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मुझ पर वीर्य वर्षा कर डाली

Antarvasna, hindi sex stories: मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती हूं मैं मुंबई की रहने वाली एक 26 वर्षीय लड़की हूं मैं अपने सपनों को साकार करने के लिए हर कोशिश करती हूं जिससे कि मेरे सपने पूरे हो रहे हैं। मेरे माता पिता ने मुझे कभी भी किसी बात के लिए आज तक मना नहीं किया मेरे पिताजी मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं और मेरी मां भी एक प्राइवेट स्कूल में प्रिंसिपल के पद पर हैं। मेरे बड़े भैया जिनकी शादी अभी कुछ समय पहले ही हुई है और मेरी भाभी जो कि घर का काम संभालती हैं सब लोग बहुत अच्छे है। मैं हर सुबह अपने घर से निकल जाया करती मेरी जिंदगी में सब कुछ सामान्य चल रहा था कुछ भी नया नहीं हो रहा था परंतु एक दिन जब मैं ऑफिस में गई तो हमारे ऑफिस में उस दिन हमारे बॉस ने एक मीटिंग रखी जिसमें कि उन्होंने हमारे ऑफिस में काम करने वाले जितने भी स्टाफ है उन्हें पार्टी देने की बात कही।

अगले ही दिन उन्होंने हमें पार्टी में बुलाया हम लोग पार्टी में गए तो वहां पर माहौल बड़ा ही अच्छा था और जब हमारे साथ काम करने वाले दोस्तों ने ठुमके लगाए तो सब खुश हो गये। हम लोग काफी देर तक वहां पर रुके अब मुझे घर आने के लिए देर हो रही थी इसलिए मैं टैक्सी लेकर घर आ रही थी लेकिन रास्ते में टैक्सी खराब हो गई और फिर मैं दूसरी टैक्सी का इंतजार करने लगी। वहां पर काफी सुनसान जगह थी और मुझे बहुत डर भी लग रहा था लेकिन वहां से कोई और दूसरी टैक्सी वाला आता हुआ दिखाई नहीं दे रहा था तभी आगे से एक कार आती हुई दिखाई दी। मैंने जब उस कार को हाथ दिया तो उसमें एक लड़का बैठा हुआ था वह मेरी तरफ देखने लगा मैंने उसे बताया कि मैं अभी एक पार्टी से आ रही थी और रास्ते में कार खराब हो गई तो क्या आप मुझे मेरे घर तक छोड़ देंगे। उस लड़के ने कहा कि ठीक है मैं आपको आपके घर तक छोड़ देता हूं अब मैं कार में बैठ चुकी थी और जब मैं कार में बैठी तो मैंने उस लड़के से उसका नाम पूछा उसने मुझे अपना नाम बताया और कहा कि मेरा नाम दीपक है।

मैंने भी उसे अपना परिचय दिया वह मुझसे मेरे बारे में पूछने लगा मैंने उससे काफी देर तक बात की और जब मेरा घर आ गया तो मैंने उससे कहा कि आपने मुझे मेरे घर तक छोड़ा उसके लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद। अब मैं घर पहुंच चुकी थी मेरी मां बहुत ज्यादा चिंतित थी और वह कहने लगी कि सुहानी बेटा तुम्हारा नंबर लग ही नहीं रहा था मैंने मां से कहा कि मां मेरा फोन स्विच ऑफ हो गया था इस वजह से मेरा नंबर नहीं लग रहा होगा। मैं अब आराम कर रही थी लेकिन मेरे दिमाग में बार-बार दीपक का चेहरा आ रहा था मुझे समझ नहीं आ रहा था कि ऐसा मेरे साथ क्यों हो रहा है। दीपक का चेहरा मेरी आंखों के सामने बार बार घूम रहा था मुझे ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगा कि जैसे हम लोग पहली ही बार मिल रहे होंगे क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से बड़ी खुलकर बात की मुझे पता ही नहीं चला कि कब मुझे नींद आ गई। अगले दिन से मैं अपने ऑफिस जाने लगी थी अब वही जिंदगी दोबारा से चलने लगी थी लेकिन एक दिन मुझे दीपक दिखाई दिया दीपक से जब मैंने बात की तो मुझे बहुत अच्छा लगा और दीपक भी मुझसे बात कर के अच्छा महसूस कर रहा था। मैं और दीपक एक दूसरे से बात कर रहे थे तभी दीपक ने मुझे कहा कि सुहानी मुझे अभी कहीं जाना है दीपक उस दिन बड़ी जल्दी में नजर आ रहा था इसलिए दीपक चला गया। मैंने दीपक का नंबर ले लिया था मैंने जब दीपक का नंबर लिया तो उसके बाद हम दोनों की फोन के माध्यम से बात होने लगी हम दोनों एक दूसरे से फोन पर बातें किया करते। दीपक और मैंने एक दिन मिलने का फैसला किया हम दोनों कॉफी शॉप में मिले और जब वहां पर हम दोनों बैठ कर एक दूसरे के बारे में जानने की कोशिश कर रहे थे तभी दीपक के किसी दोस्त ने हमें देखा तो वह हमारे पास आकर बैठे। दीपक ने मेरा परिचय कराया और उन्होंने दीपक से कहा क्या यह आपकी गर्लफ्रेंड है तो दीपक मुस्कुराने लगे दीपक ने कहा कि नहीं यह सुहानी है और मेरी अच्छी दोस्त हैं। वह थोड़ी देर हमारे साथ बैठे और उसके बाद वह चले गए लेकिन कहीं न कहीं दीपक को भी एहसास हो चुका था कि उसके दिल में मेरे लिए कुछ तो चल रहा है। हम दोनों वहां से अब घर आ चुके थे लेकिन हम दोनों की फोन पर अक्सर बातें हुआ करती थी और जब भी हम दोनों की बातें होती तो मुझे बहुत अच्छा लगता।

मैं और दीपक एक दूसरे के साथ बहुत खुश थे और हम लोग अक्सर एक दूसरे से मिलने की पूरी कोशिश किया करते। जब भी हम लोग एक दूसरे से मिलते तो मुझे बहुत ही अच्छा लगता और मैं बहुत खुश हो जाया करती। मेरी जिंदगी में सब कुछ अच्छा चल रहा था और मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे अब दीपक के मेरे जीवन में आने से सब कुछ बदलता हुआ नजर आ रहा है इसी बीच मेरा प्रमोशन भी हो गया। एक दिन मैं दीपक से बात कर रही थी कि तभी भाभी ने मुझे देख लिया और भाभी मुझसे कहने लगी कि सुहानी तुम किस से बात कर रही थी तो मैंने भाभी को दीपक के बारे में बताया। भाभी भी दीपक के बारे में जानने के लिए बड़ी उत्सुक थी और उन्होंने मुझसे दीपक के बारे में पूछा भाभी चाहती थी कि वह दीपक से मिले। मैंने भाभी को पूरी बात बताई और कहा कि मैं दीपक के साथ अपना जीवन बिताना चाहती हूं और दीपक मुझे बहुत अच्छा लगता है। भाभी को भी इस बात से कोई भी आपत्ति नहीं थी मैं और भाभी एक दूसरे से खुलकर इस बारे में बातें किया करते हैं। मैंने जब भाभी से इस बारे में कहा कि मैं आपको दीपक से जरूर मिलाऊंगी तो भाभी ने कहा ठीक है तुम मुझे दीपक से जरूर मिलाना।

कुछ ही समय बाद मैंने भाभी को दीपक से मिलवा दिया जब मैंने भाभी को दीपक से मिलवाया तो भाभी बड़ी खुश नजर आ रही थी और उन्होंने मुझे कहा कि दीपक बहुत ही अच्छा लड़का है। दीपक भी भाभी से मिलकर खुश था जब कुछ दिनों बाद हम लोगों की मुलाकात हुई तो दीपक ने मुझसे कहा कि मैं कुछ दिनों के लिए बाहर जा रहा हूं तो तुमसे मुलाकात नहीं हो पाएगी। मैंने दीपक से कहा ठीक है दीपक, और दीपक कुछ दिनों के लिए बाहर चले गया जब दीपक बाहर गया तो उसके बाद मेरी दीपक से फोन पर भी बात नहीं हो पा रही थी मेरा मन काम पर भी नहीं लग रहा था मैं बहुत ज्यादा चिंतित नजर आ रही थी। मेरे और दीपक की बीच बहुत ही अच्छे संबंध बन चुके थे जिससे कि मैं दीपक के बिना एक पल भी नहीं रह सकती थी। दीपक जब काफी दिनों बाद मुझे मिला तो मैंने दीपक से कहा तुमसे मेरी बात ही नहीं हो पा रही थी और तुम मेरा फोन भी काट रहे थे। दीपक ने मुझे कहा कि मैं बिजी था इसलिए मैं तुम्हारा फोन नही उठा पाया सुहानी। मैंने दीपक को गले लगा लिया मैंने जब दीपक को गले लगाया तो वह मुझे कहने लगा सुहानी क्या हुआ तुम इतनी ज्यादा भावुक हो गई। मैंने दीपक को कहा मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही थी मैं तुम्हारे बिना बिल्कुल भी नहीं रह सकती। मैं अपने दिल पर बिल्कुल भी काबू ना कर सकी मुझे पता ही नहीं चला कि कब दीपक और मैं इतने नजदीक आ गए दीपक ने भी मुझे अपने गले लगा लिया लेकिन हम दोनों के अंदर से बढ़ती हुई गर्मी को दीपक बंद कमरे मटाना चाहते थे और दीपक मुझे अपने साथ अपने घर पर ले गया। उस दिन दीपक के घर पर कोई भी नहीं था जब मैं दीपक के घर गई दीपक ने मुझे अपनी बाहों में ले लिया वह मेरे होठों को चूमने लगा उसने मेरे होठों को बहुत देर तक चूमा जब उसने मेरे कपड़े उतारे और मेरी पेंटी ब्रा उतार कर उसने मुझे बिस्तर पर नग्न अवस्था में लेटा दिया तो मैंने दीपक से कहा मुझे यह सब अच्छा नहीं लग रहा। मैं भी अपने आपको रोक नहीं पाई थी जैसे ही दीपक ने मेरे स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो मेरी चूत से बहुत ज्यादा पानी बाहर की तरफ को निकलने लगा था मेरी चूत के अंदर से निकलते हुए पानी को दीपक ने अपने मुंह में लेकर चाटना शुरू किया।

दीपक भी अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पा रहा था उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाला तो मेरी चूत से खून निकलने लगा पहली बार ही मैंने किसी के लंड को अपनी चूत मे लिया था इसलिए मुझे बड़ा मजा आ रहा था। दीपक मुझे अच्छे से चोद रहा था वह मेरी चूत मारता ही जा रहा था उसने मेरी चूत के मजे बहुत देर तक लिए। जब उसके लंड से वीर्य बाहर की तरफ को निकलने लगा था तो दीपक ने मुझे कहा कि मेरा वीर्य निकलने वाला है दीपक ने अपने वीर्य को मेरी चूत मे ही गिरा दिया। मैंने दीपक से कहा कहीं कुछ होगा तो नहीं? दीपक कहने लगा सुहानी तुम घबराओ मत में हमेशा तुम्हारे साथ खड़ा हूं। हम दोनो बिस्तर में लेटे हुए थे थोड़े ही देर बाद हम दोनों के अंदर की गर्मी दोबारा से जाग उठी दीपक ने मुझसे कहा कि तुम मेरे लंड को अपने मुंह में ले लो मैंने भी हिम्मत करते हुए दीपक लंड को अपने मुंह में ले लिया पहली मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था लेकिन अब मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा था।

मैं दीपक के लंड को अपने मुंह में लेकर चूस रही थी जिस प्रकार से मै उसके लंड को चूस रही थी उससे मुझे मज़ा आ रहा था और दीपक को भी बड़ा आनंद आता अब दीपक बिल्कुल भी रह नहीं पा रहा था। मैंने दीपक से कहा दीपक तुम अपने लंड को मेरी चूत मे डाल दो दीपक ने मुझे डॉगी स्टाइल बनाते हुए मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो उसका मोटा लंड मेरी चूत में प्रवेश हो चुका था अभी भी मेरी चूत से दीपक का वीर्य बाहर को टपक रहा था। दीपक ने मुझे बड़ी तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए थे वह जिस प्रकार से मुझे धक्के मार रहा था उससे मेरा बदन हिलने लगता मैं पूरी तरीके से दीपक के काबू में थी मैं अपने मुंह से सिसकियां ले रही थी और दीपक मुझे बड़ी तेजी से चोद रहा था। उसने मुझे बहुत देर तक चोदा उसने अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर गिरा दिया। हम दोनों के बीच हुआ पहला सेक्स बड़ा ही मजेदार रहा मेरे दिल में आज तक पहली बार हुए सेक्स का ख्याल हमेशा आता है और आज हम दोनों एक दूसरे के साथ बड़े ही अच्छे से समय बिताते हैं और दीपक मेरा ध्यान बहुत अच्छे से रखता है।

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