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पत्नी की बेवफाई को ऑफिस की लड़की ने दूर किया

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मेरा नाम वरुण है मेरी उम्र 28 वर्ष है, मैं पुणे का रहने वाला हूं। मेरे पिताजी अब पुलिस से रिटायर हो चुके हैं और अब वह घर पर ही रहते हैं। मेरी मां स्कूल में अध्यापिका है, वह स्कूल में पढ़ाती हैं और कुछ वर्षों बाद वह भी रिटायर हो जाएंगे। मेरा बड़ा भाई विदेश में ही रहता है और वह कभी-कबार ही घर आता है, उसकी पत्नी भी उसी के साथ विदेश में रहती है क्योंकि वह भी वहीं पर नौकरी कर रही है इसी वजह से वह लोग पुणे कम ही आते हैं, उन दोनों को छुट्टी नहीं मिल पाती। मैंने कई बार अपने भाई को कहा कि तुम यही पर कोई नौकरी क्यों नहीं कर लेते लेकिन वहां कहता कि मुझे जब यहां पर अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो मैं पुणे में आकर क्या करूंगा। वह बहुत ही अच्छी कंपनी में है इसलिए वह पुणे नहीं आना चाहता और उसकी पत्नी भी विदेश में नौकरी कर रही है।

वह मुझसे दो वर्ष ही बड़ा है लेकिन वह बहुत अच्छे पैसे कमाता है। कभी-कबार वह पिताजी को भी पैसे दे देता है। मेरा अपना छोटा सा कारोबार है, मैं वही कर रहा हूं और उस कारोबार से मेरा घर चल रहा है। मेरी शादी को अभी एक वर्ष ही हुआ है। मेरी पत्नी का नाम रमा है, मेरी पत्नी और मेरी मुलाकात मेरे एक दोस्त ने करवाई थी। उस वक्त हम दोनों ज्यादा बात नहीं करते थे और ना ही मैं रमा के बारे में ज्यादा सोचता था क्योंकि मैं उस वक्त अपनी पढ़ाई कर रहा था और मैं इन सब चीजों की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देता था परंतु जब रामा और मेरी बातें होने लगी तब मुझे ऐसा एहसास होने लगा कि मुझे रामा से शादी कर लेनी चाहिए। इसके बारे में जब मैंने अपने पिताजी और अपने भाई से बात की तो वह कहने लगे कि यदि तुम्हें वह लड़की पसंद है तो तुम उससे शादी कर लो। मुझे भी कहीं ना कहीं ऐसा लग रहा था की मुझे रमा से शादी कर लेनी चाहिए क्योंकि मैंने उसे अपने घर पर अपने माता पिता से भी मिलवाया था और वह रमा की बहुत तारीफ कर रहे थे, इस वजह से मैंने रमा के साथ शादी कर ली। मेरी शादी अच्छे से चल रही है और मुझे किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं है क्योंकि मेरा काम भी अच्छा चल रहा है और उससे जो भी कमाई होती है तो उससे मेरा घर खर्चा चल जाता है लेकिन मैं कुछ बड़ा करना चाहता हूं इसीलिए मैं इस बारे में हमेशा सोचता रहता हूं।

मुझे एक दिन मेरा दोस्त मिला, उसका नाम रवि है। जब मुझे रवि मिला तो वह मुझसे कहने लगा कि तुम आजकल क्या कर रहे हो, मैंने उसे बताया कि मैं तो अपना छोटा सा काम कर रहा हूं और इसमें ही खुश हूं। उसका भी अपना कारोबार है और वह कहने लगा कि यदि तुम मेरे साथ काम कर लो तो तुम्हें अच्छे पैसे मिल जाएंगे, उसके लिए तुम्हें कुछ पैसे लगाने पड़ेंगे। मैंने उसे पूछा कि मुझे कितने पैसे अपने बिजनेस को शुरू करने में लगेंगे, उसने मुझे कहा कि पहले तुम मेरे साथ मेरा काम देख लो उसके बाद ही हम लोग इस काम को आगे बढ़ाते हैं। मैं जब उसके साथ उसके कारखाने गया तो उसका काम बहुत अच्छा चल रहा था और उसके पास काफी लोग काम भी कर रहे थे। वह मुझे अपने क्लाइंट के पास भी ले गया जो लोग उससे सामान खरीदते हैं। मुझे अब उस पर पूरा यकीन हो गया और मैंने उसे कहा ठीक है हम लोग नया काम शुरू कर देते हैं। मैंने काम शुरू करने के लिए अपने भाई से कुछ पैसे ले लिए और कुछ अपने माता-पिता से ले लिये। थोड़े बहुत मेरे पास थे तो मैंने वह पैसे बिजनेस में लगा दिये। मैंने काम शुरू किया तो शुरुआत में काम बहुत अच्छा था और मैं बहुत खुश था क्योंकि मेरा काम अच्छा चल रहा था। मैंने थोड़े बहुत पैसे अपने भाई को वापस कर दिए। मैं अपने काम से बहुत खुश हूं, मेरी पत्नी कहती कि तुम बहुत ही अच्छे से मेहनत कर रहे हो। रवि मेरे साथ ही रहता था क्योंकि उसने भी कुछ पैसे उसमें लगाए थे। हम दोनों साथ में ही काम कर रहे थे और जो भी मुनाफा होता उसका हम लोग आधा हिस्सा कर लिया करते। मेरा काम भी अच्छा चल रहा था और मैं बहुत खुश था लेकिन एक समय बाद हमारा काम चलना बंद हो गया और मैं बहुत ज्यादा तनाव में आ गया, मैंने इस बारे में रवि से भी बात की और वह मुझे कहने लगा कि कुछ समय तुम सब्र रखो धीरे-धीरे काम अच्छा चलने लगेगा। मैं काफी समय तक बैठा हुआ था परंतु काम किसी भी प्रकार से नहीं चल पा रहा था।

मैंने जो पैसे अपने पिताजी से लिए थे वह मैं चुकता नहीं कर पा रहा था और मैं सोच रहा था कि मैं किस प्रकार से अपने पिताजी को पैसे वापस लौटाऊँ, ना तो मेरा काम चल रहा था और ना  मुझे कुछ भी समझ आ रहा था। एक समय बाद हमारा पूरा काम चौपट हो गया और मैं भी कर्जे में आ गया,  उसके बाद मैंने काम छोड़ दिया और अपने घर पर ही था। मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था कि मैं अब आगे क्या करूंगा क्योंकि मैंने आज तक कभी भी ना तो नौकरी की है। मैं अब घर में ही रहता था। मेरे पिताजी और मेरी पत्नी मुझे बहुत समझाते परंतु मुझे बहुत बुरा लगता क्योंकि मेरी वजह से ही यह सब नुकसान हुआ था। मैंने कुछ पैसे अपने दोस्तों से भी लिए थे, मैं उनके पैसे भी वापस नहीं कर पा रहा था। अब मैं सोचने लगा कि क्यों ना मैं नौकरी ही कर लूं। मैंने इस बारे में अपने दोस्तों से भी बात की लेकिन कहीं पर भी मुझे कोई नौकरी नहीं मिली। अब मेरी स्थिति बहुत बदतर हो चुकी थी और मेरे पास बिल्कुल भी पैसे नहीं थे। मेरी पत्नी मुझे कुछ भी सामान के लिए कहती तो मैं उसकी इच्छा पूरी नहीं कर सकता था और अब हम मुझे सुनने लगी। धीरे-धीरे उसने भी मेरा साथ छोड़ दिया और वह अपने घर चली गई।

जब रमा अपने घर गई तो मैं बहुत टूट गया और मुझे बहुत ही बुरा लगा जिस प्रकार से वह घर चली गई। मैंने उसे कई बार समझाने की कोशिश की लेकिन उसने मेरा बिल्कुल भी साथ नहीं दिया और ना ही वह वापस लौटी। मुझे अपने आप पर बहुत ही गुस्सा आ रहा था क्योंकि मैंने एक गलत लड़की से शादी की, जिसने मेरा ऐन वक्त पर साथ छोड़ दिया लेकिन मुझे अपने जीवन में आगे बढ़ना था और कुछ ना कुछ तो मुझे करना ही था इसलिए मैंने अपने दोस्तों से इस बारे में बात की। फिर मेरे दोस्त ने मेरी एक ऑफिस में नौकरी लगवा दी। वहां पर मुझे अच्छी तनख्वाह मिलती थी, और उससे मेरा खर्चा चल रहा था इसलिए मैं अब अपने ऑफिस में ही बिजी रहने लगा। हमारे ऑफिस में ही एक लड़की है जिसका नाम रूपल है, उसके और मेरे बीच में काफी बातें होने लगी थी। वह बहुत ही अच्छी लड़की थी। मैंने जब उसे अपने बारे में बताया तो वह कहने लगी कि तुमने बहुत ही हिम्मत दिखाई, इतना नुकसान होने के बाद भी तुम अपने काम पर लगे हो यह बहुत बड़ी बात है। मैंने जब उसे अपनी पत्नी के बारे में बताया तो रुपल कहने लगी कि तुम्हारी पत्नी ने बहुत ही गलत किया, उसे तुम्हारा साथ बिल्कुल भी नहीं छोड़ना चाहिए था। रूपल और मेरे बीच में बहुत अच्छी बाते होने लगी थी और वह मुझे बहुत ही सपोर्ट करती थी। मैं उसके साथ जब भी समय बिताता तो मुझे बहुत खुशी होती थी। मैं ऑफिस के कैंटीन मे रुपल के साथ ही बैठा रहता था और उसी के साथ मुझे समय बिताना अच्छा लगता था। मैं धीरे-धीरे अपने दोस्तों के पैसे भी वापस लौटा रहा था और कुछ पैसे मैंने अपने पिताजी को भी दे दिए थे। मुझे कई बार लगता था कि रमा ने बहुत ही गलत किया। मैंने रमा को फोन भी किया परंतु वह ना तो मेरा फोन उठा रही थी और ना ही मुझसे बात करती थी लेकिन रूपल मेरा हमेशा ही सपोर्ट करती, मुझे जब भी कोई जरूरत होती तो वह हमेशा ही मेरे साथ खड़ी रहती।  एक दिन मैं ऑफिस में बैठा हुआ था और अपना काम कर रहा था जब मैं अपना काम कर रहा था उस वक्त मेरे पास रूपल आ गई और वह खड़े होकर मुझसे बात कर रही थी। जैसे ही वह पलटी तो उसकी चूतडे मेरे मुंह पर लग गई और उसकी चूतड़ों से गर्मी बाहर निकल रही थी। मैंने जैसे ही रूपल की गांड पर हाथ लगाया तो मेरा पूरा मूड खराब हो गया और वह भी पूरे मूड में आ गई।

मैं उसे अपने साथ अपने ऑफिस कि छत पर ले गया। जब मैं उसे अपने ऑफिस के छत पर ले गया तो मैंने तुरंत ही अपने लंड को उसके मुंह में डाल दिया। मैं टंकी के पीछे उसे अपना लंड चूसा रहा था वह बहुत ही अच्छे से मेरे लंड को सकिंग कर रही थी और उसने मेरे लंड से पानी निकाल दिया। मैने उसे वहीं लेटाते हुए उसे नंगा कर दिया मै उसके स्तन अपने मुंह में ले रहा था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जब मैं उसके स्तनों का रसपान कर रहा था। मैंने काफी देर तक उसके स्तनों का रासपान किया उसका दूध भी बाहर की तरफ निकलने लगा था वह पूरे मजे में आ गई। मैंने जब अपनी उंगली को उसकी योनि पर लगाया तो वह गीली हो गई थी। मैंने उसकी योनि को बहुत देर तक चाटा उसके बाद मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी योनि के अंदर डाला तो वह चिल्ला उठी वह बहुत तेज चिल्लाने लगी। मैंने उसके दोनों पैरों को अपने कंधों पर रख लिया और उसे बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा उस वक्त बहुत गर्मी हो रही थी इस वजह से हम दोनों पसीना पसीना हो रहे थे लेकिन उसके बावजूद भी मैं रूपल को धक्के मारने पर लगा हुआ था। काफी देर मैंने उसे ऐसे ही धक्के मारे और उसके बाद मैंने उसे घोड़ी बना दिया घोडी बनाने के बाद मैंने उसकी चूत को बहुत देर चाटा  जिससे की उसकी योनि से तरल पदार्थ बाहर निकलने लगा। मैंने जैसे ही अपने लंड को उसकी चूत मे लगाया तो उसने अपनी चूतड़ों को धक्का मारते हुए अपनी योनि के अंदर मेरे लंड को ले लिया और मैंने उसे झटके मारने शुरू कर दिए। मैंने उसे इतनी तेज झटके मारे उसका पूरा शरीर हिल रहा था और मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा था वह भी अपने चूतडो को मुझसे मिलाने पर लगी हुई थी। मैं भी उसे बड़ी तेजी से झटके मार रहा था उन्ही झटको के बीच में मेरा वीर्य पतन हो गया।

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