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सील तुड़वाकर अपने दिल का राजा बनाया

Antarvasna, sex stories in hindi: मैं अपने कॉलेज के लिए घर से निकली थी मेरे साथ में मेरी दीदी भी थी ममता दीदी मुझे कहने लगी की क्या हुआ तो मैंने दीदी से कहा पता नहीं कार क्यों बंद हो गई है। मैंने अपने पापा को फोन किया और कहा कि पापा कार बंद हो गई है तो वह कहने लगे कि बेटा मैं अभी वहां मैकेनिक भिजवा देता हूं तुम मुझे यह बता दो कि तुम कहां पर हो। मैंने पापा को बताया कि हम लोग कहां पर खड़े हैं मैंने पापा से कहा पापा आप जल्दी से मैकेनिक को भिजवा दीजिए पापा कहने लगे बस थोड़ी देर बाद तुम्हारे पास कोई ना कोई लड़का भेज देता हूं। हम लोग कुछ देर इंतजार करते रहे तभी एक लड़का वहां पर आया और वह कहने लगा कि मेंम साहब आप चाबी दे दीजिए मैंने उस लड़के को चाबी दे दी और उसके बाद वह गाड़ी देखने लगा। थोड़ी देर बाद उसने गाड़ी ठीक कर दी हम लोग अब वहां से अपने कॉलेज आ गए थे मैंने दीदी को कहा दीदी आप कार लेकर चले जाइए क्योंकि दीदी को अपनी सहेली के घर जाना था।

दीदी अपनी सहेली के घर चली गई और मैं कॉलेज में हीं थी जब मैं कॉलेज से वापस घर लौट रही थी तो मैंने ममता दीदी को फोन कर दिया मैंने ममता दीदी को कहा की आप कहां पर हैं तो दीदी मुझे कहने लगी कि मैं बस यहां से निकल रही हूं। मैंने दीदी को कहा आप मुझे लेने के लिए कॉलेज में ही आ जाइएगा तो दीदी मुझे कहने लगे ठीक है मैं तुम्हें लेने के लिए तुम्हारे कॉलेज में ही आ जाऊंगी। दीदी मुझे लेने के लिए मेरे कॉलेज के बाहर गेट पर आ गई जब वह कॉलेज के गेट पर आई तो मैंने दीदी को कहा दीदी क्या हम लोग अभी घर चलें तो दीदी कहने लगी कि आरोही हम लोग मूवी देखने के लिए चलते हैं काफी समय हो गया है जब हमने मूवी नहीं देखी है। हम दोनों अब मल्टीप्लेक्स थिएटर में आ चुके थे और हम लोग मूवी देखने के लिए पहुंचे तो मैंने दीदी से कहा दीदी मैं टिकट ले लेती हूं। दीदी कहने लगी नहीं आरोही मैं टिकट ले लेती हूं हमने टिकट ले लिया था और हम दोनों थियेटर के अंदर चले गए जब हम लोग थिएटर के अंदर गए तो वहां पर हम लोगों ने मूवी देखी।

जब मूवी खत्म हो गई तो हम लोग वापस लौट रहे थे तभी दीदी की एक सहेली उन्हें मिली वह दीदी के साथ कॉलेज में पढ़ा करती थी दीदी ने उनका परिचय मुझसे करवाया और कहा कि यह मेरी सहेली मीनाक्षी है। मीनाक्षी और दीदी साथ में ही कॉलेज में पढ़ा करते थे मीनाक्षी दीदी से कहने लगी कि तुम आजकल क्या कर रही हो तो दीदी ने कहा मैं तो आजकल घर पर ही रहती हूं और आज अपनी बहन आरोही के साथ मूवी देखने के लिए आई थी। मुझे भी उनसे मिलकर अच्छा लगा और हम लोग साथ में काफी देर तक बैठे रहे अब हम लोग घर लौट चुके थे। जब हम लोग घर पहुंचे तो उस वक्त रात के 9:00 बज चुके थे पापा भी घर आ चुके थे और पापा कहने लगे की तुम दोनों कहां रह गई थी तो मैंने पापा से कहा पापा हम लोग मूवी देखने के लिए चले गए थे। पापा मुझे कहने लगे कि तुमने मुझे इस बारे में नहीं बताया मैंने पापा को कहा पापा बस ऐसे ही अचानक से प्लान बन गया था तो हम लोग मूवी देखने के लिए चले गए। पापा कहने लगे चलो कोई बात नहीं मम्मी ने कहा कि चलो बेटा मैंने तुम्हारे लिए खाना लगवा दिया है। मम्मी ने हमारे लिए खाना लगवा दिया था और हम लोगों ने साथ में बैठकर डिनर किया। पापा दीदी से पूछने लगे कि तुम आगे क्या सोच रही हो तो ममता दीदी ने कहा कि पापा मैंने आगे तो कुछ सोचा नहीं है पापा को भी दीदी की शादी की चिंता होने लगी थी, पापा एक बड़े बिजनेसमैन है। उन्होंने दीदी से इस बारे में कहा कि ममता मैं तुम्हारे लिए लड़का देख रहा हूं दीदी ने इसका कोई जवाब नहीं दिया दीदी चाहती थी कि उन्हें थोड़ा समय और मिल जाए दीदी अभी शादी करने के लिए तैयार नहीं थी। आखिरकार दीदी को पापा और मम्मी ने मना लिया और दीदी शादी करने के लिए तैयार हो गई दीदी के लिए कई अच्छे घरों से रिश्ते आ रहे थे और फिर दीदी की सगाई हो गई। अब दीदी की शादी नजदीक थी दीदी ने अपने साथ में पढ़ने वाले दोस्तों को भी अपनी शादी में इनवाइट किया था दीदी की शादी में उनके सारे दोस्त आए हुए थे और शादी के दौरान ही मेरी मुलाकात प्रदीप से हुई।

प्रदीप दीदी के साथ ही कॉलेज में पढ़ा करता था लेकिन उस दिन जब मैं प्रदीप से मिली तो मुझे ऐसा लगा कि जैसे प्रदीप से मुझे बात करनी चाहिए। मैंने प्रदीप से बात की और प्रदीप भी मुझसे बात करने लगा हम दोनों एक दूसरे से काफी देर तक बात करते रहे तो मुझे बहुत अच्छा लगा और प्रदीप भी बहुत खुश हो रहा था। वह मुझसे बात कर के बहुत खुश होता दीदी की शादी हो चुकी थी दीदी अपने ससुराल जा चुकी थी लेकिन मेरी मुलाकात प्रदीप से अब भी होती थी। प्रदीप अपने पिताजी का बिजनेस संभालता है और जब भी मैं प्रदीप से मुलाकात करती तो मुझे अच्छा लगता पहले तो हम लोगों के बीच अच्छी दोस्ती हुई। वह मेरी दीदी की बड़ी तारीफ किया करता था और कहता कि ममता से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती थी। दीदी और प्रदीप अच्छे दोस्त है लेकिन दीदी को मैंने यह बात बताई नहीं थी मैंने जब यह बात दीदी को बताई तो दीदी कहने लगी कि क्या तुम सचमुच में प्रदीप से प्यार करने लगी हो। मैंने दीदी से कहा हां दीदी मैं प्रदीप को अपना दिल दे बैठी हूं दीदी मुझे कहने लगी कि प्रदीप अच्छा लड़का है।

प्रदीप के साथ मेरी नज़दीकियां बढ़ती जा रही थी हम दोनों एक दूसरे को हमेशा मिला करते थे। मुझे प्रदीप से मिलना अच्छा लगता था जब हम लोग अकेले में होते तो हम दोनों को अच्छा लगता एक दिन प्रदीप ने मेरे हाथ को पकड़ते हुए मेरे होठों को चूम लिया। पहली बार ही किसी ने मेरे होंठों को चूमा था मैं अपने मन में ख्याल पाल बैठी थी कि मैं अब प्रदीप के साथ सेक्स करूंगी। मै प्रदीप के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए तैयार हुई तो हम दोनों ही एक दूसरे को अकेले में मिले। जब हम दोनों एक दूसरे के साथ अकेले बैठे हुए थे तो मुझे थोड़ा शर्म महसूस हो रही थी लेकिन प्रदीप ने जब मेरे हाथों को पकड़ते हुए मेरी आंखों मे देखा तो मैं प्रदीप की आंखों में आंखें डालकर देखने लगी। मुझे प्रदीप को देखना अच्छा लग रहा था प्रदीप ने मेरे होठों को अपने होठों में जकड़ लिया मुझे कुछ पता ही नहीं चला। उसने मेरे होठों को चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा लगने लगा था जिस प्रकार से वह मेरे होठों को चूम रहा था उस से मै बहुत ही ज्यादा व्याकुल हो गई थी। मैं अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार थी मैने प्रदीप के लंड को चूसना शुरू किया जब उसने स्तनो को दबाना शुरू किया तो मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी और प्रदीप मेरे स्तनो को अच्छे से दबाने लगे। काफी देर तक हम दोनों ने एक दूसरे के बदन की गर्मी को महसूस किया और जब हम दोनों ही पूरी तरीके से गर्म होने लगे तो प्रदीप अपने आपको रोक नही पाए और ना ही मैं अपने आपको रोक पा रही थी। मैंने प्रदीप से कहा मेरे अंदर बहुत ज्यादा गर्मी पैदा हो गई है प्रदीप ने मेरे स्तनों पर अपनी जीभ को लगाया और वह मेरे स्तनों को दबाने लगे जिस प्रकार से वह मेरे स्तनों को दबा रहे थे उसे मेरे अंदर की उत्सुकता में और भी ज्यादा बढ़ोतरी हो गई थी। जब प्रदीप ने अपने होठों से मेरे स्तनों को चूसना शुरू किया तो मैं अब रह ना सकी प्रदीप ने मेरे स्तनों पर अपनी छाप छोड़ दी थी। उसके बाद जब प्रदीप ने मेरी योनि को चाटना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था प्रदीप ने काफी देर तक मेरी चूत को चाटा।

जब मेरी चूत से पानी बाहर निकलने लगा तो प्रदीप ने अपने लंड को मेरी चूत पर लगाया। मैं प्रदीप से कहने लगी तुम अपने लंड को धीरे से मेरी चूत के अंदर डालना शुरु किया प्रदीप कहने लगा हां तुम चिंता मत करो। प्रदीप ने धीरे से मेरी चूत के अंदर लंड को घुसाना शुरू किया तो प्रदीप का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर जाने लगा। जब प्रदीप का पूरा लंड मेरी चूत के अंदर घुस चुका था तो मेरे मुंह से चीख निकलने लगी और साथ ही मेरी चूत से खून भी बहार निकलने लगा मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही खून बाहर की तरफ निकलने लगा था। प्रदीप धीरे धीरे मुझे धक्के मार रहा था लेकिन उस वक्त मुझे काफी दर्द महसूस हो रहा था थोड़ी देर बाद मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही पानी निकलने लगा और मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नहीं पा रही थी। मेरी चूत गरम हो चुकी थी मैं बहुत ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी मेरी चूत से पानी बाहर निकलने लगा तो मैं अपने आप को रोक नहीं पा रही थी।

प्रदीप ने मेरे दोनों पैरों को खोल लिया और मुझे कहने लगा कि तुम्हारी चूत बहुत ज्यादा टाइट है यह कहते हुए उसने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया वह मेरे होठों का रसपान कर रहा था तो मुझे भी अच्छा लग रहा था। प्रदीप ने बहुत देर तक मेरे गुलाबी होठों का रसपान किया और मुझे उसने अपना बना लिया था। जिस प्रकार से प्रदीप ने मेरी व्याकुलता को शांत किया और मेरी उत्सुकता को उसने खत्म कर दिया उससे मैंने प्रदीप को अपनी बाहों में ले लिया। वह मुझे बड़ी तेजी से धक्के मारने लगा प्रदीप का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर बाहर होता तो मेरे मुंह से लगातार उत्तेजक आवाजें निकलती जा रही थी। प्रदीप के अंदर भी गर्मी बढ़ती जा रही थी वह मेरी उत्तेजक आवाज से इतना ज्यादा उत्तेजना में आ गया कि उसका वीर्य बाहर की तरफ को निकलने लगा और उसका वीर्य बाहर निकलने वाला था तो मैंने प्रदीप से कहा तुम अपने वीर्य को मेरी चूत में गिरा दो। उसने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर ही गिरा दिया और मेरी सील तोड़कर वह मेरे दिल का राजा बन चुका था।

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