचानक फिर पुरा ताक़त लगाकर अन्दर धास दिया जिसके लिए रेणु तैयार नही थी सो फिर जोरसे चिल्ला पड़ी.

रेणु: उईईईईई मा मर गयीईईईईईई.

अब मनोज उसे पुचकारते हुवे: बस अब सिर्फ दो मिनट रानी, उसके बाद अगर तु कहेगी तो छोड दूंगा मेरी जान, बस अब सिर्फ दो मिनट.

रेणुको दिलासा देते हुवे वह हौले हौले उसका गांड मारने लगा. दश पन्द्रह बार लंड अन्दर बाहर करने के बाद वह धीरे धीरे स्पीड बढाता गया. रेणुकी गांड अब उसके लौंडा को एडजस्ट कर लि थी. उसके गांड कि जलन भी अब काम होने लगि थी और उसे बेहतर महूस हो रहा था.

रेणु कई ब्लू फ़िल्ममे गांड मारने का बड़ा विगरस दृश्य देख चुकी थी. उसे भी वैसे हि जम कर गांड मरवाने कि चाह तो थी हि लेकिन उसे इसका सौभाग्य आज तक नही मिला था. आज मौका मिला था तो वह भी इसका पुरा आनंद लेना चाहती थी.

उसे अब अपने गांड मे घुसते निकलते मनोजके मोटा लंड अच्छा लगने लगा और वह उसे रेस्पोंसे देने लगी. मनोज तो पहलेसे हि गांड मारनेका एक्सपर्ट था. वह कई बार अपने भाभी मेनुका गांड मार चुका था. रेणुको रेस्पोंस करते देख गांड मे लंड पेल्नेका स्पीड बढाता गया.

अब उसका लंड बड़ी तेज़ीसे रेणु के गांड मे सटासट अन्दर बाहर हो रहा था. अपनी गांड मनोजके लंड पर ठेल ठेल कर वह उसका स्वागत करने लगी. आनंद और उत्साह से अब दोनो इस खेल मे जुट गए और सुरु हुवा गांड और लंड का घमासान युध. एक ऐसा युध जिसमे मारनेवाला और मरवानेवालि दोनोको बराबर आनन्द मिल रहा था.

मनोज: अब कैसा लग रहा है जानम.

रेणु: अब ठीक है.

मनोज: मज़ा आ रहा है.

रेणु: हूँ.

मनोज: अब हर रोज़ दोगी.

रेणु: ले लेना मै मना थोड़े हि करुँगी.

मनोज: क्या दोगी.

रेणु: तुम जो चाहो.

मनोज: तु खुल कर बता ना क्या देगी.

रेणु: धत्त्त मुझे शरम आती है.

मनोज: अच्छा, बुर चोद्वाने और गांड मरवाने मे शर्म नही आती.

रेणु: छोडो भी ना.

मनोज: जा छोड़ दिया. कहते हुवे उसने अपना लंड उसके गांड से निकल लिया.

रेणु: क्यों निकाल लिए डालो ना.

मनोज: क्या डालूं.

रेणु: लौंडा.

मनोज: कहां डालूं.

रेणु: गांड मे.

मनोज: अब उलटी होकर झुक जा गांड मारने और मरवाने का असली मज़ा पिछेसे डालने मे हि आता है.
रेणु आज्ञा पालन करते तुरन्त उलटी होकर झुकते हुवे अपनि गांड उसके तरफ कर दी.

रेणु: अब ठीक है.

मनोज: ठीक है थोडा टांग फैला ताकि गांड चौड़ी हो जाए.

रेणु टांग फैला दी. मनोजने पिछेसे उसके गांड मे लंड धास दिया. अब वह रेणुके गांड मे कचाकच अपना लंड ठोकने लगा. रेणु कमर हिला हिलाकर अपने गांड मे उसका लंड लेने लगी. मनोज उसके गांड मे घचाघच लंड हुंकने लगा.

रेणुकि चुंचियां जो निचे के तरफ लटक रही थी वह बड़ी जोर जोरसे हिलने लगी. मनोज हचाहाच रेणुके गांड मे पेले जा रहा था. वह भी गांड हिला हिलाकर पेलवा रही थी. मनोजका स्पीड तेज़ और तेज होता गया.

काफी देर तक मनोज उसका गांड मरता रहा लेकिन उसका लंड झड्नेका नाम हि नही ले रहा था, झडे भी कैसे अब तक दो बार झट जो चुका था.

मनोज: अब जरा उपरसे आजाओ.

मनोज बिस्तर पे लेट गया. रेणु उपरसे चढ़ कर अपने हाथसे पकड़ कर लंड को गांड पे लगाई और दबा दी कमर. मनोजका लंड गपसे उसके गांड मे समा गया. अब रेणु उपरसे झूल झूलकर अपने गांड मे मनोजका लंड लेने लगी. उसकी चुंचियां मनोजके सामने बड़ी मादक ढंगसे हिल रहीं थीं. दोनोका ज़ोस बढ़ता जा रहा था. मनोज निचेसे चुतड उठा उठाकर उसके गांड मे लौंडा ठेल रहा था.

रेणु का गांड मारते मारते अब वह झडनेके कगार पे आगया तो उसने रेनुको अपने उपरसे उतार कर बिस्तर पे बिठा दिया और उसके तरफ घुम कर अपनेही हाथसे जोर जोरका झटका देकर अपना लंड रगड़ने लगा. अगले हि पल उसके लंड ने रेणुकी चुंचियों पर पिचकारी छोड़ दिया.

मनोज और रेणुकी चोदाई पुरी होनेके बाद वे बाथरूम मे फ्रेश होने चले गए. मै भी कैमरा छुपाया और चुपकेसे घरके पिछले दरवाजे से बाहर निकल गया. थोड़ी देर इधर उधर घुमनेके बाद मै घर आकर कॉल बेल बजाया तो रेणु ने आकर दरवाजा खोला. वह बहुत खुस और खिली खिलिसी लग रही थी.

मैंने घरमे घुसते हुवे उसकी चुंचिपे चिकोटी काटते हुवे पुछा, ‘बड़ी खुस लग रही हो, बतावो तो क्या क्या और कैसे कैसे हुवा.’

रेणु, ‘होना क्या था वह आनेके बाद मेरे इर्द गिर्द चक्कर कट रहा था. मैंने भी उसे हरी झंडी दिखा दी है. अभी खा पीकर आराम कर रहा है, बस.’

उसने इतनि जबरदस्त चुदायिकी बातों को छुपा लिया. मै सोंचने लगा साली कितनी चालु है. पहले हि दिन इतना जम कर चुद चुकी है लेकिन कितनी सफायिसे सारी बातोंको टाल गई. पता नही साली रण्डी ऐसेही छुप छुप कर कितने लोगों से चुदी होगी.

अपने शकको उसपर इजहार नाकरते हुवे मैंने धीमी आवाजमे पूछा, ‘तो आजका दिन तूने ऐसे हि बेकार कर दिया?’

रेणु, ‘अरे नही मोरे राजा, मैंने उसे पागल बना दिया है. स्टेशन पर चुंचियोंका दीदार और रास्तेमे चुंचियों का स्पर्स ऐसे कराया है कि यदि उसका बस चलता और लोकलाज नही होता तो घर पहुचते हि पटक कर मेरे बुरमे लंड पेल देता. लेकिन किसी तरह अपने आपको अब तक संभाले हुवे है. मै चाहती हूँ कि उसे थोडा और तडपाऊँ ताकि जब मौका मिले तो पुरे जोश खरोस के साथ दमदार तरीकेसे चोदे.’

मै मनही मन उसकी कमीनगी के लिए गाली बक रहा था, ‘रण्डी साली कितनी कामिनी है ये.’ लेकिन मै अपनी भावनाओं और मनमे उठते हलचल को छुपाये रक्खा.

मै, ‘तुम्हारा अगला प्लान क्या है?’

रेणु, ‘अब उसे और बेक़रार करना.’

मै, ‘कैसे.’

रेणु, ‘मै उसे किसी बहानेसे अपनी बुर दिखाउंगी और फिर तो वह मुझे चोदनेके लिए पागल हो जाएगा.’

मै, ‘बेचारेको क्यों इतना सता रही हो. तुझे चुदवाना हि है और वह भी तुम्हे चोदना चाहता है तो क्यों नही चुदवा लेती हो.’

रेणु, ‘कहीं तुम्हे मुझे उससे चुदवाते देखनेकी जल्दबादी तो नही है?’

मै, ‘तुम जो उचित समझो वही करो.’ मुझे पुरा बिस्वास हो गया था कि यह साली पुरी रण्डी है.

मै बिस्तर पर लेट गया था और वह मेरे बगलमे बैठी हुई थी. हम इधर उधरकी बातें कर रहे थे. मै रेणुके बालोंको सहला रहा था और वह मेरे एक हाथकी उँगलियों मे अपनी उंगलिया पिरोकर उसे दबा रही थी. तभी मनोज अपने कमरेसे निकलते हुवे पुछा, ‘भैया आ गए क्या.’

मै, ‘हां मै अगया हूँ. आवो तुम कैसे हो. कोई परेसानी तो नही हुई.’

वह कमरे मे दाखिल हुवा पर हमें इस पोजीशन मे देख दरवाज़े पर हि रुक गया.

रेणु, ‘रुक क्यों गए, अन्दर आजावो.’ मै सीधे रेणुका चेहरा नही देख पा रहा था लेकिन सामने ड्रेसिंग टेबल के मिरर मे देखा रेणु अपनी बात पुरा करते हुवे उसे आँख मर दी थी.

वह मेरे पास पहुंच कर पैर छूकर प्रणाम किया और ड्रेसिंग टेबल के पासके सोफे पर बैठ गया. मै उसे सामने से देख रहा था और रेणुको मिरर मे. अनजाने मे हि अपने आप बड़ा अच्छा सेटिंग मिल गया था. हम इधर उधरकी घर गृहस्ती वगैरहकी बातें कर रहे थे. रेणु उठकर किचेन मे गई और तिन ग्लासों मे जूस लेकर आई. हम तीनो एक एक ग्लास लेकर शीप करने लगे. रेणु फिरसे पलंग पर मेरे बगलमे बैठ गई लेकिन इस बार वह तकियेके सहारे मेरे सिरहानेके तरफ बैठी थी.

थोड़ी देर बाद रेणु अपना पैर थोडा सा मोड़ कर हलकासा खोली. उसकी साड़ी निचे थोडासा खुल गया जिससे उसकी गोरी पिन्लियाँ दिखने लगी थी. मै मिरर मे देख रहा था. मनोज मेरी नज़र बचा कर बार बार उसकी पिंडलियों को निहार रहा था. हमारा जूस ख़तम हो गाया. रेणु उठी और खाली ग्लास लेजाकर किचन मे रख कर वापस आ फिरसे बिस्तर पर चढ़ कर दिवार के तरफ तकिया लगाकर पीठ टेकते हुवे अपनी पैर मोड़ कर बैठ गई. इस बार वह मेरे पीछे बैठी थी. मै मनोजके तरफ घूमकर बैठा था. रेणुकी हर हरकत आईनेमे मै साफ साफ देख रहा था.

वह अपना पैर मोड़ कर तकिया के सहारे बैठी थी. लापरवाहिसे बैठनेके कारण उसकी साड़ी निचे लटक रही थी. साड़ी मे गैप सा बन गया था जिससे उसकी पुरी पिंडली और घुटनेके उपर जान्घोंका कुछ हिस्सा दिख रहा था. उसकी साड़ी का आँचल एक चुंची से हटा हुवा था. काफी सेक्सी पोज था उसका. मनोज नजरें छुपाकर उसे बार बार देख रहा था. मनोजके पैंट मे उसका लंड फूलने लगा था.

थोड़ी देर बाद रेणु ने अपना पैर थोडा और समेट लिया जिससे उसके साड़ी के अन्दरका गैप थोडा और बढ़ गया. वह अपने दोनो पैरोंको सटाकर रखी थी. इस वजहसे उसकी चिकनी, मुलायम, मोटी जांघे साइड के तरफसे थोडा थोडा दिख रहा था. उसकी अंग प्रदर्सन कि इस अदासे मेरा लंड खड़ा होने लगा था तो आप मनोजके हालत का अंदाज़ा आसानीसे लगा सकते हैं. रेणुके अंग प्रदर्सन देख देख मनोजका लंड पैंट के अन्दर हलके हलके ठोकर मारने लगा था. मै बारी बारिसे दोनोको देख रहा था लेकिन इस तरह कि उन्हें यह अहसास ना हो कि मै उनके हरकतोंको देख रहा हूँ.

अब रेणुने अपने पैरोंको थोडा सा इस तरीकेसे फैला दिया कि उसकी साड़ी का उपरी हिस्सा थोडा और उपर सरक गया. निचला हिस्सा तो पहलेसे हि लटका हुवा था हि. पैर खोलनेसे दोनो जांघे अन्दरके साइडसे दिखने लगे थे साथ हि साथ उसकी चुतका भी हल्का हल्का सा दीदार होने लगा था. मेरा मन इस कदर बेचैन होने लगाकि जी मे आता था बस पकडके ठेल दूँ, अपना लौड़ा उसके चुत मे. अपने पैंट के उभरको छुपानेके लिए मनोजने अपने दोनो पैरोंको एक दुसरे पर रखते हुवे हांथों को मोड़ कर लंडके उपर रख लिया.

रेणु साली बहुत चालु रण्डी लग रही थी, इस वक़्त. अपने पतीके नजरोंसे बचते हुवे कैसे अपने यारको चुत दिखा रही थी.

थोड़ी देर बाद वह अपने पैरोंको हौले हौले खोलने और सटाने लगी जिससे उसकी चुत बार बार दिख रही थी. ऐसा करते करते उसने अपने जांघों को और ज्यादा फैलाते हुवे चुतडको थोडा आगे खिसका दीया. अब उसकी चुत बिकुल साफ दिखने लगी थी. उसके मांसल चुत गज़बकी लग रही थी. इतने से भी इस भोंसड़ी को करार कहां मिलने वाला था. वह अपने चुतको धीरे धीरे सिंकोड़ने और फ़ैलाने लगी. उसकी चुतका नृत्य देख मेरा लौड़ा बेकाबू होते जा रहा था. मनोजके चेहरेका रंग भी अब बदल कर लाल होने लगा था और वह लम्बी सांसें खीचने लगा था.

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