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पड़ोसी की बीवी को ट्रेन में चोदा

हैल्लो दोस्तों, में एक सरकारी दफ़्तर में काम करता हूँ और मुंबई में अकेला रहता हूँ. मेरी शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है, इसलिए में ज़्यादा समय घर पर रहकर टी.वी. देखता रहता हूँ. एक मेरा खास दोस्त था, उसका नाम नज़ीर था, जो कि हमारी ही सोसाईटी में रहता था और वो एक प्राइवेट कंपनी में काम करता था. उसके घर पर उसकी बीवी समीना जो कि बहुत खूबसूरत, सुडोल बदन की महिला थी.

में अक्सर उनके घर आता जाता था, जिस कारण समीना भाभी अपने पति का दोस्त होने के नाते मुझसे कभी-कभी मज़ाक भी कर लेती थी. में कभी-कभी उन लोगों को पैसों की मदद भी करता था, जिस कारण वो लोग मेरा बहुत एहसान मानते थे. नज़ीर का ससुराल बनारस से करीब 120 किलोमीटर पर एक छोटे से गाँव में थी और मेरे दोस्त के माता, पिता, दादा, दादी सब बनारस शहर में रहते थे. उन दिनों में 1 महीने की छुट्टी पर था.

अब मुझे छुट्टी लिए हुए 2 ही दिन हुए थे कि शाम को नज़ीर मेरे घर आया और उसका चेहरा उदास था, तो मैंने पूछा कि यार क्या बात है? तुम उदास दिख रहे हो.

फिर वो बोला कि यार विशाल मेरे ससुर जी की तबियत आजकल कुछ खराब चल रही है और तेरी भाभी गाँव जाने की ज़िद कर रही है. फिर में बोला कि इसमें उदास होने की क्या बात है? भाभी को अपने मायके छोड़ आना और अपने आपा, अम्मी से मिल भी लेना, अगर तुम्हें पैसों की कमी है तो बोलो में मदद कर दूँगा.

वो बोला कि यार यह बात नहीं है, मेरी समस्या यह है कि मेरा प्रमोशन होने वाला है और मुझे काफ़ी काम 2 महीनों में पूरा करना है, इसलिए मुझे छुट्टी नहीं मिल सकती है और अगर छुट्टी लेता हूँ तो तनख्वाह भी कटेगी और प्रमोशन भी नहीं होगा. फिर मैंने बोला कि घबराओ मत अगर तुम चाहो तो में भाभी को छोड़ आता हूँ, में आजकल 1 महीने की छुट्टी पर हूँ.

वो खुश होते हुए बोला कि विशाल तुमने मेरी सारी समस्या हल कर दी, तुम समीना को उसके मायके छोड़ आना, लेकिन एक गुज़ारिश है और तुम अगर बुरा ना मानो तो अपनी बाकी की छुट्टियाँ भी मेरे गाँव में ही बिता देना. वहाँ मेरे अम्मी, आपा तुम्हें देखकर बहुत खुश होंगे और तुम्हारी छुट्टियाँ भी मज़े से कट जाएगी.

फिर इस तरह उसने समीना के मायके और अपने गाँव में मेरे आगमन की सूचना दे दी और नज़ीर ने मेरी और समीना की जाने की टिकट सोमवार को महानगरी ट्रेन से वेटिंग लिस्ट 98 और 99 में करा कर लेकर आया.

मैंने कहा कि अगर कन्फर्म हो जाती है तो ठीक है, वरना टी.टी. को पैसे देकर कन्फर्म करा लेंगे. अब सोमवार को नज़ीर को मीटिंग में जाना था, इसलिए वो बोला कि हम लोग स्टेशन पहुँच जाए, वो सीधा ऑफिस से स्टेशन आ जाएगा.

फिर में और समीना भाभी शाम को स्टेशन रवाना होने के लिए चौराहे पर आकर टेक्सी का इंतज़ार कर रहे थे कि इतने में हमारे सामने एक कुतिया जा रही थी और उसके पीछे-पीछे कुत्ता उसकी चूत को सूँघता हुआ जा रहा था.

थोड़ी देर के बाद कुत्ता कुतिया पर चढ़कर चुदाई करने लगा, तो मैंने देखा कि समीना भाभी उनकी चुदाई को गौर से देख रही थी और जब 10-12 धक्को के बाद कुत्ता झड़ गया, तो उसका लंड कुतिया की चूत में अटक गया और अब वो एक दूसरे के विपरीत दिशा में होकर लंड को चूत से निकालने की कोशिश कर रहे थे.

फिर जब मेरी और समीना भाभी की नज़रे मिली तो वो शर्मा गयी और अब वो मुस्कुराते हुए अपना चेहरा नीचे झुकाकर तिरछी नजरों से कुत्ते के अटके हुए लंड को देख रही थी. अब मुझे वो काफ़ी सेक्सी नजर आ रही थी और अब यह सब देखकर मेरा लंड खड़ा हो गया था.

इतने में टेक्सी आई और हम लोग निर्धारित समय पर स्टेशन पहुँचकर नजीर भाई का इंतजार करने लगे. फिर करीब 15 मिनट के बाद उसका मेरे मोबाईल पर फोन आया कि आज देर तक मीटिंग चालू रहेगी, इसलिए वो स्टेशन नहीं आ सकता है और सॉरी बोलकर फोन रख दिया. फिर मैंने अपना टिकट कन्फर्म होने की जानकारी के लिए टी.सी. ऑफिस जाकर पता किया, लेकिन हमारा टिकट कन्फर्म नहीं हुआ. फिर मैंने सोचा कि किसी भी तरह एक सीट तो लेनी ही पड़ेगी, तो टी.सी ने बताया कि आप ट्रेन पर ही टी.टी. से मिल लीजिएगा, तो शायद आपको एक सीट मिल ही जाएगी.

फिर ट्रेन टाईम पर आ गई और समीना और में ट्रेन में चढ़ गये. फिर टी.टी. से बहुत रिक्वेस्ट करने पर वो 200 रुपये में एक बर्थ देने के लिए राज़ी हो गया. अब टी.टी. एक सिंगल सीट पर बैठा था तो उसने कहा कि आप लोग इस सीट पर बैठ जाओ, जब तक हम कोई सीट देखकर आते है. अब में और समीना उस सीट पर बैठ गये, जब रात के करीब 10 बज रहे थे और खिड़की में से बहुत ठंडी हवाएँ अंदर आ रही थी, तो हम लोग शॉल से अपने बदन ढककर बैठ गये. फिर इतने में टी.टी. ने आकर हम लोगों को दूसरी बोगी में एक ऊपर की बर्थ दे दी.

मैंने 200 रूपये टी.टी. को देकर एक टिकट कन्फर्म करवा लिया और पहले अपने बर्थ पर समीना को ऊपर चढ़ाया और उसको ऊपर चढ़ाते समय मैंने जानबूझ कर अपनी उंगली समीना के चूतड़ की दरार (गांड) में कसकर दबा दी. पहले तो वो चौंकी और पलटकर देखी, लेकिन मेरी नज़र नीचे थी, तो तब वो मुस्कुराती हुई बर्थ पर चढ़ गयी और फिर में भी ऊपर चढ़ गया.

अब सभी स्लीपर पर लोग सो रहे थे, हमारे स्लीपर के ठीक सामने वाले स्लीपर पर एक 7 साल की लड़की सो रही थी, जिसकी मम्मी, दादी बीच में और नीचे वाली बर्थ पर थे. अब सारी लाईट पंखे बंद थे और सिर्फ़ नाईट बल्ब जल रहा था.

अब ट्रेन अपनी गति में चल रही थी और अब समीना ऊपर बर्थ में जाकर लेटने की तैयारी कर रही थी. फिर समीना मुझसे कहने लगी कि लेटोगे नहीं? तो मैंने कहा कि जगह तो है नहीं. फिर वो लेटकर करवट बदलकर लेट गयी और मुझे अपने बगल में लेटने को कहा, तो में भी उसके बगल में लेट गया और चादर ओढ़ लिया.

अब जगह कम होने के कारण हम दोनों एक दूसरे से चिपके हुए थे. अब समीना की चूचियाँ मेरी छाती से दबी हुई थी. अब मेरी तो उसकी चूत पर पहले से ही नजर थी तो मैंने उसे और भी अपने से चिपका लिया और उससे कहा कि और इधर आ जाओ, नहीं तो नीचे गिरने का डर रहेगा. फिर वो मुझसे और चिपक गयी और फिर समीना ने अपनी जाँघ मेरी जाँघ के ऊपर रख दी.

अब उसके गाल मेरे गाल से सटे थे और अब में उसके गालों पर अपने गाल रगड़ने लगा था, अब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा हो गया था और उसे मेरे लंड की चुभन उसकी जांघो के बीच में महसूस होने लगी थी. फिर थोड़ी देर के बाद उसकी सांसे तेज चलने लगी, तो में समझ गया कि वो गर्म हो रही है.

में अपना एक हाथ समीना की कमर पर ले गया और धीरे-धीरे उसकी साड़ी के साथ-साथ उसके पेटीकोट को भी ऊपर सरकाने लगा, तो वो कुछ भी नहीं बोली और अपनी आँखे बंद करके पड़ी रही. फिर थोड़ी देर के बाद उसने अपना एक हाथ मेरी कमर पर रख दिया.

तब मैंने उसकी साड़ी और पेटीकोट को उसकी कमर तक सरका दिया. अब समीना की सांसे और भी तेज चलने लगी थी. अब में उसके चुत्तड सहलाने लगा था, वो अंदर पेंटी पहने हुई थी. फिर में उसकी पेंटी के ऊपर से अपना हाथ फैरते हुए उसकी चूत पर अपना हाथ फैरने लगा, तो तब मुझे लगा कि उसकी चूत काफ़ी गीली हो चुकी थी.

फिर में उसकी पेंटी के साईड से अपना एक हाथ अंदर डालकर उसकी चूत के पास ले गया. अब उसकी चूत की बाहरी दीवारें चिपचिपा रही थी और अब में उसकी चूत की फांको को और दाने को सहलाने लगा था. इतने में समीना ने अपने होंठ मेरे होंठो पर रख दिए और मेरे होंठो को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी. अब मेरे पूरे बदन में जोश आ गया था, तो में अपना एक हाथ समीना के ब्लाउज में अंदर डालकर उसकी चूचियों के दाने (निपल्स) को मसलने लगा, उसकी चूची के निप्पल काफ़ी बड़े-बड़े थे. अब मेरा एक हाथ उसके निप्पल से खेल रहा था तो दूसरे हाथ की दो उँगलियाँ उसकी चूत में घुसी थी.

अब ट्रेन की रफ़्तार के साथ-साथ मेरी दोनों उंगलियाँ उसकी चूत में अंदर बाहर हो रही थी. अब समीना सिसकारियाँ भरने लगी थी और अपना एक हाथ मेरी पेंट की चैन के पास लाकर चैन खोलने लगी थी. फिर मैंने भी चैन खोलने में उसकी मदद की और अपना लंड समीना के हाथ में दे दिया तो वो मेरे लंड के सुपाड़े को सहलाने लगी और उसको मेरा लंड सहलाने में बहुत मज़ा आ रहा था.

अब में उसकी चूत में इस बार अपनी 3 उँगलियाँ एक साथ डालने लगा था. अब उसकी चूत से काफ़ी सारा पानी गिरने लगा था, जिससे मेरा हाथ और उसकी पेंटी पूरी भीग गयी थी, लेकिन इस बार मेरी तीनों उँगलियाँ उसकी चूत में नहीं जा रही थी तो में थोड़ा और ज़ोर लगाकर अपनी तीनों उँगलियाँ एक साथ उसकी चूत में डालने लगा.

फिर समीना मेरा हाथ पकड़कर अपनी चूत से हटाने लगी, शायद इस बार उसकी चूत मेरी तीनों उँगलियों से दर्द करने लगी थी, लेकिन में उसके होंठ अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था. अब में अपने पूरे जोश में आ गया था और समीना की पेंटी को एक साईड में करके अपना लंड उसकी चूत के ऊपर रख दिया था, तो उसने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत फैला दी.

अब ट्रेन की रफ़्तार से पूरा डब्बा हिल रहा था, अब मुझे तो बस थोड़ा ज़ोर लगाना पड़ा तो मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर समा गय. तब समीना मेरे कान में कहने लगी कि धीरे-धीरे डालो विशाल भाई जान, मेरी चूत दर्द कर रही है, क्योंकि तुम्हारा उनसे काफ़ी बड़ा और मोटा है. फिर मैंने थोड़ी सी पोज़िशन लेकर उसके चूतड़ो को अपने लंड पर दबाया तो मेरे लंड का आधा हिस्सा उसकी चूत में अंदर घुस गया.

अब में उसे ज़्यादा परेशान नहीं करना चाहता था तो मैंने सोचा कि अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दूँ, लेकिन उसके मुँह से चीख निकलेगी और लोग जाग भी सकते है, इसलिए में अपने लंड का आधा हिस्सा ही उसकी चूत में अंदर डाले रहा और अंदर बाहर करने लगा.

अब उसकी पेंटी के साईड का कपड़ा मेरे लंड पर घिस रहा था, इसलिए मुझे उसे चोदने में थोड़ी तकलीफ़ के साथ-साथ मज़ा भी आ रहा था. अब समीना भी मेरी चुदाई की रफ़्तार बढ़ने से मेरा साथ देने लगी थी. अब उसकी पेंटी के घर्षण से मेरा लंड भी उसकी चूत में पानी छोड़ने के लिए तैयार हो चुका था.

फिर मैंने उसकी कमर को कसकर अपनी कमर से चिपकाया और फिर मेरे लंड ने उसकी चूत में ढेर सारा लंड रस डालकर लबालब भर दिया, जिससे उसकी पेंटी पूरी गीली हो गयी, शायद अब उसे सर्दी के कारण ठंड लगने लगी थी.

फिर उसने धीरे से अपनी पेंटी उतारकर उसी से अपनी चूत साफ करके अपनी पेंटी अपने हेंड बैग में रख दी थी. फिर में और समीना एक दूसरे से चिपककर सो गये, लेकिन अब हम दोनों की आँखों में नींद नहीं थी. फिर मैंने समीना के कान में कहा कि कुतिया बनकर कब चुदावाओगी? तो तब समीना कहने लगी कि घर चलकर जैसे चाहो वैसे चोदना, यहाँ तो बस धीरे-धीरे मज़ा लो. अब हम दोनों ने शॉल से अपना पूरा बदन ढक रख था. अब समीना फिर से मेरे लंड को पकड़कर मसलने लगी, तो में भी उसकी चूत के दाने को मसल-मसलकर मज़ा लेने लगा था. अब समीना मुझसे काफ़ी खुल चुकी थी और अब वो मेरे होंठो को चूसते हुए मेरे लंड को मसले जा रही थी. अब उसके हाथों की मसलन से मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा था और देखते ही देखते मेरा लंड उसकी मुट्ठी से बाहर आने लगा था.

अब समीना ने बहुत गौर से मेरे लंड की लम्बाई-चौड़ाई नापी और मेरा लंड देखकर हैरान होकर मेरे कान में बोली कि इतना मोटा-लंबा लंड तुमने मेरी चूत में कैसे घुसा दिया? तो मैंने कहा कि अभी पूरा लंड कहाँ घुसाया है मेरी रानी? अभी तो सिर्फ़ आधे हिस्से से काम चलाया है, में पूरा लंड तो तब डालूँगा, जब तू घर में कुतिया बनेगी और में कुत्ता बनकर डॉगी स्टाईल में तुझे पूरे लंड का मज़ा चखाऊँगा. अब इस पर वो ज़ोर-ज़ोर से मेरे गालों पर अपने दाँत से काटने लगी.

फिर मैंने उसके कान में धीरे से कहा कि समीना तुम ज़रा करवट बदलकर सो जाओ, तुम अपनी गांड मेरे लंड की तरफ करके सो जाओ. अब उस पर वो धीरे से फुसफुसाकर कहने लगी कि नहीं बाबा गांड मारनी हो तो घर में मारना, यहाँ में अपनी गांड मारने नहीं दूँगी. फिर मैंने उससे कहा कि नहीं रानी में तुम्हारी गांड नहीं मारूँगा, में तो तुम्हें बस चूत और लंड का ही मज़ा दूँगा. फिर उसने करवट बदल दी, तो मैंने समीना के दोनों पैरों को मोड़कर समीना के पेट की और कर दिया, जिससे उसकी चूत पीछे से मेरे लंड को रास्ता दिखाने लगी.

फिर मैंने उसकी गांड अपने लंड की तरफ खींचकर पहले अपनी दो उँगलियाँ डालकर उसकी चूत के छेद को थोड़ा फैलाया और फिर अपनी दोनों उँगलियाँ उसकी चूत में डालकर अपनी उँगलियों से उसकी चूत को चोदने लगा, तो समीना उस पर थोड़ा चीखी.

फिर में उसके गाल पर एक चुम्मा लेकर अपने लंड को समीना की चूत में धीरे-धीरे घुसाने लगा और बहुत कोशिश करने के बाद भी में केवल अपना आधा लंड ही उसकी चूत में घुसा पाया. में उसको ज़्यादा से ज़्यादा मज़ा लेना और देना चाहता था, इसलिए में बहुत धीरे-धीरे और आराम से अपना लंड उसकी चूत में डालकर अपने एक हाथ से उसकी चूची को मसलने लगा था. फिर मैंने देखा कि अब समीना भी अपनी गांड मेरे लंड की तरफ दबा रही थी.

फिर कुछ ही मिनटों में समीना की चूत पानी छोड़कर झड़ गयी, जिससे मेरा लंड बिल्कुल गीला और चिपचिपा हो गया, जिस कारण मेरा लंड का उसकी चूत में केवल आधा हिस्सा ही घुस सका था और अब में धीरे-धीरे अपनी कमर ट्रेन की रफ़्तार और बोगी के धक्को के साथ हिलाने लगा था. फिर वो भी अपनी गांड को मेरे लंड की और दबाते हुए चुदाई का मज़ा लेने लगी थी और इस बार काफ़ी देर तक हम दोनों चोदा–चोदी करते रहे.

फिर ट्रेन ने एक बार सिग्नल नहीं मिलने के कारण ऐसा ब्रेक मारा कि समीना के चूतड़ो ने पीछे की तरफ मेरे लंड की और दबाव डाला, जिससे मेरा पूरा लंड झट से उसकी चूत की गहराई में घुसता हुआ उसकी बच्चेदानी से जा टकराया.

अब समीना के मुँह से भयानक चीख निकलने ही वाली थी कि मैंने अपने एक हाथ से समीना का मुँह बंद कर दिया. अब में तो ट्रेन पर उसके साथ ऐसा नहीं करना चाहता था, लेकिन ट्रेन के अचानक ब्रेक लगने के कारण ऐसा हुआ. अब वो धीरे-धीरे सिसक रही थी.

फिर मैंने अपने लंड को स्थिर रखकर पहले समीना की दोनों चूचियों को कस- कसकर मसला और जब उसे कुछ राहत मिली तो वो खुद ही अपनी कमर आगे-पीछे करने लगी, शायद अब उसे दर्द की जगह पर ज़्यादा मज़ा आने लगा था.

फिर कुछ ही देर के बाद मैंने मेरे लंड पर उसकी चूत की सिकुड़न महसूस की, तो में समझ गया कि वो दूसरी बार झड़ रही थी. फिर मैंने भी कुछ ही देर के बाद उसकी चूत में अपने लंड की पिचकारी मारकर उसकी चूत को लबालब भर दिया और उठकर अपने कपड़े ठीक किए.

फिर समीना बोली कि विशाल में पेशाब करके आती हूँ और फिर वो पेशाब करके वापस आई और उसके बाद में भी पेशाब करने चला गया. फिर जब टायलेट में मैंने अपनी अंडरवियर में से अपना लंड बाहर निकाला तो मैंने देखा कि मेरे लंड पर समीना की चूत रस के साथ-साथ उसकी चूत का कुछ-कुछ खून भी लगा था. फिर मैंने पेशाब करके अपने लंड को धोया और फिर वापस आकर हम दोनों सो गये. फिर सुबह करीब 9 बजे हमारी आँखे खुली तो मालूम हुआ कि आधे घंटे में हमारा स्टेशन आने वाला है, तो हम फटाफट से सामान पैक करके तैयार हो गये.

Updated: November 25, 2016 — 12:21 am
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