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यह क्या कर रहा है बेटा -2

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रात को करीब तीन बजे मुझे पेशाब का जोर हुआ तो नींद खुली। मैं उठ कर पेशाब कर आया। जब मैं अपने बिस्तर पर लेटने वाला था तभी मेरी नज़र उस पर पड़ी जो बेसुध होकर सो रही थी, साड़ी अस्त-व्यस्त हो रही थी। पल्लू छाती से सरक चुका था और ब्लाउज में कसी चूचियाँ साँस के साथ ऊपर नीचे हो रही थी। चाची की माँ का नंगा पेट देख कर मेरा लण्ड फुंकारे मारने लगा।
मुझे कबीर की माँ की याद आ गई। मेरा मन अब चुदाई करने को तड़पने लगा था। पर नानी के साथ यह सब करने की हिम्मत नहीं हो रही थी। मैं बिना लाइट बंद किये बिस्तर पर लेट गया और सोचने लगा कि चाची की माँ की चूत कैसे मारी जाए। एक बार तो मन में आया कि पकड़ कर चोद डालूँ, पर फिर सोचा कि जल्दबाजी में काम खराब हो सकता है और फिर अब तो ये मेरे ही साथ रहने वाली है, मौका मिलता ही रहेगा।
मैं उसके बदन को अपनी नज़रों से चोदता चोदता कब सो गया पता ही नहीं चला।
सुबह मेरी आँख तब खुली जब नानी ने चाय बना कर मुझे जगाया। चाय पीते पीते भी मेरी नज़रें उसके बदन को टटोल रही थी।
चाय पीकर मैं नहाने चला गया और फिर तैयार हो कर अपने ऑफिस।
ऑफिस में बैठे बैठे बस यही सोचता रहा कि चाची की माँ को कैसे पटाया जाए। आखिर में यह सोचा कि एक बार चाची की माँ को अपने लण्ड के दर्शन करवाकर देखता हूँ फिर आगे की सोचूंगा।
दिन काटना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था। छुट्टी होते ही मैं घर की तरफ भागा। जब कमरे पर पहुँचा तो वो सो रही थी। मैंने उसको नहीं उठाया और वही कमरे में कपड़े बदलने लगा। कमीज बनियान उतारने के बाद मैंने अपनी पैंट भी उतार दी और सिर्फ अंडरवियर में खड़ा था कि उसकी आँख खुल गई। नानी के बदन को देख कर मेरा लण्ड पूरे शबाब पर था और अंडरवियर में तम्बू बन गया था। मैंने देखा कि वो मेरे लण्ड को गौर से देख रही थी। पर जब मुझ से नज़र मिली तो वो हड़बड़ा गई और उठ कर मेरे लिए चाय बनाने के लिए चली गई। खाना खा कर हम लोग फिर से बातें करने लगे।
मुझे तो नींद नहीं आ रही थी। बस चाची की माँ का बदन आँखों में घूम रहा था और चाची की माँ को चोदने का ख्याल बार बार मन और बदन में हलचल मचा रहा था। कुछ देर बातें करने के बाद मैंने सोने का नाटक किया। चाची की माँ ने प्यार से मेरे सर पर हाथ फेरा और फिर मेरे बगल में ही अपने बिस्तर पर लेट गई। मैंने देखा कि वो एकटक मेरी तरफ देख रही थी। कुछ देर बाद उसने भी आँखें बंद कर ली और दूसरी तरफ मुँह करके लेट गई। मैंने करीब आधा घंटा इन्तजार किया और फिर सरक कर उसके बिल्कुल करीब चला गया और अपना हाथ नानी के ऊपर रख दिया। चाची की माँ ने कोई प्रतिक्रिया नहीं की तो मैंने सोचा कि वो सो चुकी है और मैं थोड़ी ज्यादा हिम्मत करके बिल्कुल उससे चिपक गया।
अब चाची की माँ थोड़ा हिली पर मैं वैसे ही लेटा रहा। चाची की माँ ने करवट बदली तो मेरा जो हाथ पहले चाची की माँ के कंधे पर था वो एकदम से चाची की माँ की चूची पर गिर गया। मैं सोने का नाटक करता रहा और चाची की माँ ने भी मेरा हाथ नहीं हटाया। मेरे हाथ के नीचे माखन-मलाई का गोला था। मुझसे अब सब्र नहीं हो रहा था। मैंने चाची की माँ की चूची पर थोड़ा सा दबाव बनाया और धीरे धीरे चूची को सहलाने लगा।
कुछ देर बाद उसने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया और एक बार जोर का दबाव देकर फिर मेरे हाथ को अपनी चूची पर से हटा दिया।
वो अब सीधी होकर लेट गई थी और उसकी चूचियाँ नाईट बल्ब की रोशनी में बहुत मादक लग रही थी। मैंने कुछ देर बाद ही अपना हाथ दुबारा से उसकी चूची पर रखा और इस बार हाथ रखते ही चूची को सहलाना शुरू कर दिया। उसने गर्दन घुमा कर मेरी तरफ देखा पर बोली कुछ नहीं।
उसकी चुप्पी का मतलब उसकी सहमति थी। और वो भी शायद यही चाहती थी। मैंने चूचियों को थोड़ा और जोर से मसलना शुरू कर दिया। चाची की माँ अब भी कुछ नहीं बोल रही थी।
मेरा हाथ अब चाची की माँ के ब्लाउज के हुक खोलने के लिए बेचैन हो रहा था। मैंने जैसे ही हुक खोलने शुरू किये तो चाची की माँ ने हाथ पकड़ लिया।
“राज, यह क्या कर रहा है बेटा..”
मैं कुछ नहीं बोला और चुपचाप लेटा रहा। चाची की माँ ने मुझे थोड़ा हिलाया और फिर से मुझे आवाज दी,”राज… !”
मैं फिर भी कुछ नहीं बोला। वो फिर से मेरे पास लेट गई। मैं कुछ देर ऐसे ही पड़ा रहा और फिर से मैंने अपना हाथ उसकी चूची पर रख दिया। इस बार वो चुपचाप पड़ी रही। मैंने थोड़ी सी आँख खोल कर देखा तो वो जाग रही थी और मेरी ही तरफ देख रही थी।उसको चुपचाप पड़े देख कर मेरी हिम्मत और बढ़ गई और मैंने भी चुपचाप ब्लाउज के हुक खोलने शुरू कर दिए। इस बार उसने मुझे नहीं रोका और मैं भी पूरे हुक खोलने के बाद ही रुका। ब्लाउज के खुलते ही उसकी बड़ी बड़ी चूचियाँ नंगी हो गई जिन्हें देखते ही मेरे लण्ड ने फुंकारे मारने शुरू कर दिए। अब मैं उसकी नंगी चूची को सहला और मसल रहा था। उसकी आँखें बंद हो गई थी और वो होंठ दांतों में दबा दबा कर अपनी सिसकारी को रोकने की कोशिश कर रही थी।
मैंने जानबूझ कर चूची के निप्पल के पकड़ कर जोर से मसल दिया तो उसकी सीत्कार निकल गई और वो फुसफुसाई.. “राज… थोड़ा आराम से कर बेटा..”
उसके मुँह से इतना सुनते ही मैंने दोनों चूचियों को अपने हाथों में ले लिया और मसलने लगा। चाची की माँ ने मेरी तरफ करवट ली और अपनी एक चूची अपने हाथ से पकड़ कर मेरे होंठों से लगा दी। मैंने भी देर न करते हुए चूची को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा। बीच बीच में मैं निप्पल को अपने दांतों से काट रहा था जिस कारण चाची की माँ की सीत्कारें निकल रही थी।
चाची की माँ की साँसें अब तेज-तेज चल रही थी। मैं अब उसकी एक चूची को चूस रहा था और दूसरी को अपने हाथ से पकड़ कर मसल रहा था। उसकी साड़ी अस्त-व्यस्त हो गई थी और अब उसकी आधी से ज्यादा टाँगे नंगी नज़र आ रही थी।
मेरे लिए अब अपने पर काबू रखना मुश्किल था।
मैं अब उसके ऊपर छा गया और उसके कपड़े उतारने लगा। कुछ ही देर बाद चाची की माँ का नंगा बदन मेरी बाहों में झूल रहा था।
उसके हाथ भी अब कुछ ढूँढ रहे थे। मेरे बदन पर अब कपड़े नहीं थे। उसने मुझे नीचे लेटा लिया और मेरे बदन को चूमने लगी। चूमते-चूमते उसने जब अपने होंठ मेरे लण्ड पर रखे तो मैं तो निहाल हो गया। उसका अनुभव साफ़ दिख रहा था। उसकी हरकतों से मेरे बदन में खून उबलने लगा था। वो मस्ती में मेरे लण्ड को चूस रही थी। लण्ड पूरा कड़क हो चुका था। मैंने उसकी टाँगें फैला कर जब चूत देखी तो चूत पूरी गीली हो चुकी थी और लण्ड लेने को लपलपा रही थी।
मेरे लिए अब सब्र करना मुश्किल था। मैंने अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा और एक जबरदस्त धक्के के साथ पूरा लण्ड एक बार में ही उसकी चूत में उतार दिया। चूत पूरी गीली थी पर धक्का इतना जबरदस्त था कि उसकी चीख निकल गई।
मैंने चूची को चूसते हुए धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए। थोड़ी ही देर में वो भी चूतड़ उठा उठा कर लण्ड लेने लगी और फिर तो जोरदार चुदाई शुरू हो गई।
मैं भी पूरा लण्ड डाल डाल कर चुदाई कर रहा था। ऐसे ही करीब आधा घंटे तक हम दोनों एक दूसरे से उलझे रहे। इस दौरान मैंने उसको अलग अलग तरीके से चोदा। कुछ देर तो वो भी मेरे ऊपर चढ़ गई और उछल उछल कर लण्ड लेने लगी।
जोरदार चुदाई के दौरान वो तीन-चार बार झड़ चुकी थी। फिर मेरे लण्ड ने भी फव्वारा चला कर चाची की माँ की चूत वीर्य से भर दी।
उस रात हमने तीन बार चुदाई की और फिर अगले चार महीने जब तक मेरा तबादला नहीं हो गया, मैंने उसको बहुत चोदा और मज़ा लिया।
इस चुदाई से मुझे यह तो पता लग गया कि पुरानी शराब में नशा ज्यादा होता है और मज़ा भी ज्यादा आता है।

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