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नौकरी के साथ चुदाई का इनाम

antarvasna sex stories मैं बिहार प्रान्त के हाजीपुर जिले का रहने वाला हूँ। उम्र 25 साल होगी … काम के सिलसिले में लुधियाना अक्सर जाना रहता था ! वहीं कुकरेजा साहब को नौकर की ज़रूरत थी तो सोचा क्यों न मैं ही लग जाऊँ ! साहब का बड़ा कारोबार था !

वो अक्सर विलायत में रहते थे और मेमसाहब हमेशा पार्टी क्लब में रहती थी ! उनकी एक बेटी थी .. बेटी क्या मानो अप्सरा .. जो जन्नत से उतरी हो …

हम प्यार से छोटी मालकिन कहते थे।

छोटी मालकिन हमेशा टीवी काम्पुटरवा में लगी रहती थी …. ..और मैं अक्सर छोटी मालकिन का छुप छुप कर दीदार किया करता था …

छोटी मालकिन जूस पी लो….

ओह्ह हो ! राजू सोने दे ना…

छोटी मालकिन हमेशा बड़ी बेखबर होकर सोती थी …

उस दिन भी … उनकी नायटी थोड़ी ऊपर थी और उनकी लातों के बीच गांड के दरार बिलकुल साफ़ नज़र आ रही थी, शायद अन्दर पैंटी नहीं पहनी है … उनकी गोरी गोरी .. भरी भरी जांघें .. उनकी गोल गोल अध-खिली चूचियाँ ..

ओह यह अमीरों के जिस्म भी ना ! मानो क़यामत .. वरना हमरा गाँव की लड़कियाँ .. भूरी-काली टांगें ! वो भी बालदार .. छोटी चूची.. मुरझाई सी गांड … राम राम लंड का इन्सल्ट हो समझो ..

राजू ! नहाने का पानी दे दिया ..?

अभी देता हूँ मेम … कहकर मैं गरम पानी बाल्टी में ले जाने लगा … शुक्र है वो क्या कहत है गीजर ख़राब था …

मैंने देखा कि मेम काली ब्रा और पैंटी में बाथरूम में इन्तज़ार कर रही थी …

उनकी पतली पेट में वोह नाभि के पास जो तिल था मानो काला हीरा .. वो बार बार अपने चूची चू रही थी ..

मेरा लंड लुंगी के बाहर झांकना चाह रहा था …

चिकनी पीठ मानो मक्खन जैसे …

घुटने और पिंडलियाँ … यौवन की मलिका .. कामसूत्र की पहेली … लंड का पहला रस छुट गया मेरा !

राजू ! बोलकर अन्दर आया करो .. ! कहकर मेम ने तौलिया ओढ़ लिया।

जाओ अब ..! बेवकूफ कहीं का …!

मैं चुपचाप अपने कमरे में चला गया … मैंने अपना लंड निकला … खड़ा था और रस टपक रहा था।

चल बैठ जा ..मेरे लंड, तू गरीब है .. तेरे नसीब में वो कहाँ ??

मेम नहा कर बाहर आई .. उजले कपड़ों में छोटी मालकिन का गीला गीला जिस्म साफ़ नज़र आ रहा था .. उनकी वो खुशबू पागल बना दे .. वो पंजाबी छरहरी बदन !

राजू मेरा जूस ??

जूस पी पी कर उनके चूची भी जूस से भर गई थी …

साली को अपने बॉय फ्रेंड से मिलना था आज …

दोपहर का समय था .. बड़ी मेम बाहर गई थी .. तभी छोटी मालकिन का बॉयफ्रेंड आया ..

लम्बा चौड़ा .. पूरा पंजाबी .. चौड़ी छाती .. पता नहीं हरामी का लंड कितना बड़ा होगा ??

मेरी नाजुक सी मेम को इतना दर्द देता होगा ..

कहाँ मेरा कद .. काले कावा की तरह ..

कमरे में क्या हुआ पता नहीं पर वो लौंडा चला गया और मेम जोर जोर से रोने लगी ..

मेम क्या हुआ ?? मैं डरते हुए पूछा।

तभी मेम मुझसे चिपक कर रोने लगी ..

मेम की मुलायम चूची मुझे चुभने लगी ..

उनकी बुर को मेरा लौड़ा चूमने को तैयार होने होने लगा…

उनकी गुलाबी होंठ ने मेरे होंठो को चूमा …

राजू मुझसे कोई प्यार नहीं करता … मुझे कभी प्यार नहीं मिला ??

मेरे तो परखचे उड़ गए…

मेम …

राजू मुझे प्यार करो ना …. लव मी..

ओह ! शायद अमीरजादे ने मेरी मेम का दिल तोड़ दिया …

मैंने अपनी मेम को बेड पर लेटा दिया और उनकी मस्त मस्त चूची दबाने लगा …

ओह्ह राजू धीरे धीरे से करो ..

मैंने मेम की सलवार को खोला और फिर क्या छोटी मालकिन नंगी लेट गई .. मैंने अपना लुंगी गंजी खोली और कूद पड़ा मैदान ऐ ज़ंग में …

मैंने जांघें फैलाई और देसी कुते के तरह विदेसी मेम को नोचने लगा ..

मैं उसकी गांड की छेद में अपने जीभ अन्दर बाहर करने लगा .. वो मस्त हो रही थी और बुर का पानी छुट रहा था .. अहह यह मत करो मेरी बम्स गन्दी है !

नहीं छोटी मालकिन ! इससे तो खुस्बो आवत है …

फिर उसके छरहरी बदन में अपना लौड़ा रगड़ने लगा .. मेम जी आप भी इसे चूसो न..

मैंने उसके लाख मना करने पर अपने लंड उसके गरम होंठों के अन्दर ठूंस दिया- अहह मेम और चूसो न ..

बेचारी को शायद यह पसंद नहीं था …

फिर उसकी मचलती हुई बुर में अपना लौड़ा रखा और एक ही हचके में … फुस्स अन्दर घुस गया बिडू..

मेम चीख पड़ी… उई मम्मा उई आह अह … राजू नहीं राजू अहह

मैंने मेम की टांगों को अपने कंधो पर रखा और दे दना दन चोदने लगा .. उसकी बुर फट गई ..

बुर के होंठो पर लाली छा गई ..

अई जानवर कहीं के …

उसके भोसड़े तक मेरा मेरा टोपा तांडव करने लगा ..

अमीरों के कितने मज़े है रोज़ ऐसी मेम चोदने को मिलती होगी …

आज मेरे गरीब लंड का लोटरी लग गई
मैंने मेम को घोड़ी बना दिया और अपने पीछे से चढ़ गया..

उसके बालों को पकड़ा और धक्के मारने लगा ..

हरामी मुझे दर्द हो रहा है … बस भी कर .. अहह

आह, मैं स्खालित हो गया मेरा फव्वारा उसकी बुर में छुट पड़ा …

उई कितना गरम लावा है … मेरी फुद्दी जल जायेगी … आह

उसका जिस्म ठंडा हो गया और मैंने उसे बिस्तर पर लेटा दिया …

यही फर्क है विदेसी माल में ..

देसी लौंडी रहती तो बार बार चुदवाती..

आप ठीक तो है न … मेम?

तेल लगा दूँ …?

वो पूरी रात मैं मेम की फटी हुई बुर पर तेल मालिश करता रहा …

मेम, एक बात कहूँ …

हाँ राजू बोलो !

कहकर अपनी टांगें जोड़ ली और मुझे बिस्तर में बैठा लिया …

छोटी मालकिन आइ लव यू …

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